Blood Pressure: कम उम्र में ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह क्या है? युवाओं में क्यों बढ़ रहा हाइपरटेंशन
Blood Pressure: पहले हाई ब्लड प्रेशर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब 20 से 40 वर्ष की उम्र में भी कई लोगों में बीपी बढ़ने की समस्या देखने को मिल रही है। लंबे समय तक तनाव में रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, अनियमित खानपान, ज्यादा नमक वाला भोजन, बढ़ता वजन और पर्याप्त नींद न लेना इसके पीछे अहम कारण हो सकते हैं। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में हाई बीपी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए कई युवाओं को इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती।
युवाओं में बढ़ता ब्लड प्रेशर इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से हृदय, किडनी, आंखों और मस्तिष्क पर असर पड़ सकता है। सिरदर्द, चक्कर या बेचैनी जैसे लक्षण हर मरीज में दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर बीपी को पहचानने के बजाय समय-समय पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
तनाव और बदलती जीवनशैली बड़ी वजह
आज की जीवनशैली में काम का दबाव, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना आम हो गया है। लंबे समय तक तनाव और खराब नींद शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम बढ़ा सकती है।
खानपान पर भी देना होगा ध्यान
फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, नमकीन और बाहर का भोजन नियमित रूप से खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। इसके साथ ही ज्यादा कैलोरी और कम पौष्टिक भोजन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। मोटापा भी हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।
युवाओं को भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखने के साथ फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अत्यधिक प्रोसेस्ड और नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी महत्वपूर्ण है।
बैठे रहने की आदत बढ़ा रही परेशानी
ऑफिस का काम, ऑनलाइन मीटिंग, मोबाइल और मनोरंजन के कारण युवाओं का सक्रिय समय कम हुआ है। लंबे समय तक बैठे रहने और नियमित व्यायाम न करने से वजन बढ़ने सहित कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना बीपी सहित संपूर्ण हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
नींद को न करें नजरअंदाज
देर रात तक मोबाइल चलाना, अनियमित सोने का समय और लगातार कम नींद लेना भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए नुकसानदायक हो सकता है। युवाओं को नियमित नींद का समय बनाए रखने और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
कब करानी चाहिए बीपी की जांच?
हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना किसी लक्षण के रहता है। इसलिए केवल सिरदर्द या चक्कर आने पर ही बीपी जांचना सही तरीका नहीं है। जिन लोगों में परिवार में हाई बीपी का इतिहास है, वजन अधिक है, शारीरिक गतिविधि कम है या खानपान असंतुलित है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
यदि बार-बार बीपी सामान्य से अधिक आ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। एक-दो रीडिंग के आधार पर स्वयं दवा शुरू करना या बंद करना उचित नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच, घर पर बीपी मॉनिटरिंग या अन्य परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।
युवाओं के लिए जरूरी बदलाव
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन, स्वस्थ वजन और धूम्रपान से दूरी जैसे कदम लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
कम उम्र में बढ़ता बीपी शरीर का एक ऐसा संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से इसे नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Leg Cramps: पैरों में बार-बार ऐंठन होती है तो शरीर में इस चीज की कमी हो सकती है, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
Leg cramps: रात में सोते समय अचानक पैर की मांसपेशियों में तेज खिंचाव और दर्द शुरू हो जाए तो कुछ देर के लिए परेशानी काफी बढ़ जाती है। कई लोगों को यह समस्या कभी-कभार होती है, लेकिन यदि पैरों में बार-बार ऐंठन यानी मांसपेशियों में क्रैम्प पड़ रहे हैं तो इसके पीछे डिहाइड्रेशन, ज्यादा मेहनत, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना या शरीर में कुछ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी जैसे कई कारण हो सकते हैं।
मांसपेशियों के सही तरीके से काम करने के लिए शरीर को मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे खनिजों की जरूरत होती है। इनमें असंतुलन होने पर कुछ लोगों में मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या दिखाई दे सकती है। हालांकि हर बार क्रैम्प को किसी एक पोषक तत्व की कमी से जोड़ना सही नहीं है। बार-बार होने वाली समस्या के पीछे दवाओं, नसों या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की भूमिका भी हो सकती है।
मैग्नीशियम की कमी हो सकती है एक वजह
मैग्नीशियम शरीर में मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर कुछ लोगों में मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन की शिकायत हो सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीज, नट्स और साबुत अनाज मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। हालांकि केवल ऐंठन होने के आधार पर खुद से मैग्नीशियम की सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं है।
पोटैशियम और कैल्शियम का भी रखें ध्यान
पोटैशियम शरीर में मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के कामकाज के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है। शरीर में पोटैशियम का स्तर बहुत कम या बहुत ज्यादा होना स्वास्थ्य के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
इसी तरह कैल्शियम भी मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका संकेतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। केले, दालें, सब्जियां, दूध-दही, तिल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।
पानी की कमी से भी पड़ सकता है क्रैम्प
गर्मी, ज्यादा पसीना आने, व्यायाम या पर्याप्त पानी नहीं पीने की स्थिति में शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इससे कुछ लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत हो सकती है।
इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में शरीर की जरूरत के अनुसार तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है।
ऐंठन होने पर तुरंत क्या करें?
क्रैम्प पड़ने पर प्रभावित मांसपेशी को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें और हल्की मालिश कर सकते हैं। पैर की मांसपेशियों पर अचानक जोर देने के बजाय धीरे-धीरे खिंचाव देना बेहतर रहता है।
यदि व्यायाम के दौरान बार-बार ऐंठन होती है तो एक्सरसाइज से पहले वार्मअप और बाद में हल्की स्ट्रेचिंग करना भी मददगार हो सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि पैरों में ऐंठन लगातार होती है, नींद बार-बार टूटती है या इसके साथ पैरों में सूजन, कमजोरी, सुन्नपन, त्वचा के रंग में बदलाव या लगातार दर्द जैसे लक्षण भी हैं तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कुछ दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी मांसपेशियों में क्रैम्प का कारण बन सकती हैं। इसलिए बार-बार होने वाली ऐंठन में केवल किसी विटामिन या मिनरल की कमी मानकर सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच के बाद कारण का पता लगाकर उपचार की सलाह दे सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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