SEBI प्रमुख Tuhin Kanta Pandey बोले Portfolio Managers के विदेशी निवेश की सीमा RBI तय करेगा
भारतीय निवेशकों के विदेश में पैसा लगाने को लेकर बाजार नियामक सेबी के नए फैसले के बीच उसके अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि देश से बाहर कितना पैसा भेजा जा सकता है और किस तरीके से भेजा जाएगा, यह तय करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक के पास है। पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के ग्राहकों के विदेश में निवेश पर भी यही नियम लागू होंगे।
बुधवार को भारत में पोर्टफोलियो प्रबंधकों के संगठन के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए तुहिन कांत पांडे से पूछा गया कि पोर्टफोलियो प्रबंधकों को विदेश में निवेश की अनुमति मिलने से क्या भारत से ज्यादा पैसा बाहर जा सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि विदेश भेजे जाने वाले धन की सीमा और उसका तरीका भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत तय होगा। उन्होंने साफ किया कि पूरी व्यवस्था विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून और उदारीकृत धन प्रेषण योजना के अनुरूप होनी चाहिए।
बता दें कि सेबी के निदेशक मंडल ने 24 सितंबर को पोर्टफोलियो प्रबंधकों से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दी थी। इन नियमों के तहत विवेकाधीन और गैर-विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधकों को कुछ तय विदेशी निवेश साधनों में पैसा लगाने की अनुमति दी गई है। इनमें विदेश में लिस्टेड कंपनियों के शेयर और ऋण साधन, रियल एस्टेट निवेश न्यास, विदेशी म्यूचुअल फंड, विनिमय कारोबार वाले कोष, इंडेक्स आधारित फंड्स और विदेशी सरकारों के ऋण पत्र शामिल हैं।
हालांकि, यह अनुमति सीधे तौर पर बिना किसी सीमा के विदेश में पैसा भेजने की छूट नहीं है। इसके लिए रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा संबंधी नियम और उदारीकृत धन प्रेषण योजना की शर्तें लागू रहेंगी। पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा के ग्राहकों के लिए विदेश में निवेश की सीमा किस तरह तय होगी, इस पर पांडे ने कोई अलग व्यवस्था नहीं बताई और इस मामले में रिजर्व बैंक की भूमिका की ओर इशारा किया।
सम्मेलन में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पंजीकरण को आसान बनाने को लेकर भी जानकारी दी गई। पांडे ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से जुड़े पंजीकरण दस्तावेजों को स्विफ्ट के माध्यम से जमा कराने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज, आसान और पूरी तरह डिजिटल बनाने पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिशा में कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। इनमें एनएसडीएल का नया डिजिटल मंच, इंडिया मार्केट एक्सेस पोर्टल, ऐसा साझा आवेदन मंच जिससे आवेदन की स्थिति देखी जा सके, कागजी हस्ताक्षर की जगह डिजिटल हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक पावर ऑफ अटॉर्नी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इनके जरिए दस्तावेजों की नोटरी, प्रमाणित कराने और दूतावास से सत्यापन जैसी जरूरतों को कम किया जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की तुलना जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों से भी की गई है। इस बारे में पूछे जाने पर पांडे ने कहा कि निवेशकों को कहां पैसा लगाना है, इसका फैसला निवेशकों को ही करना है। नियामकों के लिए इस मामले में किसी बाजार को लेकर राय देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नियामकों का ध्यान निवेश और पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने पर है।
लिस्टेड कंपनियों की निगरानी और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के सवाल पर पांडे ने कहा कि शेयर बाजार में लिस्टेड होने के बाद भी कंपनियों की निगरानी की जिम्मेदारी शेयर बाजारों की बनी रहती है। अगर किसी कंपनी की वास्तविक मौजूदगी या आर्थिक गतिविधि दिखाई नहीं देती है तो उसे सूची से हटाने के नियम मौजूद हैं और पहले भी ऐसी कंपनियों को सूची से हटाया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक ठीक तरीके से आगे बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि निवेशकों का भरोसा इस बात पर टिका है कि लिस्टेड कंपनियां वास्तविक कारोबार कर रही हैं। पांडे के अनुसार, शेयर बाजारों द्वारा कंपनियों की भौतिक जांच करना भी संभव है।
वहीं, गैर-लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटरों के स्तर पर होने वाले सौदों के सवाल पर उन्होंने कहा कि सेबी को कंपनी कानून और लिस्टिंग से जुड़े नियमों के अनुरूप ही कार्रवाई करनी होगी। इससे साफ है कि नियामक विदेशी निवेश की सुविधा बढ़ाने के साथ निवेशकों की सुरक्षा और बाजार में भरोसा बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहा है।
Hyderabad में नया Talent Hub शुरू कर रही DoorDash, 2 साल में होगी 3000 भर्तियां
हैदराबाद में वैश्विक डिजिटल कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली एक और बड़ी पहल हुई है। अमेरिकी खाद्य और वाणिज्य मंच डोरडैश ने भारत में अपना पहला कार्यालय और टैलेंट सेंटर हैदराबाद में शुरू किया है। कंपनी ने यहां शुरुआत 500 कर्मचारियों के साथ की है और अगले 2 वर्षों में इस सेंटर की टीम को 3,000 से अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
हैदराबाद में वैश्विक डिजिटल कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली एक और बड़ी पहल हुई है। अमेरिकी खाद्य और वाणिज्य मंच डोरडैश ने भारत में अपना पहला कार्यालय और टैलेंट सेंटर हैदराबाद में शुरू किया है। कंपनी ने यहां शुरुआत 500 कर्मचारियों के साथ की है और अगले 2 वर्षों में इस केंद्र की टीम को 3,000 से अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, हैदराबाद स्थित केंद्र में शुरुआत में ग्राहक अनुभव, सेवा की गुणवत्ता और कंपनी के सामान्य प्रशासन से जुड़े कर्मचारी काम करेंगे। ये टीमें दुनिया के अलग-अलग बाजारों में कंपनी के ग्राहकों, कारोबारियों और सामान पहुंचाने वाले कर्मचारियों से जुड़ी सेवाओं को संभालेंगी।
गौरतलब है कि डोरडैश का हैदराबाद केंद्र कंपनी का दुनिया में तीसरा अपना सेवा केंद्र है। इससे पहले ऐसे सेंटर अमेरिका के एरिजोना राज्य के टेम्पे और मेक्सिको सिटी में बनाए जा चुके हैं। हैदराबाद केंद्र को कंपनी की वैश्विक ग्राहक सहायता व्यवस्था के विस्तार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
कंपनी के अनुसार, आने वाले समय में यहां धोखाधड़ी की जांच, सेवा की निगरानी और तकनीकी काम से जुड़े विशेष दल भी तैयार किए जाएंगे। इससे केंद्र का काम केवल ग्राहक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी के वैश्विक कामकाज में इसकी भूमिका धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी।
हैदराबाद के हाईटेक सिटी में बने इस केंद्र का उद्घाटन तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग मंत्री डी श्रीधर बाबू ने किया। इस मौके पर डोरडैश के मुख्य वित्तीय अधिकारी रवि इनुकोन्डा, कार्यबल रणनीति और प्रतिभा भर्ती संचालन की वरिष्ठ निदेशक जेना कोनके तथा राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार साई कृष्णा भी मौजूद रहे।
उद्घाटन के दौरान डी श्रीधर बाबू ने कहा कि डोरडैश का हैदराबाद में निवेश शहर की वैश्विक प्रतिभा केंद्र के रूप में बढ़ती पहचान को मजबूत करता है। उनके अनुसार, यह कदम केवल रोजगार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि दुनिया की बड़ी डिजिटल कंपनियां तेलंगाना से अपने महत्वपूर्ण कामकाज को चला सकती हैं।
उन्होंने कहा कि डोरडैश के आने से हैदराबाद में वैश्विक ऑनलाइन कारोबार और सामान पहुंचाने वाली तकनीकी सेवाओं का समूह और मजबूत होगा। शहर में पहले से ही अमेजन, वॉलमार्ट, फेडएक्स, उबर, जोमैटो और स्विगी जैसी बड़ी कंपनियों की गतिविधियां मौजूद हैं।
डोरडैश की वरिष्ठ अधिकारी जेना कोनके ने कहा कि हैदराबाद की प्रतिभाशाली कार्यशक्ति, तकनीकी माहौल और वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए मौजूद सुविधाओं ने भारत में लंबे समय के निवेश के लिए शहर को स्वाभाविक विकल्प बनाया है।
बता दें कि डोरडैश 40 से अधिक देशों में काम करता है। कंपनी के अनुसार, वर्ष 2025 में उसके मंच के जरिए 100 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के कुल ऑर्डर हुए थे। कंपनी की सेवाएं ऐसे बाजारों में मौजूद हैं जिनकी कुल आबादी 1 अरब से अधिक है और उसके मंच पर हर महीने 56 मिलियन से ज्यादा ग्राहक सक्रिय रहते हैं।
हैदराबाद पहले से ही वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है। तेलंगाना सरकार के अनुसार, शहर में 500 से अधिक ऐसे केंद्र काम कर रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य 100 से ज्यादा नए वैश्विक क्षमता केंद्र लाना है, जिससे करीब 1 लाख अतिरिक्त उच्च मूल्य वाली नौकरियां और 3 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
मौजूदा अनुमान के अनुसार, हैदराबाद में वैश्विक क्षमता केंद्रों में 5 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं। तेलंगाना सरकार का अनुमान है कि यह संख्या वर्ष 2029 तक बढ़कर 10 लाख तक पहुंच सकती है। ऐसे में डोरडैश का नया केंद्र हैदराबाद के बढ़ते वैश्विक कारोबारी और तकनीकी नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण जुड़ाव माना जा रहा है।
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