मोदी-ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत: व्यापार से ऊर्जा तक कई मुद्दों पर चर्चा; रणनीतिक साझेदारी पर भी बनी सहमति
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को फोन पर अहम बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। बातचीत के दौरान दोनों देशों की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
व्यापार और वाणिज्य पर भी हुई चर्चा
मोदी-ट्रंप की बातचीत ऐसे समय हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वार्ता चल रही है। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं। इस दौरान वह अमेरिकी अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।
दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में भी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, कई दौर की वार्ता के बावजूद अभी तक समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। व्यापार के साथ-साथ अमेरिकी शुल्क और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद से जुड़े मुद्दे भी बातचीत के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं।
रक्षा सहयोग पर भी जोर
भारत और अमेरिका के संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग, संयुक्त विकास, उत्पादन और अत्याधुनिक रक्षा तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत में भी रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी में रक्षा और सुरक्षा सहयोग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीक पर भी चर्चा
बातचीत में ऊर्जा और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को भी शामिल किया गया। भारत-अमेरिका सहयोग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
ऊर्जा के मोर्चे पर दोनों देशों के संबंधों में रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी अहम है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार अपना पक्ष रखता रहा है, जबकि अमेरिका की ओर से रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर नए शुल्क और प्रतिबंधात्मक उपायों ने व्यापार वार्ता को प्रभावित किया है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयासों पर चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक तकनीक से जुड़े मुद्दे एक साथ महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
जून में एवियन में हुई थी आमने-सामने मुलाकात
मोदी और ट्रंप की पिछली आमने-सामने मुलाकात 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, रणनीतिक तकनीक, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार में हुई प्रगति की समीक्षा की थी। दोनों ने अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया था।
अब फोन पर हुई ताजा बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
वैश्विक संकट के बीच भारत में कारोबारी विश्वास मजबूत, ASSOCHAM सूचकांक में 5.6 प्रतिशत सुधार
पश्चिम एशिया संकट, ऊंची ऊर्जा कीमतों, महंगाई और रुपये में गिरावट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-सितंबर, 2026-27 के दौरान भारत में कारोबारी भरोसा बरकरार है। उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा बुधवार को परीक्षण के आधार पर जारी नए सूचकांक से यह जानकारी मिली। एसोचैम व्यापार भरोसा (एबीसी) सूचकांक सितंबर में 128.25 रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 118.72 था।
अप्रैल-सितंबर, 2026-27 के दौरान सूचकांक में सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत सुधार हुआ। इस सूचकांक में अप्रैल, 2023 को आधार महीना माना गया है और इसका आधार मूल्य 100 रखा गया है। एसोचैम ने कहा कि उद्योग जगत और विश्लेषकों से मिले सुझावों के आधार पर सूचकांक को आगे और मजबूत किया जाएगा।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा, ‘‘एबीसी सूचकांक भारत की आर्थिक स्थिति का समग्र आकलन करता है। इसमें 20 प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आर्थिक परिस्थितियों में सुधार हो रहा है, गिरावट आ रही है या वे स्थिर हैं। यह सूचकांक कारोबारियों, नीति निर्माताओं और निवेशकों को बदलते आर्थिक माहौल की व्यापक तस्वीर देगा और उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेगा।’’ समग्र सूचकांक तैयार करने में जीएसटी संग्रह, यात्री वाहन बिक्री, सेंसेक्स, भारत का संयुक्त खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई), निर्यात, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), बुनियादी उद्योगों का सूचकांक (आईसीआई), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), बैंक ऋण और डिजिटल भुगतान की संख्या समेत 20 संकेतकों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई), विदेशी मुद्रा भंडार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिमय दर, रेपो दर, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर, बेरोजगारी दर, सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में चालू खाते का घाटा, सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा और आर्थिक सुधारों के प्रभाव से संबंधित सूचकांक आधारित प्रतिक्रियाओं को भी इसमें शामिल किया गया है। एसोचैम ने कहा कि विभिन्न संकेतकों में बदलाव को कारोबारी और आर्थिक माहौल में बदलाव के अनुरूप दर्शाने के लिए सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर उनके अलग-अलग भारांश तय किए गए हैं। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा, ‘‘एबीसी सूचकांक प्रमुख संकेतकों को एक साथ लाकर कारोबारी और आर्थिक माहौल में हो रहे बदलाव का व्यवस्थित आकलन करता है।
इससे कारोबारी गतिविधियों की गति और उभरते रुख को समझने में मदद मिलेगी।’’ एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री एस पी शर्मा ने कहा कि यह सूचकांक प्रमुख आर्थिक संकेतकों में होने वाले बदलावों को एक साथ रखकर आर्थिक गतिविधियों की गति की समग्र तस्वीर पेश करने और बदलती आर्थिक परिस्थितियों पर अधिक प्रभावी ढंग से नजर रखने के लिए तैयार किया गया है।
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