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वैश्विक संकट के बीच भारत में कारोबारी विश्वास मजबूत, ASSOCHAM सूचकांक में 5.6 प्रतिशत सुधार

पश्चिम एशिया संकट, ऊंची ऊर्जा कीमतों, महंगाई और रुपये में गिरावट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-सितंबर, 2026-27 के दौरान भारत में कारोबारी भरोसा बरकरार है। उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा बुधवार को परीक्षण के आधार पर जारी नए सूचकांक से यह जानकारी मिली। एसोचैम व्यापार भरोसा (एबीसी) सूचकांक सितंबर में 128.25 रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 118.72 था।

अप्रैल-सितंबर, 2026-27 के दौरान सूचकांक में सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत सुधार हुआ। इस सूचकांक में अप्रैल, 2023 को आधार महीना माना गया है और इसका आधार मूल्य 100 रखा गया है। एसोचैम ने कहा कि उद्योग जगत और विश्लेषकों से मिले सुझावों के आधार पर सूचकांक को आगे और मजबूत किया जाएगा।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा, ‘‘एबीसी सूचकांक भारत की आर्थिक स्थिति का समग्र आकलन करता है। इसमें 20 प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आर्थिक परिस्थितियों में सुधार हो रहा है, गिरावट आ रही है या वे स्थिर हैं। यह सूचकांक कारोबारियों, नीति निर्माताओं और निवेशकों को बदलते आर्थिक माहौल की व्यापक तस्वीर देगा और उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेगा।’’ समग्र सूचकांक तैयार करने में जीएसटी संग्रह, यात्री वाहन बिक्री, सेंसेक्स, भारत का संयुक्त खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई), निर्यात, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), बुनियादी उद्योगों का सूचकांक (आईसीआई), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), बैंक ऋण और डिजिटल भुगतान की संख्या समेत 20 संकेतकों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई), विदेशी मुद्रा भंडार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिमय दर, रेपो दर, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर, बेरोजगारी दर, सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में चालू खाते का घाटा, सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा और आर्थिक सुधारों के प्रभाव से संबंधित सूचकांक आधारित प्रतिक्रियाओं को भी इसमें शामिल किया गया है। एसोचैम ने कहा कि विभिन्न संकेतकों में बदलाव को कारोबारी और आर्थिक माहौल में बदलाव के अनुरूप दर्शाने के लिए सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर उनके अलग-अलग भारांश तय किए गए हैं। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा, ‘‘एबीसी सूचकांक प्रमुख संकेतकों को एक साथ लाकर कारोबारी और आर्थिक माहौल में हो रहे बदलाव का व्यवस्थित आकलन करता है।

इससे कारोबारी गतिविधियों की गति और उभरते रुख को समझने में मदद मिलेगी।’’ एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री एस पी शर्मा ने कहा कि यह सूचकांक प्रमुख आर्थिक संकेतकों में होने वाले बदलावों को एक साथ रखकर आर्थिक गतिविधियों की गति की समग्र तस्वीर पेश करने और बदलती आर्थिक परिस्थितियों पर अधिक प्रभावी ढंग से नजर रखने के लिए तैयार किया गया है।

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PM DHARA स्कीम को मिली मंजूरी, 51126 किमी नई Transmission Line से 135 GW बिजली की होगी सप्लाई

देश में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब इसके साथ बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की चुनौती भी सामने आ रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने हरित ऊर्जा गलियारा चरण-3 योजना का नया नाम पीएम धारा रखा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को इसके लिए 1,86,405 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में अक्षय ऊर्जा से बनने वाली 135 गीगावाट तक बिजली को बिजली तंत्र तक पहुंचाने के लिए पारेषण व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके साथ ही 50 गीगावाट घंटा क्षमता वाली बैटरी भंडारण व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। बता दें कि देश में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ बिजली उत्पादन और उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के बीच तालमेल बनाए रखना बड़ी जरूरत बन गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में सौर तथा पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ रही है। कई जगह बिजली उत्पादन की नई परियोजनाएं पारेषण ढांचे के मुकाबले तेजी से तैयार हो रही हैं। ऐसे में बिजली को समय पर बाहर भेजने के लिए पर्याप्त लाइन और उपकेंद्र उपलब्ध नहीं होने पर उत्पादन को कम करना पड़ सकता है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि देश में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली तंत्र को भी उसी हिसाब से तैयार करना होगा। सौर ऊर्जा दिन में उपलब्ध रहती है, जबकि रात में इसका उत्पादन नहीं होता। इसी तरह पवन ऊर्जा का उत्पादन भी पूरे दिन और अलग-अलग मौसम में बदलता रहता है। इसलिए बिजली तंत्र में इन बदलावों को संभालने की क्षमता जरूरी है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, योजना के तहत 51,126 सर्किट किलोमीटर लंबी नई पारेषण लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके अलावा 2,28,903 एमवीए क्षमता वाले उपकेंद्र तैयार किए जाएंगे। 50 गीगावाट घंटा बैटरी भंडारण व्यवस्था भी इस योजना का हिस्सा होगी।

योजना के कुल खर्च में 1,36,378 करोड़ रुपये राज्यों के भीतर की पारेषण व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 50,000 करोड़ रुपये 50 गीगावाट घंटा बैटरी भंडारण के लिए रखे गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य राज्यों के भीतर बिजली पारेषण का खर्च कम करना और अक्षय ऊर्जा से मिलने वाली बिजली की लागत को नियंत्रण में रखना है। योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

गौरतलब है कि नई व्यवस्था में नई पारेषण परियोजनाओं को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। चुनी गई कंपनियां इन संपत्तियों का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और रखरखाव करेंगी। पहले से मौजूद पारेषण ढांचे को मजबूत करने और उसमें सुधार से जुड़े काम लागत के आधार पर किए जाएंगे। राज्य पारेषण उपयोगिताएं योजना के मुख्य क्रियान्वयन निकाय होंगी।

पारेषण की कमी की समस्या इसलिए भी अहम है क्योंकि अक्षय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्र और बिजली की सबसे ज्यादा मांग वाले क्षेत्र हमेशा एक जगह नहीं होते। उदाहरण के लिए राजस्थान और गुजरात में बड़ी मात्रा में सौर ऊर्जा बनती है, जबकि इसकी खपत देश के दूसरे हिस्सों में होती है। ऐसे में मजबूत पारेषण नेटवर्क के बिना अतिरिक्त बिजली का पूरा इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।

बैटरी भंडारण व्यवस्था इस समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ज्यादा उत्पादन के समय अतिरिक्त बिजली को इसमें जमा किया जा सकेगा और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे सौर ऊर्जा के कम उत्पादन वाले समय, पारेषण पर दबाव और बिजली की मांग बढ़ने के दौरान मदद मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि यह योजना पहले शुरू किए गए हरित ऊर्जा गलियारा चरण-1 और चरण-2 की अगली कड़ी है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2026 के अंत तक देश में कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 295.55 गीगावाट से अधिक हो चुकी थी, जिसमें सौर ऊर्जा की क्षमता 168.04 गीगावाट थी। ऐसे में आगे बढ़ती क्षमता के साथ पारेषण व्यवस्था का विस्तार भी जरूरी हो गया है। 

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  Sports

Kuldeep Yadav 200 ODI Wickets से 2 कदम दूर, गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका

भारत के स्टार स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव के पास वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में एक खास उपलब्धि हासिल करने का मौका है। वह वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने से सिर्फ 2 विकेट दूर हैं। अगर गुवाहाटी में कुलदीप यह मुकाम हासिल कर लेते हैं, तो वह भारत के उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने 50 ओवर के प्रारूप में 200 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं।

बता दें कि कुलदीप ने पहले वनडे में तिरुवनंतपुरम में शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट हासिल किए थे। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। अब दूसरे वनडे से पहले उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा हुआ है और टीम को उनसे एक बार फिर अहम योगदान की उम्मीद है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कुलदीप ने अब तक 122 वनडे मैचों में 198 विकेट लिए हैं। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 26.70 रहा है। उनके नाम 10 बार 4 विकेट और 2 बार 5 विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है। वनडे में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट रहा है।

200 विकेट पूरे करने के बाद कुलदीप भारत के 9वें ऐसे गेंदबाज बन जाएंगे, जिन्होंने वनडे में यह आंकड़ा पार किया है। भारत के लिए इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड अनिल कुंबले के नाम है। कुंबले ने 269 वनडे मैचों में 334 विकेट लिए हैं।

भारतीय स्पिन गेंदबाजों की बात करें तो कुलदीप से पहले सिर्फ 3 गेंदबाज 200 विकेट का आंकड़ा पार कर सके हैं। अनिल कुंबले के 334 विकेट के अलावा हरभजन सिंह ने 265 और रवींद्र जडेजा ने 232 विकेट लिए हैं। ऐसे में कुलदीप के पास इस खास सूची में अपना नाम दर्ज कराने का मौका है।

हालांकि, इस साल कुलदीप का प्रदर्शन लगातार एक जैसा नहीं रहा है। उन्होंने 2026 में अब तक 5 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें उन्हें 7 विकेट मिले हैं। इस दौरान उनका औसत 37.71 और रन खर्च करने की दर 5.86 रही है। ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच की 4 विकेट वाली गेंदबाजी उनके लिए अहम वापसी के तौर पर देखी जा रही है।

गौरतलब है कि दूसरे वनडे में भारत की टीम की कमान शुभमन गिल संभाल रहे हैं। टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल, रवींद्र जडेजा, नितीश कुमार रेड्डी और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। वेस्टइंडीज की टीम में जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टी, शाई होप, रोस्टन चेज, गुडाकेश मोती, अल्जारी जोसेफ और जयडेन सील्स जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं।

कुलदीप के लिए गुवाहाटी का मुकाबला सिर्फ एक और वनडे नहीं होगा। 200 विकेट का आंकड़ा उनके करियर में एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि साबित हो सकता है और इसके लिए उन्हें सिर्फ 2 विकेट की जरूरत है।

Wed, 30 Sep 2026 22:31:00 +0530

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