समस्तीपुर-छेड़खानी के चौथे आरोपी के घर चला बुलडोजर:नोटिस के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया, 72 घंटे बाद एक्शन; 3 आरोपियों के घर हो चुकी कार्रवाई
समस्तीपुर में नाबालिग से बदसलूकी के मामले में प्रशासन ने मुख्य आरोपी विकास कुमार शर्मा के घर पर बुधवार को बुलडोजर चलाया। सरकारी जमीन पर बने मकान को लेकर प्रशासन ने विकास के परिजनों को दो बार नोटिस जारी किया था। पहली बार 26 सितंबर को 24 घंटे का नोटिस दिया गया था। इसके बाद 27 सितंबर को 72 घंटे का दूसरा नोटिस जारी किया गया। इसमें विकास के परिवार को अतिक्रमण हटाने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया था। सदर SDPO राकेश कुमार ने बताया कि निर्धारित समय-सीमा पूरी होने के बाद भी विकास के परिजनों ने अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने अपने स्तर से कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। जमीन की मापी के दौरान पक्के मकान का कुछ हिस्सा अवैध पाया गया प्रशासन के अनुसार, जमीन की मापी के दौरान विकास कुमार शर्मा के पक्के मकान का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर बना पाया गया था। मकान पक्का और बड़ा होने के कारण उसे तत्काल नहीं हटाया गया। नियमानुसार पहले नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने का मौका दिया गया। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर दूसरी नोटिस जारी की गई। तीन आरोपियों के घर पहले ही चल चुका है बुलडोजर सदर SDPO राकेश कुमार ने बताया कि विकास कुमार शर्मा, राहुल पासवान, अवधेश पासवान और रामबाबू सहनी के मकान सरकारी जमीन पर बने होने की सूचना मिली थी। इसके बाद अंचल कार्यालय की टीम ने जमीन की मापी कराई। मापी के दौरान सरकारी जमीन पर निर्माण की पुष्टि होने के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। राहुल पासवान, अवधेश पासवान और रामबाबू सहनी के मकान का जो हिस्सा सरकारी जमीन पर बना था, उसे प्रशासन ने हटा दिया। इनमें अधिकांश निर्माण झोपड़ी और कच्चे ढांचे के थे, इसलिए उन्हें तत्काल हटाया गया। रामबाबू सहनी के घर के पास सरकारी जमीन पर बनी चाय की दुकान को भी हटाया गया। वहीं, विकास कुमार शर्मा का मकान पक्का और बड़ा होने के कारण उसे हटाने से पहले नियमानुसार नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जरिए अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित समय दिया गया था। अवधेश की PDS दुकान का लाइसेंस रद्द मामले में गिरफ्तार अवधेश पासवान की जनवितरण प्रणाली (PDS) दुकान का लाइसेंस भी सदर SDPO ने तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था। अवधेश पर नाबालिग से बदसलूकी के मामले में गिरफ्तार होकर जेल भेजे जाने के बाद कार्रवाई की गई थी। विकास और राहुल के माफी मांगते वीडियो सामने आए मामले में जेल भेजे गए मुख्य आरोपी विकास कुमार शर्मा और राहुल पासवान के माफी मांगते वीडियो भी सामने आए थे। पहले वीडियो में विकास कुमार शर्मा एक कमरे में खड़ा दिखाई दे रहा था। वो अपना परिचय देते हुए कहता है कि उस पर लड़की से बदसलूकी का आरोप लगा है। इसके बाद हाथ जोड़कर समाज और प्रशासन से माफी मांगता है और भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की बात कहता है। वीडियो में उसके दाहिने हाथ पर पट्टी बंधी दिखाई दे रही है। दूसरे वीडियो में राहुल पासवान बारिश के दौरान एक पेड़ के पास जमीन पर बैठा दिखाई दे रहा है। वो भी अपना परिचय देता है और हाथ जोड़कर माफी मांगता है। वीडियो में वह कान पकड़कर दोबारा ऐसी गलती नहीं करने की बात कहता है। विकास पर पहले से शराब कारोबार के मामले दर्ज पुलिस के अनुसार, विकास कुमार शर्मा पर शराब कारोबार से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं। वो पहले शराब मामले में जेल भी भेजा जा चुका है। इसके अलावा, उसके घर से शराब बरामद होने के एक मामले में उसकी मां को भी जेल जाना पड़ा था। विकास के भाई सुभाष कुमार शर्मा के संबंध में भी पुलिस रिकॉर्ड में आपराधिक मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। वो तेलंगाना में हत्या के एक मामले में जेल में है। इस मामले में निचली अदालत से उसे फांसी की सजा सुनाए जाने और उच्च न्यायालय में अपील लंबित होने की जानकारी दी गई है। 23 सितंबर को सामने आया था नाबालिग से बदसलूकी का वीडियो कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में बूढ़ी गंडक नदी के बाईपास बांध पर नाबालिग से बदसलूकी का वीडियो 23 सितंबर को सामने आया था। समस्तीपुर एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने जांच के बाद बताया था कि वीडियो 15 सितंबर का था। उन्होंने बताया कि वीडियो में दिख रही नाबालिग अपने दोस्त के साथ तस्वीर क्लिक करा रही थी। इसी दौरान चारों आरोपियों ने उसके साथ बदसलूकी शुरू कर दी थी। वीडियो सामने आने के बाद कर्पूरीग्राम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विकास कुमार शर्मा, राहुल पासवान, अवधेश पासवान और रामबाबू सहनी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब तक पीड़िता की पहचान नहीं घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक पीड़िता की पहचान नहीं कर पाई है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता सामने नहीं आना चाहती है। उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आखिर में नाबालिग से छेड़छाड़ की तस्वीरें देखिए… सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में क्या आदेश दिया था... सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय न करें कि दोषी कौन है। बेंच ने ये भी कहा था कि 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण गिराया तो अफसर के खर्च पर दोबारा बनाना पड़ेगा। अदालत ने 15 गाइडलाइंस भी दीं थीं। अब जानिए बुलडोजर एक्शन को लेकर SC की क्या है गाइडलाइन
इधर विपक्षी गठबंधन INDIA अपनी बैठक में व्यस्त रहा, उधर Modi Cabinet ने कई बड़े फैसले लेकर देश को चौंका दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने किसानों, अक्षय ऊर्जा और राजधानी दिल्ली की यातायात व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगा दी। बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। उन्होंने बताया कि इन तीनों फैसलों से जुड़ा कुल वित्तीय प्रावधान 2 लाख 79 हजार 157 करोड़ रुपये का है।
हम आपको बता दें कि बैठक का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ने वाला है। मोदी सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय इस मूल्य व्यवस्था में उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का लाभांश सुनिश्चित करने सहित लागत, फसलों के बीच आय का संतुलन, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें, मांग-आपूर्ति तथा कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र के बीच व्यापारिक संबंधों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।
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नई व्यवस्था के तहत गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, जौ का 2,286 रुपये, चने का 5,958 रुपये, मसूर का 7,390 रुपये, सरसों का 6,613 रुपये और कुसुम का 7,215 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक रबी विपणन सत्र 2027-28 में 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए किसानों को करीब 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान अनुमानित है।
दूसरा बड़ा फैसला अक्षय ऊर्जा के मोर्चे पर है। मंत्रिमंडल ने पीएम धारा योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत कुल 1 लाख 86 हजार 405 करोड़ रुपये का परियोजना व्यय होगा, जिसमें 54 हजार 82 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। योजना का उद्देश्य देश में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ उसके लिए जरूरी पारेषण व्यवस्था को मजबूत करना है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जबकि 2035-36 तक 786 गीगावाट क्षमता की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत 135 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के पारेषण और 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण व्यवस्था विकसित की जाएगी। राज्यों की पारेषण उपयोगिता एजेंसियां इसे लागू करेंगी। नई पारेषण लाइनों का निर्माण प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा, जबकि मौजूदा नेटवर्क के उन्नयन के लिए लागत आधारित व्यवस्था अपनाई जाएगी।
तीसरा और दिल्ली से सीधे जुड़ा फैसला एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली को मंजूरी देना है। इसके लिए 1,790 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक दिल्ली की 1,529 यातायात बत्तियां अभी निश्चित समय-सारिणी और मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भर हैं तथा जाम बढ़ने पर स्वतः प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं। नई व्यवस्था में यातायात नियंत्रण, नियमों का पालन, वास्तविक समय की यातायात जानकारी और मार्ग परिवर्तन को एक ही तकनीकी मंच से जोड़ा जाएगा।
यह परियोजना 24 महीने में तीन चरणों में लागू होगी। पहले चरण में पांच मार्गों पर 250 स्मार्ट यातायात बत्तियां और मुख्य नियंत्रण केंद्र, दूसरे चरण में सात मार्गों पर 222 स्मार्ट यातायात बत्तियां तथा आपदा पुनर्प्राप्ति व्यवस्था और तीसरे चरण में 30 मार्गों पर 620 स्मार्ट यातायात बत्तियां लगाई जाएंगी। इसके बाद पांच वर्षों तक रखरखाव किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यवस्था यातायात उल्लंघनों की पहचान करने के साथ चोरी या वांछित वाहनों की पहचान में भी मदद करेगी। इस तरह मोदी सरकार के आज के फैसलों का फोकस किसान की आय, ऊर्जा ढांचे के विस्तार और दिल्ली की यातायात व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर साफ तौर पर दिखाई देता है।
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