पटाखों पर पूरे देश में नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट ने कहा “दिवाली से जुड़ी हैं लोगों की भावनाएं”
दिवाली से पहले पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरे देश में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का उसका इरादा नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। ऐसे में अदालत का प्रयास पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय पर्यावरण और लोगों की धार्मिक-सामाजिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने का है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखे चलाने के लिए 24 घंटे की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक पटाखे चलने से होने वाले प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कुछ सीमाएं तय करना जरूरी होगा।
पटाखों की किस्म और समय पर तय होंगे नियम
सुप्रीम कोर्ट अब पटाखों की अलग-अलग किस्मों और उनके इस्तेमाल की समयसीमा पर विचार करेगा। अदालत का कहना है कि दिवाली मनाने की लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को भी ध्यान में रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। इस दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर नियम और शर्तें तय किए जाने पर विचार किया जाएगा।
लंबे समय से चल रहा है पटाखों के प्रदूषण का मामला
पटाखों से होने वाले प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2015 से चल रहा है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रदूषण प्रभावित इलाकों में दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता खराब होने को लेकर अदालत पहले भी कई आदेश दे चुकी है। वर्ष 2018 में अदालत ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कई तरह की शर्तें लगाई थी। अदालत ने कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों को अनुमति दी थी और कुछ रसायनों के इस्तेमाल वाले पटाखों पर रोक लगाई थी। साथ ही दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात 8 बजे से 10 बजे तक की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बाद भी प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए अदालत अलग-अलग मौकों पर पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर निर्देश देती रही है।
त्योहार और प्रदूषण के बीच संतुलन की कोशिश
इस बार सुनवाई में अदालत का रुख साफ है कि पटाखों पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। साथ ही बिना किसी समय सीमा के पटाखे चलाने की छूट भी नहीं होगी। अब अदालत पटाखों के प्रकार और उन्हें चलाने के लिए निर्धारित समय को लेकर नियम तय करेगी। 15 अक्टूबर की सुनवाई के बाद इस मामले में तस्वीर स्पष्ट होगी।
CG Cabinet Decision: अतिथि व्याख्याता नीति में बदलाव, पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती नियम तय, पढ़ें छत्तीसगढ़ कैबिनेट के फैसले
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार, 30 सितंबर को मंत्रालय (महानदी भवन) में कैबिनेट की अहम बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में फिल्म ‘हनुमान अंश’को टैक्स फ्री करने के अलावा अतिथि व्याख्याताओं (गेस्ट लेक्चरर्स) और पूर्व अग्निवीरों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए हैं।
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा 10 सितम्बर, 2026 को फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा के परिपालन में, फिल्म के प्रदर्शन पर प्रवेश के लिए देय राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति सिनेमाघरों को किए जाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश का अनुसमर्थन किया गया।
पूर्वअग्निवीर सैनिकों के लिए भी अहम फैसला
कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।
अब इस आरक्षण को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026 बनाया गया है, जिसका कैबिनेट सदस्यों द्वारा अनुमोदन किया गया है। इन नियमों में नियुक्ति एवं सेवा शर्तें, भर्ती के मापदंड, आरक्षण और चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
अतिथि व्याख्याता नीति (पॉलिसी)-2024 में बदलाव
- कैबिनेट बैठक में प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति (पॉलिसी)-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत जारी संशोधित नीति-2026 का कार्याेत्तर अनुमोदन किया गया।
- संशोधित नीति में पूर्व की व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के 2 अभ्यर्थियों के अंक समान होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी।
- अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के अंतर्गत अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूर्ण करने पर 5 अंक दिए जाने का प्रावधान किया गया है। पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालय में किए गए अध्यापन अनुभव का यह लाभ स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था।
- कैबिनेट द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के कार्यानुभव का उपयोग करते हुए उन्हें रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर दिया जाए तथा मानदेय निर्धारण में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखण्ड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाए।
- अतिथि व्याख्याताओं एवं अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि एवं आकस्मिक अवकाश संबंधी प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News








