INDIA Bloc की बैठक में Mallikarjun Kharge ने EVM और SIR पर उठाए सवाल, रखीं 6 मांगें
SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर संयुक्त आंदोलन की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। इस दौरान कांग्रेस ने कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए एकजुट है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छह मांगें रखीं और कहा कि भविष्य के चुनावों के लिए SIR से पहले वाली मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में हर संशोधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र और बूथ-वार आधार पर नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की जानकारी शामिल हो।
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खड़गे ने छह मांगें
- भविष्य के चुनावों के लिए SIR से पहले वाली वोटर लिस्ट का इस्तेमाल हो। वोटर लिस्ट में हर बदलाव में पूरी पारदर्शिता हो, जिसमें चुनाव क्षेत्र और बूथ के हिसाब से नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की जानकारी शामिल हो।
- दूसरा, किसी भी असली वोटर का नाम लिस्ट से हटाने से पहले उचित सूचना, कारण और अपील करने का असरदार तरीका हो।
- तीसरा, प्रशासनिक कमियों, अधूरे कागज़ात या जानकारी की कमी की वजह से योग्य वोटरों के नाम लिस्ट से हटने से बचाना।
- चौथा, EVM की जगह बैलेट पेपर से वोटिंग हो।
- पांचवां, हमारे युवा नागरिकों, खासकर पहली बार वोट देने वालों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन आसान और सुलभ हो।
- छठा, संस्थागत जवाबदेही और ऐसा चुनाव आयोग जिस पर सभी राजनीतिक दलों का भरोसा हो।
अपनी शुरुआती बातों में खड़गे ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एक ऐसा देश है जिसकी लोकतांत्रिक परंपराएं एक सरल लेकिन गहरे सिद्धांत पर बनी हैं - कि देश की सरकार चुनने में हर नागरिक की बराबर की आवाज़ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं।
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उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि सालों से हम EVM पर जवाब मांग रहे हैं। हमने वोटर लिस्ट में हेर-फेर और चुनावी रोल में बिना वजह किए गए बदलावों पर सवाल उठाए हैं। राहुल जी ने सबूत के साथ दिखाया कि महादेवपुरा, आलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में ऐसा हुआ था। इसी तरह INDIA गठबंधन की पार्टियों ने भी इस मामले में सवाल उठाए और आपत्तियां दर्ज कराईं। लेकिन अफ़सोस, सब बेकार गया। उन्होंने कहा कि हमारी शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय आयोग ने दूसरी तरफ़ मुँह फेर लिया, जबकि लोकतंत्र में संस्थाओं को पारदर्शिता के ज़रिए जनता का भरोसा जीतना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: तारीख पर तारीख से नाराज बेंच बोली-'इस मामले को नजर लग गई है
सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में बार-बार सुनवाई टलने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला "मनहूस" (jinxed) है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था। कोर्ट ने कहा कि हमें आप सभी की बात सुननी होगी। इस मायने में यह मामला मनहूस है। एक के बाद एक तारीख पर सुनवाई टलती जा रही है। बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उसे बताया गया कि हाई कोर्ट में मामला करने वाले पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए हैं। इससे पहले पक्षों ने हिंदू पक्ष के भीतर ही पैदा हुए विवाद को सुलझाने की संभावना जताई थी।
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कोर्ट ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष के आधार पर पक्षों की दलीलें सुनेगी। हालांकि, समय की कमी के कारण, सुनवाई के लिए याचिका को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष (वादी) ने सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर कर दावा किया कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कृष्ण जन्मभूमि की ज़मीन पर किया गया था। यह सिविल मुकदमा हिंदू देवता भगवान श्री कृष्ण विराजमान और कुछ हिंदू भक्तों की ओर से दायर किया गया था। वादियों ने मस्जिद को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की मांग की। वादियों ने यह भी दावा किया कि ऐसे कई संकेत हैं जिनसे पता चलता है कि शाही ईदगाह मस्जिद असल में एक हिंदू मंदिर है। इसलिए, जगह की जांच के लिए एक कमिश्नर नियुक्त करने की अर्ज़ी हाई कोर्ट में दी गई।
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शुरू में सितंबर 2020 में सिविल कोर्ट ने 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' के तहत मामला स्वीकार करने पर लगी रोक का हवाला देते हुए मुख्य मुकदमा खारिज कर दिया था। हालांकि, मथुरा ज़िला अदालत में अपील के बाद इस फ़ैसले को पलट दिया गया। मई 2022 में मथुरा ज़िला अदालत ने कहा कि मुकदमा चलाने योग्य है। बाद में, 2023 में इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
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