ममता बनर्जी की मुराद हुई पूरी? सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुवेंदु अधिकारी को झटका
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी मुकाबला अब कोर्ट तक पहुंच चुका है. कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. राज्य सरकार ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया. अब मामले पर 5 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी.
इस घटनाक्रम को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि मिलन प्रधान को हाईकोर्ट ने 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है, जिससे अब 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए प्रचार कर सकेंगे. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई चुनाव से टीक एक दिन पहले होगी.
आखिर पूरा मामला क्या है?
नंदीग्राम उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए 6 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप शामिल हैं.
प्रधान को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामला उस समय और ज्यादा राजनीतिक हो गया है जब उनकी गिरफ्तारी ऐसे में हुई, जब वह नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जा चुके थे.
कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए, जबिक राज्य सरकार का पक्ष था कि पुलिस पुराने लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है.
हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
मिलन प्रधान के लिए सबसे बड़ा मोड़ 29 सितंबर को आया. कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने उन्हें 6 मामलों में अंतरिक जमानत दे दी.
कोर्ट ने जमानत 20 अक्टूबर तक दी है. इसका मतलब यह हुआ कि प्रधान 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के दौरान चुनाव प्रचार कर सकते हैं. अदालत ने उन्हें 21 अक्टूबर को संबंधित ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. हर मामले में 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड जमा करने की शर्त भी रखी गई है.
कोर्ट ने कुछ अन्य शर्तें भी लगाई हैं. इनमें जांच अधिकारी को मोबाइल नंबर ुपलब्ध कराना शामिल है और जांच अधिकारी को दिन में दो बार उनसे संपर्क करने की अनुमति दी गई है. यानी हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल मिलन प्रधान के सामने चुनाव लड़ने और प्रचार करने का रास्ता खुल गया है.
अब सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची बंगाल सरकार?
हाईकोर्ट के इसी आदेश को पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की.
सरकार की दलील का मुख्य आधार यह था कि चुनाव प्रक्रिया बहुत करीब है. अगर मामले की सुनवाई चुनाव के बाद हुई तो याचिका का व्यावहारिक असर कम हो सकता है.
रिपोर्टों के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से अगले ही दिन मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और 5 अक्टूबर की तारीख तय की. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं.
भारत में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ 20 प्रतिशत रहने की उम्मीद: सेबी चेयरमैन
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री के 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की ओर से बुधवार को दी गई।
एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) की तीसरी सालाना इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, पांडे ने कहा कि भारत के निवेश क्षेत्र के कई हिस्से 15 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रहे हैं, जिससे पीएमएस के 20 प्रतिशत की दर से बढ़ने की गुंजाइश बन रही है।
हालांकि, सेबी चेयरमैन ने इस आंकड़े को औपचारिक ग्रोथ अनुमान के तौर पर पेश नहीं किया, बल्कि वेल्थ क्रिएशन और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने के साथ निवेश उत्पादों की संभावनाओं के बारे में बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि पीएमएस इंडस्ट्री को भी तेजी से बदलते और विविध निवेश माहौल में अपनी जगह बनानी होगी, जहां म्यूचुअल फंड और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) जैसे प्रोडक्ट्स अलग-अलग तरह के निवेशकों की जरूरतें पूरी करते हैं।
पांडे ने कहा, हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि हमारे पास दूसरे विकल्प भी हैं। हमारे पास म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री और एआईएफ हैं। ये ऐसे माध्यम हैं जो अलग-अलग तरह के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करते हैं। जरूरी नहीं कि वे एक-दूसरे के साथ मुकाबला ही करें।
उन्होंने कहा कि पीएमएस खास तौर पर ज्यादा नेट-वर्थ वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करता है, जबकि पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट उन निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं जो लागत पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
पीएमएस निवेशकों को पेशेवर तरीके से प्रबंध किए जाने वाला निवेश पोर्टफोलियो देता है और यह म्यूचुअल फंड जैसे मास-मार्केट इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट से अलग है।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे निवेश बाजार में प्रतिस्पर्धा और विकल्प बढ़ रहे हैं, पीएमएस इंडस्ट्री को अपनी खास वैल्यू के बारे में बताना होगा और निवेशकों का भरोसा जीतना होगा।
--आईएएनएस
एबीएस
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