बदल गया है Jammu-Kashmir, अब आतंकी कुछ समय भाग तो सकते हैं मगर सुरक्षाबलों की गोली से बच नहीं सकते, मूसा के मारे जाने से देश में खुशी की लहर
बदले हुए जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी अब कुछ समय के लिए भाग तो सकते हैं लेकिन बच नहीं सकते। पाकिस्तान की विशेष सेवा समूह में पैरा कमांडो रह चुके आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के साथ भी ऐसा ही हुआ। पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या के खूनी खेल में शामिल मूसा लंबे समय तक सुरक्षा बलों से बचता रहा, लेकिन आखिरकार बडगाम में उसका हिसाब कर दिया गया और वह सुरक्षा बलों की गोली का शिकार होकर ढेर हो गया। मूसा का खात्मा पहलगाम के पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है और यह देशवासियों के उस भरोसे को और मजबूत करता है कि भारत की धरती पर किसी भी नागरिक का खून बहाने वाले आतंकियों को न तो भुलाया जाएगा और न ही बख्शा जाएगा, वे जहां भी छिपेंगे, सुरक्षा बल उन्हें खोज निकालेंगे और उनके आतंक का अंत तय है।
हम आपको बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को बडगाम के यूसमर्ग इलाके में मार गिराया गया है। सुरक्षा बलों ने उसके शव के साथ युद्ध जैसे सामान भी बरामद किए हैं। यह कार्रवाई ऑपरेशन कोराग के तहत की गई। विशेष खुफिया सूचना के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। सुरक्षा बलों ने जब आतंकियों को चुनौती दी तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ भड़क उठी और जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा को मार गिराया गया। अभियान के बाद भी आसपास के इलाके में तलाशी जारी रखी गई, ताकि किसी अन्य आतंकी या हथियारों के ठिकाने की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।
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श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि पालमैदान के सामान्य इलाके में बुधवार सुबह तलाशी के दौरान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध संबंधी सामग्री भी मिली। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मूसा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में वांछित था और पीर पंजाल के दोनों ओर हुए हमलों से उसका संबंध बताया गया था।
हम आपको बता दें कि 2025 के पहलगाम हमले में 26 लोगों की हत्या के बाद हाशिम मूसा सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। उसकी गिरफ्तारी के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इस मामले में पाकिस्तान के नागरिक आदिल हुसैन ठोकर और अली भाई के नाम भी सामने आए थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हाशिम मूसा पाकिस्तान की विशेष सेवा समूह में पैरा-कमांडो रह चुका था।
इस पूरे मामले में एनआईए की जांच ने भी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ढांचे की भूमिका को रेखांकित किया था। दिसंबर 2025 में दाखिल 1,597 पन्नों के आरोपपत्र में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके नाम से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट को हमले की साजिश, तैयारी और क्रियान्वयन से जोड़ा गया था। पाकिस्तानी आतंकवादी संचालक साजिद जट्ट को भी आरोपी बनाया गया था। देखा जाये तो हाशिम मूसा का खात्मा आतंकवाद के नेटवर्क के लिए एक और कठोर संदेश है। जो लोग कश्मीर की जमीन पर बंदूक लेकर निर्दोषों को निशाना बनाने आएंगे, उनके लिए छिपने की जगह लगातार छोटी होती जा रही है। पहाड़, जंगल और सीमा पार का प्रशिक्षण, इनमें से कुछ भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचने की गारंटी नहीं है। आतंक के आकाओं को यह समझ लेना चाहिए कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों तक सुरक्षा एजेंसियां पहुंचेंगी और उनके नेटवर्क को कानून के दायरे में जवाब दिया जाएगा।
526 किलो Drugs ज़ब्त होने पर बोले Amit Shah, गुजरात ATS और Coast Guard की तारीफ की
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अरब सागर में एक ईरानी नाव से 526 किलोग्राम हेरोइन और मेथामफेटामाइन ज़ब्त किए जाने की तारीफ़ की और कहा कि केंद्र सरकार देश के युवाओं को ड्रग्स से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। शाह ने बताया कि यह नशीला पदार्थ गुजरात एंटी-टेररिज़्म स्क्वाड (ATS), इंडियन कोस्ट गार्ड और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन में ज़ब्त किया गया। नाव पर सवार पांच पाकिस्तानी नागरिकों को भी गिरफ़्तार किया गया। शाह ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "मोदी सरकार अपने युवाओं को ड्रग्स की बुराई से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। गुजरात ATS, इंडियन कोस्ट गार्ड और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन में, भारत के EEZ में - लक्षद्वीप से 160 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम और मुंबई से 490 नॉटिकल मील दक्षिण-पश्चिम में - एक ईरानी नाव से 526 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और हेरोइन ज़ब्त की गई है। उन्होंने बताया कि पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और ड्रग्स की तस्करी के इस संदिग्ध मामले में शामिल बड़े नेटवर्क और इसे लेने वालों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है। शाह ने इसमें शामिल एजेंसियों के बीच तालमेल पर भी ज़ोर दिया और कहा, "पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया है और बड़े नेटवर्क तथा इसे लेने वालों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है। एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल और सहयोग का उदाहरण पेश करते हुए, 16 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में एक ईरानी नाव भी ज़ब्त की गई।
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अंतरराष्ट्रीय मार्केट में है 3000 करोड़ के करीब और अगर हम बात करें इस ऑपरेशन की बात करें तो काफी देर से एरियल सर्विलेंस रखा गया था। ह्यूमन इंटेलिजेंस प काम किया जा रहा था। जैसे ही उन्हें बोट नजर आती है ततक्षक और एटीएस जो गुजरात है उनकी टीम ने वहां पर उस बोट को रोक लिया और उसके बाद उन्होंने इन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पांच लोगों की गिरफ्तारी से ये पता चल पाएगा कि कौन सा कौन लोग हैं जो इसके साथ हैं जो ड्रग्स सिंडिकेट के पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे हैं। क्योंकि लगातार पाकिस्तान की कोशिश यही है कि यहां पर ड्रग्स बेचे जाए। अगर यह समुंदर के रास्ते से कभी बेचने की कोशिश करते हैं, कभी अंतरराष्ट्रीय सीमा से और कभी लाइन ऑफ़ कंट्रोल से भेजने की कोशिश करते हैं। क्योंकि उन्हें मालूम है कि यह ड्रग्स को बेचने के बाद जो भी पैसा इकट्ठा होता है वो आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हथियार खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और ये बहुत बड़ी कामयाबी है क्योंकि हमने देखा है कि अरब महासागर से कई बार उन्होंने ड्रग्स और हथियार भेजने की कोशिश की है पाकिस्तान ने और एक बार फिर से उनकी कोशिश को पूरी तरह से हमारे जो अलर्ट है जो कोस्टल कोस्ट गार्ड्स उन्होंने पूरी तरह से उसे नाकाम कर दिया।
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समुद्र में चलाए गए इस ऑपरेशन में लगभग 526 किलोग्राम उच्च-गुणवत्ता वाले नशीले पदार्थ (हेरोइन और मेथामफेटामाइन) ज़ब्त किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। साथ ही, नाव चला रहे पांच पाकिस्तानी नागरिकों को भी तुरंत पकड़ लिया गया। पकड़ी गई नाव, उसके चालक दल और ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों को हथियारबंद सुरक्षा के साथ मुंबई लाया गया है, ताकि संयुक्त पूछताछ और कई एजेंसियों द्वारा कानूनी कार्यवाही की जा सके। ऑपरेशन की यह सफलता भारतीय तटरक्षक बल के मज़बूत समुद्री दबदबे, निगरानी के पुख्ता तंत्र और भारत के समुद्री इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधियों के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' (सख्त रवैये) की पक्की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दुश्मन विदेशी गिरोहों की आर्थिक कमर तोड़कर और ज़हरीले सिंथेटिक नशीले पदार्थों को मुख्य भूमि के तटों तक पहुँचने से पहले ही रोककर, यह मिशन केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के राष्ट्रीय विज़न को और मज़बूत बनाता है। भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने, युवाओं को नशे की लत से बचाने और समुद्री क्षेत्र में पूरी सुरक्षा बनाए रखने के लिए हमेशा तैयार है।
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