High BP Causes: 30 की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डॉक्टर से जानिए क्यों युवाओं में बढ़ रहा है खतरा
High BP Causes: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को पहले सामान्य माना जाता था. इस प्रॉब्लम से आमतौर पर माता-पिता पीड़ित हुआ करते थे. मगर अब ऐसा नहीं है. देशभर के डॉक्टरों ने देखा हैं कि 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में भी ब्लड प्रेशर का स्तर चिंता बढ़ाने वाला हो रहा है. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग दिखने में बिल्कुल स्वस्थ होते हैं. इसमें न कोई लक्षण दिखते हैं और न कोई परेशानी होती है.
क्यों युवाओं में बढ़ रही है बीपी की समस्या?
डॉक्टरों के मुताबिक, high bp की सबसे बड़ी वजह हमारी खराब जीवनशैली है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, बाहर का नमकीन और प्रोसेस्ड खाना, काम का प्रेशर, मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल करना, तनाव और नींद की कमी. ये सभी चीजें मिलकर ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं.
कई बार जो लोग फिट दिखते हैं, वे अंदर से उतने स्वस्थ नहीं होते हैं. हफ्ते में कई दिन वर्कआउट करने के बावजूद, अगर आप पैकेट वाला खाना खाते है और सिर्फ 5 घंटे की नींद लेते हैं तो इसका खतरा बढ़ जाता है. बहुत ज्यादा कॉफी पीने से भी समस्या बढ़ सकती है.
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उम्र का BP से संबंध नहीं!
आकाश हेल्थकेयर के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा बताते हैं कि ब्लड प्रेशर का सीधा संबंध उम्र से नहीं होता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप रोज अपने शरीर पर कितना दबाव डाल रहे हैं. मगर चिंता की बात यह है कि इस समस्या पर अभी भी लोगों का पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अनुमान के मुताबिक, भारत में हर 10 में से करीब 3 लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं, लेकिन इसकी जानकारी और जागरूकता बहुत कम है.
BP का ख्याल रखना क्यों जरूरी?
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर की वजह से भारत में दिल की बीमारियों और स्ट्रोक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अन्य देशों की तुलना में भारतीयों में कम उम्र में ही हृदय रोग की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में 20 या 30 की उम्र में बीपी को नजरअंदाज करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है. यह आगे चलकर गंभीर समस्याओं का बुलावा हो सकता है.
हाई बीपी से होने वाली दिक्कतें
अगर 50 की उम्र में भी हाई बीपी को अनदेखा किया जाए, तो इससे हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, ब्रेन स्ट्रोक, डिमेंशिया, याददाश्त कमजोर होना, किडनी फेलियर, कमजोर आंखों की समस्या और रक्त नलिकाओं को गंभीर नुकसान हो सकता है.
बीपी नियंत्रित न होने पर इंसान समय से पहले बुढ़ापा और लंबी बीमारी का शिकार हो सकता है. डॉक्टर प्रभात बताते हैं कि नियमित जांच और समय पर इलाज से इन खतरों को टाला जा सकता है.
बीपी क्यों खतरनाक है?
दरअसल, हाई ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर शरीर इसकी आदत बना लेता है. इसलिए, लंबे समय तक कोई लक्षण नजर नहीं आते. कई बार व्यक्ति का बीपी 200 तक पहुंच जाता है, फिर भी वह खुद को बिल्कुल ठीक महसूस करता है. लेकिन इससे अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाता है, जिसका कारण बीपी निकलता है.
नियमित जांच करवाना जरूरी
डॉक्टर कहते हैं कि 30 साल से ऊपर के सभी लोगों को साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर जरूर चेक करवाना चाहिए. अगर मोटापा है या परिवार में किसी को बीपी की समस्या है, तो खतरा और बढ़ जाता है. क्योंकि 30 की उम्र में भी यह बिना लक्षण के हो सकता है. इसलिए, नियमित जांच और डॉक्टर से सलाह बेहद जरूरी है.
बीपी के कुछ लक्षण
- तेज सिरदर्द.
- चक्कर आना.
- धुंधला दिखाई देना.
- नाक से खून आना.
- थकान और बेचैनी महसूस करना.
- कान में सांय-सांय जैसी आवाज आना.
बीपी नियंत्रित करने के उपाय
- अपनी डाइट में बदलाव करें.
- नियमित रूप से व्यायाम करें.
- वजन को कम करें.
- स्ट्रेस लेने से बचें.
- नमक की मात्रा को नियंत्रित करें.
- नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं.
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UGC Rules: ‘जातिगत भेदभाव कर रही है यूजीसी’, सुप्रीम कोर्ट में नए नियमों को दी गई चुनौती
UGC Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन के नए नोटिफिकेशन इन दिनों सुर्खियों में हैं. क्योंकि उसे लेकर विवाद शुरू हो गया है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सर्वोच्च न्यायालय में UGC की नई गाइडलाइंस को चुनौती दी गई है और जातिगत आधारित भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम समावेशी विकास की परिभाषा से बिल्कुल अलग है.
याचिका में UGC पर लगाए गंभीर आरोप
UGC के इन नियमों के खिलाफ विनीत जिंदल नाम के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी आवाज उठाई है. विनीत का आरोप है कि UGC जाति आधारित भेदभाव कर रही है. UGC ने अपनी परिभाषा में कहा है कि जाति आधारित भेदभाव सिर्फ एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों के साथ ही होता है. UGC ने जनरल श्रेणी के छात्रों को पूर्ण रूप से नजरअंदाज कर दिया है. खास बात है कि जनरल वर्ग के अभ्यार्थियों को भी जाति के आधार पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
याचिका में क्या मांग की गई
विनीत जिंदल ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वे केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम आदेश दिए जाएं कि सभी जातियों के अभ्यार्थियों के लिए समान अवसर के केंद्र हों और एक समान हेल्पलाइन नंबर हो और लोकपाल तंत्र का गठन किया जाए. जिंदल का कहना है कि जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.
अब जानें यूजीसी के नए नियमों के बारे में…
यूजीसी ने हाल ही में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026′ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को नोटिफाई किया है. नए नियम के तहत, 4 मुख्य आदेश दिए गए हैं…
- हर यूनिवर्सिटी, कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का गठन किया जाए.
- सभी संस्थानों में 24x7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली स्थापित की जाए.
- SC-ST वर्ग के अभ्यार्थियों को संस्थान में सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाए.
- नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थाओं की मान्यता रद्द होगी या फिर उनके फंड पर रोक लगा दी जाएगी।
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