Drishyam The Conclusion Cast Fees: कौन है सबसे महंगा स्टार? अजय देवगन से तब्बू तक जानें सभी कलाकारों की फीस
Drishyam The Conclusion Cast Fees: अजय देवगन (Ajay Devgn) की क्राइम थ्रिलर 'दृश्यम द कन्क्लूजन' को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट बना हुआ है. अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के किरदार में नजर आने वाले हैं और इस बार कहानी के साथ फिल्म की स्टारकास्ट की फीस भी चर्चा में है. फिल्म में अजय देवगन के अलावा तब्बू, श्रिया सरन और दूसरे अहम कलाकार नजर आएंगे. ऐसे में हर किसी के मन में सवाल है कि आखिर इन सितारों ने इस फिल्म के लिए कितनी फीस चार्ज की है? तो चलिए जानते हैं.
अजय देवगन की फीस
‘दृश्यम 3’ में एक बार फिर अजय देवगन (Ajay Devgn) विजय सालगांवकर के रोल में नजर आएंगे. इस फिल्म को लेकर उनकी फीस की भी काफी चर्चा हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजय देवगन को फिल्म के लिए करीब 18 से 22 करोड़ रुपये फीस दी गई है. ऐसे में फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट में अजय सबसे ज्यादा फीस लेने वाले कलाकार हैं. हालांकि मेकर्स ने उनकी फीस की आधिकारिक जानकारी शेयर नहीं की है.
तब्बू ने कितनी फीस ली?
अजय देवगन के बाद दूसरे नंबर पर तब्बू (Tabu) का नाम है. एक्ट्रेस एक बार फिर मीरा देशमुख के किरदार में वापसी कर रही हैं. मीरा वही पुलिस ऑफिसर हैं, जिनकी विजय सालगांवकर और उसके परिवार के साथ टक्कर इस फ्रेंचाइजी की कहानी का अहम हिस्सा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तब्बू को करीब 2.5 से 3.5 करोड़ रुपये फीस दी गई है. वहीं, फिल्म में एक बार फिर उनके और अजय देवगन के किरदारों के बीच टकराव देखने को मिलेगा.
श्रिया सरन की फीस
श्रिया सरन (Shriya Saren) ने ‘दृश्यम 3’ में विजय की पत्नी नंदिनी सालगांवकर के किरदार में नजर आएंगी. पिछले दोनों पार्ट्स में नंदिनी परिवार की कहानी का अहम हिस्सा रही हैं. वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रिया सरन ने इस फिल्म के लिए करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये फीस ली है. हालांकि उनकी फीस को लेकर भी मेकर्स की तरफ से कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है.
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इशिता दत्ता की फीस
इशिता दत्ता (Ishita Dutta) फिल्म में विजय और नंदिनी की बड़ी बेटी अंजू का किरदार निभाती हैं. अंजू की वजह से ही पिछले पार्ट्स में परिवार की कहानी कई बार मुश्किल में फंसी थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, इशिता दत्ता ने ‘दृश्यम 3’ के लिए करीब 50 से 80 लाख रुपये फीस चार्ज की है. हालांकि ये आंकड़ा भी मीडिया रिपोर्ट्स पर ही बेस्ड है.
रजत कपूर की फीस
फिल्म में रजत कपूर (Rajat Kapoor) की भी वापसी होने वाली हैं. एक्टर मीरा देशमुख के पति महेश देशमुख के रोल में नजर आएंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रजत कपूर को फिल्म के लिए करीब 40 से 70 लाख रुपये फीस दी गई है. उनकी फीस को लेकर भी प्रोडक्शन टीम की ओर से कोई ऑफिशियल खबर सामने नहीं आई.
जयदीप अहलावत की फीस
वहीं, इस बार ‘दृश्यम 3’ में जयदीप अहलावत की एंट्री हो गई है. एक्टर पुलिस ऑफिर राजीव सिंह तोमर का किरदार निभा रहे हैं. जो अब विजय का पर्दाफाश करने के लिए लड़ेगा. हालांकि उनकी फीस को लेकर अभी कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है.
प्रकाश राज की फीस
जयदीप अहलावत की तरह ‘दृश्यम 3’ की नई स्टारकास्ट में प्रकाश राज (Prakash Raj) का नाम भी शामिल है. वो फिल्म में इंद्रजीत शेट्टी के किरदार में नजर आएंगे. हालांकि प्रकाश राज की फीस को लेकर भी फिलहाल कोई पक्की रिपोर्ट सामने नहीं आई है.
किसकी फीस सबसे ज्यादा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकस अजय देवगन की फीस सबसे ज्यादा बताई जा रही है, जबकि तब्बू और श्रिया सरन की फीस उनके बाद आती है. वहीं इशिता दत्ता और रजत कपूर की फीस लाखों में बताई गई है. जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की फीस का आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है. बता दें कि सभी आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर बेस्ड हैं और मेकर्स ने कलाकारों की फीस को आधिकारिक तौर पर कंफर्म नहीं किया है.
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विवाद के बाद झुका चुनाव आयोग! फॉर्म-6 से हटाया वो कॉलम, जिसने मचाया था बवाल...
Election Commission Form 6: नए मतदाताओं के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 को लेकर छिड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आखिरकार बड़ा फैसला ले लिया है. आयोग ने फॉर्म-6 के साथ जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र, यानी Annexure-D को उन राज्यों के लिए हटा दिया है जहां विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
Form 6 को लेकर यह विवाद शुरू कहां से हुआ था?
चुनाव आयोग शुरू से यह दावा करता रहा है कि उसने कानूनी रूप से तय फॉर्म-6 के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया है. लेकिन विवाद तब खड़ा हुआ जब SIR प्रक्रिया के दौरान आयोग ने इस फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र, यानी Annexure-D को अनिवार्य रूप से जोड़ दिया.
इन राज्यों में फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा-पत्र पूरी तरह हटाया
आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र पूरी तरह हटा दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. यानी इन राज्यों में अब पुराने और सरल स्वरूप वाला फॉर्म-6 ही लागू होगा चाहे वह ऑनलाइन भरा जाए या ऑफलाइन।
नए और पुराने फॉर्म-6 में आखिर फर्क क्या है?
SIR के दौरान लागू फॉर्म-6 में हर नए मतदाता को अपने माता-पिता, दादा-दादी या किसी वरिष्ठ रिश्तेदार से जुड़ा रिकॉर्ड देना पड़ता था. इसमें यह भी बताना जरूरी था कि साल 2000 के आसपास हुए पिछले SIR के दौरान आवेदक, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं. इसके अलावा पुराने विधानसभा क्षेत्र का नंबर, मतदान केंद्र यानी बूथ नंबर और पुराना क्रम संख्या जैसी जानकारी भी देनी पड़ती थी. अब जिन राज्यों में यह बदलाव लागू हुआ है, वहां इन सब की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि हर मतदाता के रिश्तों की पुष्टि पहले ही SIR प्रक्रिया के दौरान हो चुकी है और यह जानकारी डिजिटल रूप में पहले से मौजूद है.
STORY | EC withdraws SIR declaration from Form 6 in states where exercise is over
— Press Trust of India (@PTI_News) September 30, 2026
The Election Commission has withdrawn the additional SIR-related declaration from the online voter enrolment Form 6 in states where the Special Intensive Revision of electoral rolls has been… pic.twitter.com/FiFk75mX36
फॉर्म-6 में कौन सी जानकारी तकनीकी तौर पर स्वैच्छिक थी या अनिवार्य?
आयोग की तरफ से इसे तकनीकी रूप से स्वैच्छिक बताया गया था, लेकिन असल में ECINET पोर्टल पर यह जानकारी भरे बिना आवेदक अपना फॉर्म आगे सबमिट ही नहीं कर पा रहे थे. यानी कागज पर स्वैच्छिक दिखने वाली यह शर्त व्यवहार में पूरी तरह अनिवार्य बन चुकी थी.
फॉर्म-6 में इस बदलाव से किन लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी?
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा पहली बार वोट बनवाने वाले युवाओं को मिलेगा। खासतौर पर वे युवा, जो साल 2000 के बाद पैदा हुए हैं, उन्हें पुरानी पारिवारिक मैपिंग और दस्तावेजीकरण से जुड़ी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. इसके अलावा जिन मतदाताओं के नाम पहले किसी वजह से सूची से कट चुके थे, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने में भी कानूनी पेचीदगियां झेलनी पड़ रही थीं. अब इन दोनों वर्गों के लिए प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.
फॉर्म-6 पर चुनाव आयोग के भीतर इस बदलाव को लेकर क्या मतभेद रहे?
आयोग के भीतर ही दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र पर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है, वह भी संसद की मंजूरी के साथ ऐसा किया जा सकता है. उनका कहना था कि चुनाव आयोग खुद से मनमाने ढंग से इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य नहीं बना सकता है.
#WATCH | Delhi: Former Chief Election Commissioner SY Quraishi says, "The press note the Election Commission issued actually works against them. In it, they have admitted to various errors that were occurring. They state that, moving forward, they will hold agenda… pic.twitter.com/fMBFp1MBTc
— ANI (@ANI) September 28, 2026
आयोग ने आखिरकार यह कदम क्यों उठाया?
आंतरिक मतभेद और बढ़ते सार्वजनिक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने आखिरकार सहमति बनाते हुए इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को गैर-SIR राज्यों से हटाने का फैसला किया है. अब यह सिर्फ उन्हीं राज्यों में लागू रहेगा जहां फिलहाल SIR की प्रक्रिया अभी भी चल रही है.
तो क्या यह घोषणा-पत्र पूरी तरह खत्म कर दिया गया है?
यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसका दायरा सीमित किया गया है. जिन राज्यों में अभी SIR चल रहा है वहां आवेदकों को अब भी यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र भरना होगा. यह राहत सिर्फ उन राज्यों के लिए है जहां यह प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है.
#WATCH | Delhi: On the Election Commission of India's clarification regarding Form 6 and the ECINet portal, former Law Minister Ashwani Kumar says, "The core issue is about memory and the purity of the electoral process. The purity of the electoral process secures the sanctity of… pic.twitter.com/QM3jAJvVXJ
— ANI (@ANI) September 25, 2026
आयोग ने यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा ही क्यों था?
चुनाव आयोग के मुताबिक इसका मकसद घुसपैठ को रोकना और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना था. आयोग का तर्क था कि इससे फर्जी और अवैध मतदाताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी.
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