Dalai Lama से मुलाकात के बाद बोले Brian Mast, तिब्बत की आजादी के साथ मजबूती से खड़ा है US
धर्मशाला में अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से मुलाकात की। इस दौरान हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने कहा कि तिब्बत के लोग आज़ादी चाहते हैं और तिब्बती लोगों के लिए प्रतिनिधिमंडल के समर्थन को फिर से दोहराया। दलाई लामा से मुलाक़ात के बाद मीडिया से बात करते हुए मास्ट ने कहा कि बैठक के दौरान चीन और तिब्बती लोगों की आज़ादी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मास्ट ने कहा निश्चित रूप से चीन प्रमुख मुद्दों में से एक था, साथ ही तिब्बत के लोगों की आज़ादी और दुनिया भर में आज़ादी के उनके प्रतिनिधित्व पर भी बात हुई। ठीक वैसे ही जैसे हम मानते हैं कि अमेरिका दुनिया भर में आज़ादी का प्रतिनिधित्व करता है। हमने कई विषयों पर चर्चा की। मास्ट ने कहा कि चीन की ओर से सीमा-पार दमन का खतरा बहुत व्यापक है और आरोप लगाया कि बीजिंग ऐसी गतिविधियों का विस्तार दूसरे देशों तक भी कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि सीमा-पार दमन के मामले में चीन से खतरा बहुत बड़ा है। चीन जहाँ भी पहुँच सकता है, वहाँ पहुँचेगा। उन्होंने यह साबित कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ादी और लोकतंत्र को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बुनियादी मतभेद हैं और ये मतभेद तिब्बती लोगों की माँगों से भी जुड़े हैं। मास्ट ने कहा, "हम अपने सभी लोगों के लिए आज़ादी और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। हमारा मानना है कि लोग कुछ ऐसे अधिकारों के साथ पैदा होते हैं जिन्हें उनसे छीना नहीं जा सकता; सरकार का काम इन अधिकारों को देना नहीं, बल्कि इनकी रक्षा करना है। चीन जिस चीज़ का प्रतिनिधित्व करता है, अमेरिका जिस चीज़ का प्रतिनिधित्व करता है और तिब्बत के लोग जो चाहते हैं—इन सबके बीच ये बुनियादी अंतर हैं। मास्ट ने यह भी कहा कि दलाई लामा का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाक़ात ज़रूरी है। मास्ट ने कहा परम पावन (दलाई लामा) का मानना था कि राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाक़ात ज़रूरी है। वे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली देशों के नेता हैं। इसलिए हाँ, यह बहुत ज़रूरी है और ऐसा होना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसी मुलाक़ात से तिब्बतियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि इससे इस बात पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि चीन को अपने लोगों, तिब्बती लोगों या उइगर लोगों का दमन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे दुनिया भर में आज़ादी को अपनाना चाहिए और उसका समर्थन करना चाहिए।" ANI से बात करते हुए, अमेरिकी कांग्रेसवुमन हेली स्टीवंस ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल तिब्बती लोगों की मुश्किलों को उजागर करना और उनकी आज़ादी का समर्थन करना चाहता था। स्टीवंस ने कहा मैं चेयरमैन ब्रायन मास्ट के साथ तिब्बती लोगों की मुश्किलों को समझने के लिए धर्मशाला की इस ऐतिहासिक और अहम यात्रा में शामिल हुई। हम चाहते हैं कि तिब्बत आज़ाद रहे। हम तिब्बतियों की कहानी नहीं भूलेंगे। हम परम पावन दलाई लामा की ताकत और शांति व लोकतंत्र के महत्व को भी नहीं भूलेंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समय) को कहा कि ईरान हार मान लेगा और दावा किया कि अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से इतिहास में किसी भी समय की तुलना में ज़्यादा तेल निकाला है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के अधिकारियों के साथ लंच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने और टेक लीडर्स ने एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति प्रशासन के नज़रिए पर चर्चा की और फ्रंटियर कंप्यूटिंग मॉडल की सुरक्षा पर एक संयुक्त प्रतिबद्धता पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कहा कि वे हार मान लेंगे। हमने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से इतिहास में किसी भी समय की तुलना में ज़्यादा तेल निकाला है। यह बयान तब आया जब मंगलवार को ट्रंप और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुखों ने एक जॉइंट, नैतिक रूप से बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में फ्रंटियर कंप्यूटिंग मॉडल की सुरक्षा को नियंत्रित करने के लिए चार स्तरों के कंट्रोल और ऑडिट का एक व्यापक ढांचा लागू करने का वादा किया गया, साथ ही भविष्य में इसे कानून का रूप देने की संभावना भी खुली रखी गई।
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फ्रंटियर जिम्मेदारियों पर संयुक्त प्रतिबद्धता नाम का यह दस्तावेज व्हाइट हाउस समिट के बाद जारी किया गया। इस समिट में प्रशासन ने औपचारिक रूप से सुपर इंटेलिजेंस शब्द का इस्तेमाल किया, जो टेक प्रमुखों के उस सुझाव के बाद आया जिसमें फ्रंटियर AI के विकास की गति धीमी करने या नियंत्रण खोने के जोखिम की बात कही गई थी। ट्रंप ने मंगलवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर भी हस्ताक्षर किए, जिसमें संघीय सरकार को निर्देश दिया गया कि वह एग्जीक्यूटिव ब्रांच के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्दों की जगह सुपर इंटेलिजेंस और SI शब्दों का इस्तेमाल करे। सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत नाम का यह आदेश यह तय करता है कि अमेरिकी सरकार कानून द्वारा अनुमत सीमा तक आधिकारिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या AI शब्दावली को मान्यता नहीं देगी और न ही उसका इस्तेमाल करेगी।
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इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ़ ने मंगलवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और अन्य देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो "कोई भी बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा"। घालीबाफ़ ने मंगलवार को एक सार्वजनिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वहां से जहाजों के गुजरने के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले के बयानों का ज़िक्र किया। अमेरिकी राष्ट्रपति की पिछली टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए घालीबाफ़ ने कहा कि ये पुराने दावों को दोहराना भर है और इनकी असलियत सभी को पता है। उन्होंने कहा भ्रम में जी रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वहां से जहाजों के गुजरने के बारे में जो बातें कही हैं, वे पुराने दावों को दोहराना ही हैं और इन भ्रमपूर्ण बातों की सच्चाई सभी को पता है। इसके बाद घालीबाफ़ ने अमेरिका और अन्य देशों को चेतावनी दी कि ईरान अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इस क्षेत्र की सुरक्षा को तेल की आवाजाही से जोड़ा।
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