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Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले का आखिरी मास्टरमाइंड ढेर, सेना ने लश्कर आतंकी मूसा को मार गिराया

Jammu And Kashmir Police: पहलगाम आतंकी हमले के चार आतंकियों की तस्वीरें सामने आई थीं। सुरक्षाबलों ने इनमें से दो को 'ऑपरेशन महादेव' में मार गिराया था। इसके बाद बडगाम एनकाउंटर में एक और आतंकी मारा गया था। अब आखिरी आतंकी का भी काम तमाम हो गया है।

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INDIA गठबंधन की बैठक से अखिलेश ने इसलिए बनाई दूरी, कांग्रेस से नाराजगी का दिया करारा जवाब

विपक्षी गठबंधन INDIA की बुधवार को दिल्ली में हुई एक अहम बैठक इस बार बगैर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के हुई है. इतना ही नहीं न सिर्फ अखिलेश यादव खुद इस बैठक से नदारद रहे बल्कि उन्होंने पार्टी के किसी बड़े चेहरे को भी वहां नहीं भेजा. उनके इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और अब यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर अखिलेश इस तरह गैरहाजिर रहकर क्या संदेश देना चाहते हैं.

सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने यह कदम कांग्रेस से नाराजगी जताने के लिए जानबूझकर उठाया है. गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस नेता इमरान मसूद और पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के हालिया बयानों से अखिलेश यादव खासे नाखुश हैं. बता दें सपा खेमे में इसे कांग्रेस की तरफ से दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

अखिलेश यादव ने INDIA Alliance की बैठक में न जानें का ये बनाया बहाना!

बता दें 29 सितंबर को सुबह ठीक 11 बजे सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करना था. अखिलेश यादव चाहते तो अपने तीनों प्रस्तावित उम्मीदवारों का नामांकन एक साथ भी करा सकते थे, जिससे उन्हें इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने का पूरा समय मिल जाता. लेकिन उन्होंने जानबूझकर सिर्फ रामगोपाल यादव के अकेले नामांकन का दिन तय किया ताकि पार्टी के इस बड़े चेहरे के पास भी दिल्ली वाली बैठक में जाने का कोई बहाना न बचे.

INDIA Alliance की बैठक में सपा की तरफ से किसे भेजा गया?

अखिलेश यादव ने खुद जाने या रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव और डिंपल यादव जैसे बड़े चेहरों को भेजने के बजाय मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक और रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में भेजा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव भी सोच-समझकर किया गया है ताकि पार्टी की मौजूदगी तो दिखे लेकिन कोई शीर्ष नेता सीधे कांग्रेस के साथ किसी बड़ी प्रतिबद्धता में न बंधे.

INDIA Alliance की बैठक पर सपा ने बैठक में क्या रुख अपनाया?

पार्टी प्रतिनिधियों के जरिए सपा ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की लड़ाई में पूरी तरह साथ है और मौजूदा सरकार की मौजूदा नीतियों पर दबाव बनाए रखने और उसका कार्यकाल राजनीतिक तौर पर चुनौतीपूर्ण बनाने की दिशा में काम जारी रखेगी. हालांकि पार्टी ने इसके साथ ही यह भी साफ संकेत दिया कि गठबंधन में बने रहने का मतलब सीट बंटवारे में कांग्रेस की हर शर्त मान लेना नहीं है.

कांग्रेस और सपा के बीच असली विवाद की जड़ क्या है?

दरअसल, यह पूरा मामला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर है. कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर रही है जबकि सपा का कहना है कि गठबंधन में सीटें जीतने की क्षमता यानी 'विनेबिलिटी' के आधार पर तय होनी चाहिए. हाल ही में अखिलेश यादव ने कांग्रेस से सीधे कहा भी था कि वह अपने उम्मीदवारों के नाम बताए और सपा उसी आधार पर सीटें तय करेगी.

क्या कांग्रेस इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है?

ऊपरी तौर पर कांग्रेस इस विवाद को बहुत तवज्जो नहीं देना चाहती और इसे सामान्य बता रही है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक अंदरखाने दोनों दलों के बीच तनातनी साफ महसूस की जा रही है. अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि उन पर किस तरह का दबाव बनाया जा रहा है और यही वजह है कि उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए बैठक से दूरी जैसा सांकेतिक लेकिन साफ कदम उठाया है.

क्या यह पहली बार है जब सपा और कांग्रेस के बीच खींचतान सामने आई है?

इससे पहले भी सपा नेता आईपी सिंह कांग्रेस की 150 सीटों की मांग को लेकर तंज कस चुके हैं. इसके अलावा सीट शेयरिंग फॉर्मूले, विधान परिषद चुनाव और गठबंधन में क्षेत्रीय दलों की भूमिका को लेकर भी दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार होती रही है.

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इस पूरे घटनाक्रम से 2027 चुनाव को लेकर क्या संकेत मिलते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव यह संदेश देना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सपा गठबंधन की सबसे बड़ी और निर्णायक ताकत है इसलिए सीट बंटवारे में उसकी बात को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. बैठक से दूरी बनाकर उन्होंने बिना कोई सीधा टकराव मोल लिए अपनी नाराजगी और मजबूत सौदेबाजी की स्थिति, दोनों को एक साथ साबित करने की कोशिश की है.

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