श्रीलंका के खिलाफ तीसरे वनडे में इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी अचानक पूरे रंग में नजर आई और कोलंबो की केताराम स्टेडियम की पारंपरिक मुश्किल पिच पर मेहमान टीम ने इतिहास के सबसे भारी स्कोरों में से एक खड़ा कर दिया हैं। जो रूट और हैरी ब्रूक की जोड़ी ने ऐसी पारी खेली, जिसने मुकाबले की दिशा पहले ही तय कर दी।
बता दें कि इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 50 ओवर में 3 विकेट पर 357 रन बनाए हैं। गौरतलब है कि केताराम में अब तक 300 से ज्यादा का लक्ष्य कभी सफलतापूर्वक हासिल नहीं किया गया हैं और यहां सबसे बड़ा रन चेज 292 का रहा। ऐसे में इंग्लैंड का यह स्कोर श्रीलंका के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इंग्लैंड की पारी की रीढ़ बने जो रूट, जिन्होंने 108 गेंदों पर नाबाद 111 रन बनाए है। उनकी पारी खास इसलिए रही क्योंकि उन्होंने हालात को समझते हुए रन गति को संभाले रखा और बड़े शॉट्स की जगह सिंगल-दो रन पर ज़ोर दिया। रूट के 111 रनों में 61 रन सिर्फ दौड़कर आए, जो उनकी क्लास और मैच सेंस को दर्शाता है।
रूट को सबसे मजबूत साथ मिला हैरी ब्रूक का, जिन्होंने सिर्फ 66 गेंदों में नाबाद 136 रन ठोक दिए। ब्रूक की यह पारी पूरी तरह आक्रामक रही, जिसमें 11 चौके और 9 छक्के शामिल रहे। अंतिम ओवरों में उनका प्रहार इतना जबरदस्त था कि आखिरी पांच ओवरों में श्रीलंका को 88 रन देने पड़े। रूट और ब्रूक के बीच 191 रनों की साझेदारी सिर्फ 113 गेंदों में पूरी हुई है।
इससे पहले जैकब बेथेल ने भी अहम योगदान देते हुए 65 रन बनाए और रूट के साथ 126 रनों की साझेदारी कर पारी को संभाला हैं। हालांकि शुरुआत में इंग्लैंड की हालत कुछ खास नहीं थी और टीम ने 11 ओवर में ही दो विकेट गंवा दिए थे, लेकिन उसके बाद बल्लेबाज़ों ने संयम और आक्रामकता का सही संतुलन दिखाया।
श्रीलंका ने इस मुकाबले में स्पिन पर भरोसा जताया था, लेकिन विकेट निकालने में नाकाम रहे हैं। अनुभवी गेंदबाज़ असिथा फर्नांडो, वानिंदु हसरंगा और जेफ्री वांडरसाए महंगे साबित हुए हैं। खासतौर पर डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ों पर दबाव साफ दिखा।
गौरतलब है कि अगर इंग्लैंड इस स्कोर का बचाव करने में सफल रहता है, तो मार्च 2023 के बाद यह उनकी पहली विदेशी वनडे सीरीज़ जीत होगी। वहीं श्रीलंका अगर लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाता है, तो 2021 के बाद पहली बार उसे घरेलू वनडे सीरीज़ गंवानी पड़ेगी हैं। मैच अब पूरी तरह श्रीलंका की बल्लेबाज़ी पर निर्भर करता है।
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टी20 वर्ल्ड कप को लेकर बने हालात का असर अब मैदान से बाहर भी साफ दिखाई दे रहा हैं। बांग्लादेश के टूर्नामेंट से हटने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने भारतीय मेजबानी वाले इस विश्व कप के लिए बांग्लादेशी पत्रकारों की मीडिया एक्रिडिटेशन प्रक्रिया पर दोबारा विचार शुरू कर दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, आईसीसी ने आवेदन प्रक्रिया में बदलाव की पहल की हैं, जबकि कई बांग्लादेशी पत्रकारों का दावा हैं कि उनके आवेदन पहले ही खारिज कर दिए गए हैं।
बता दें कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भारत में सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए टीम को टूर्नामेंट में न भेजने का फैसला लिया था। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया हैं और टूर्नामेंट की शुरुआत 7 फरवरी से होनी तय हैं। इसी फैसले के बाद मीडिया एक्रिडिटेशन से जुड़े मामलों में भी असमंजस की स्थिति बनी है।
आईसीसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पत्रकारों की संख्या और मैचों के कार्यक्रम में बदलाव के चलते पूरी प्रक्रिया को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा हैं। बताया गया हैं कि बांग्लादेश से करीब 80 से 90 पत्रकारों ने एक्रिडिटेशन के लिए आवेदन किया था, जबकि किसी भी देश के लिए निर्धारित कोटा 40 से अधिक नहीं हो सकता है। गौरतलब है कि आईसीसी आमतौर पर मेजबान बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर मीडिया आवेदनों पर अंतिम फैसला लेता है।
ढाका में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के मीडिया मैनेजर अमजद हुसैन ने कहा हैं कि इस पूरे मामले को आईसीसी के सामने उठाया गया हैं। उनके मुताबिक, फैसला हाल ही में लिया गया और बोर्ड ने इसके पीछे के कारणों को जानने के लिए स्पष्टीकरण मांगा हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया हैं कि यह एक आंतरिक और गोपनीय मामला हैं।
इस बीच, यह भी समझा जा रहा हैं कि अब बांग्लादेशी पत्रकारों को नए सिरे से एक्रिडिटेशन के लिए आवेदन करना पड़ सकता हैं और हर आवेदन पर अलग-अलग स्तर पर विचार होगा हैं। एक वरिष्ठ बांग्लादेशी पत्रकार ने बताया हैं कि उन्होंने 8 से 9 आईसीसी वर्ल्ड कप कवर किए हैं, लेकिन यह पहली बार हैं जब उनका आवेदन खारिज हुआ हैं और फिलहाल वे बीसीबी की ओर से स्पष्ट निर्देश का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि आईसीसी के आकलन में भारतीय हालात को लेकर कोई ठोस सुरक्षा खतरा नहीं पाया गया था, इसके बावजूद बांग्लादेश बोर्ड ने टीम को भारत न भेजने का निर्णय लिया हैं। अब इसका असर मीडिया कवरेज पर भी पड़ता दिख रहा हैं, जिससे आने वाले दिनों में और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद हैं।
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