Congress ने CEC को हटाने और PM Narendra Modi के इस्तीफे की उठाई मांग
कांग्रेस ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से ‘‘अंपायर’’ बनकर चुनावों में ‘‘मैच फिक्सिंग’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि कुमार को पद से हटाए जाने के साथ ही प्रधानमंत्री को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। मुख्य विपक्षी दल ने अपनी शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह फैसला भी किया कि ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन चलाया जाएगा और इसमें दूसरे विपक्षी दलों का भी सहयोग लिया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पार्टी संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, कई अन्य वरिष्ठ नेता और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।
खरगे ने कार्य समिति की बैठक में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग उठाई। बैठक में पारित प्रस्ताव में भी कहा गया कि प्रधानमंत्री को ‘‘नैतिकता के आधार पर’’ त्यागपत्र दे देना चाहिए। खरगे ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और निर्वाचन आयुक्तों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में संबंधित सीईसी को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के दबाव के कारण ऐसा हुआ है और ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि देश में चुनावों में ईवीएम और मतदाता सूची से जुड़ी ‘‘मैच फिक्सिंग’’ हो रही है, जिसके खिलाफ पार्टी को संसद से लेकर सड़क तक विरोध के साथ-साथ प्रतिरोध के रास्ते से पीछे नहीं हटना चाहिए।
कार्य समिति के प्रस्ताव में कहा गया कि पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है, जिन्होंने कांग्रेस के अनुसार अपने ‘‘सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार’’ खो दिए हैं। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया, ‘‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा खुलेआम ‘वोट चोरी’ को अंजाम दिया गया है।’’ कांग्रेस ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ भी पर्याप्त नहीं होगा। कार्य समिति ने कहा कि भाजपा और उसके द्वारा चुने गए अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि जनता के मताधिकार से कथित छेड़छाड़ का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ा जाएगा।
पार्टी ने कहा कि वह संसद, अदालतों और सड़कों पर तब तक अपना विरोध और प्रतिरोध करेगी जब तक दोषियों को दंडित नहीं किया जाता, प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता और निर्वाचन आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में पुनर्स्थापित नहीं किया जाता। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अतीत में हुई एक चयन समिति की बैठक को याद करते हुए राहुल गांधी ने कार्यसमिति के सदस्यों को बताया, प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा था कि जब हम (सत्ता से) जाएंगे, तब आप आएंगे। इस बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे खबरें कहां आती हैं।
वहीं, बैठक के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार सिर्फ एक टूल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के बिना वह कुछ नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी बनती है, इसलिए हम प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं।’’ पार्टी महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, कांग्रेस के कारण ही ‘‘वोट चोरी’’ जैसे खुलासे सामने आ रहे हैं और राहुल गांधी पिछले दो साल से इस मुद्दे को उठा रहे हैं।
रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि ‘‘वोट चोरी’’ से संबंधित सरकार द्वारा 2023 में पारित कानून और बनाए गए अधिनियम गैरकानूनी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की राजनीति सिर्फ विरोध की नहीं, बल्कि प्रतिरोध की भी है और पार्टी संसद के भीतर विरोध तथा सड़कों पर प्रतिरोध जारी रखेगी।’’ प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा गया कि उन्होंने “अपने सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार खो दिए हैं।” कार्य समिति ने मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर गंभीर चिंता जताते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।
उसने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों से हटाए गए 13.30 लाख लाख नाम तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। कांग्रेस ने कहा कि देश में ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ उसका अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग में बदल गया है और वह इन मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन करेगी।
निर्वाचन आयोग पर कार्टून बनाने पर Satish Acharya का Instagram अकाउंट भारत में बंद
कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के ‘इंस्टाग्राम’ अकाउंट पर भारत में पाबंदी लगाये जाने के बाद, केरल कार्टून अकादमी ने उनके प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए इस ‘‘प्रतिबंध’’ को हटाने की मांग की है। आचार्य के कार्टून में मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए जाने के बाद यह पाबंदी लगाई गई। आचार्य के इंस्टाग्राम पेज पर प्रदर्शित एक संदेश में कहा गया, ‘‘भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के तहत कानूनी जरूरतों को देखते हुए हमने इस अकाउंट तक पहुंच को कुछ समय के लिए रोक दिया है।’’ राजनीतिक कार्टूनिस्ट मंजुल ने भी कहा है कि निर्वाचन आयोग पर बने उनके एक कार्टून पर भारत में कथित तौर पर रोक लगा दी गई है।
इस मामले ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद तूल पकड़ लिया है, जिसमें दावा किया गया था कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में तीन में से दो आयुक्त -- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी -- ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में संधू और जोशी ने आयोग द्वारा लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई। उनका कहना है कि ये फैसले उनकी जानकारी या अनुशंसा के बिना लिए गए थे।
वहीं, आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस घटनाक्रम के बारे में ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए आचार्य ने कहा कि 2023 में प्रकाशित उनके कुछ कार्टून भी ‘ब्लॉक’ किए जा रहे हैं। उन्होंने पोस्ट किया था, ‘‘डर के आगे जीत नहीं है, साहेब!
2023 में छपे कुछ कार्टून भी अब ब्लॉक किए जा रहे हैं!’’ इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने इस मामले पर अब तक कोई अलग बयान जारी नहीं किया है। इस पाबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए, आचार्य ने ‘एक्स’ पर नरेन्द्र मोदी का दिसंबर 2018 का एक बयान भी साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने दिवंगत कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के काम की तारीफ की थी और उनके कॉमन मैन कार्टून के डिजिटाइजेशन पर उनके परिवार को बधाई दी थी। आचार्य द्वारा साझा की गई खबर का शीर्षक था, ‘‘पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा, कार्टून में चीजों को दुरूस्त करने की क्षमता होती है और कार्टूनिस्ट ईश्वर के करीब होते हैं।’’ आचार्य ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा, ‘‘वाह मोदीजी वाह!
ब्लॉक सरकार।’’ कार्टूनिस्ट मंजुल ने भी रविवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसी के नोटिस के बाद, इंस्टाग्राम ने निर्वाचन आयोग के बारे में उनके एक कार्टून को देखने पर रोक लगा दी है। मंजुल ने ‘एक्स’ पर वह कार्टून साझा करते हुए कहा, ‘‘यह कार्टून भारत के बाहर अभी भी दिख रहा है... लेकिन भारतीयों के लिए, निर्वाचन आयोग के बारे में इस कार्टून को देखना रोक दिया गया है। जब व्यंग्य को प्रतिबंधित किया जाता है, तो शायद इसका मतलब यही होता है कि कार्टून ने अपनी बात सही ढंग से कह दी है।’’ केरल कार्टून अकादमी ने भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंजुल और आचार्य के कार्टून पर लगाई गई पाबंदियों का कड़ा विरोध किया है।
अकादमी ने एक बयान में कहा कि कई अन्य कार्टूनिस्ट पर भी ऐसी ही पाबंदियां लगाई गई थीं, और चिंता जताई कि पीड़ित लोग खुलकर विरोध करने के लिए आगे नहीं आए। अकादमी ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कार्टूनिस्ट शंकर के बीच हुए एक संवाद को भी याद किया, जिसमें नेहरू ने उनसे कहा था, ‘‘मुझे बख्शना मत।’’ उनका यह कथन अक्सर उद्धृत किया जाता है।
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