निर्वाचन आयोग पर कार्टून बनाने पर Satish Acharya का Instagram अकाउंट भारत में बंद
कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के ‘इंस्टाग्राम’ अकाउंट पर भारत में पाबंदी लगाये जाने के बाद, केरल कार्टून अकादमी ने उनके प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए इस ‘‘प्रतिबंध’’ को हटाने की मांग की है। आचार्य के कार्टून में मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए जाने के बाद यह पाबंदी लगाई गई। आचार्य के इंस्टाग्राम पेज पर प्रदर्शित एक संदेश में कहा गया, ‘‘भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के तहत कानूनी जरूरतों को देखते हुए हमने इस अकाउंट तक पहुंच को कुछ समय के लिए रोक दिया है।’’ राजनीतिक कार्टूनिस्ट मंजुल ने भी कहा है कि निर्वाचन आयोग पर बने उनके एक कार्टून पर भारत में कथित तौर पर रोक लगा दी गई है।
इस मामले ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद तूल पकड़ लिया है, जिसमें दावा किया गया था कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में तीन में से दो आयुक्त -- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी -- ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में संधू और जोशी ने आयोग द्वारा लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई। उनका कहना है कि ये फैसले उनकी जानकारी या अनुशंसा के बिना लिए गए थे।
वहीं, आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस घटनाक्रम के बारे में ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए आचार्य ने कहा कि 2023 में प्रकाशित उनके कुछ कार्टून भी ‘ब्लॉक’ किए जा रहे हैं। उन्होंने पोस्ट किया था, ‘‘डर के आगे जीत नहीं है, साहेब!
2023 में छपे कुछ कार्टून भी अब ब्लॉक किए जा रहे हैं!’’ इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने इस मामले पर अब तक कोई अलग बयान जारी नहीं किया है। इस पाबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए, आचार्य ने ‘एक्स’ पर नरेन्द्र मोदी का दिसंबर 2018 का एक बयान भी साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने दिवंगत कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के काम की तारीफ की थी और उनके कॉमन मैन कार्टून के डिजिटाइजेशन पर उनके परिवार को बधाई दी थी। आचार्य द्वारा साझा की गई खबर का शीर्षक था, ‘‘पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा, कार्टून में चीजों को दुरूस्त करने की क्षमता होती है और कार्टूनिस्ट ईश्वर के करीब होते हैं।’’ आचार्य ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा, ‘‘वाह मोदीजी वाह!
ब्लॉक सरकार।’’ कार्टूनिस्ट मंजुल ने भी रविवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसी के नोटिस के बाद, इंस्टाग्राम ने निर्वाचन आयोग के बारे में उनके एक कार्टून को देखने पर रोक लगा दी है। मंजुल ने ‘एक्स’ पर वह कार्टून साझा करते हुए कहा, ‘‘यह कार्टून भारत के बाहर अभी भी दिख रहा है... लेकिन भारतीयों के लिए, निर्वाचन आयोग के बारे में इस कार्टून को देखना रोक दिया गया है। जब व्यंग्य को प्रतिबंधित किया जाता है, तो शायद इसका मतलब यही होता है कि कार्टून ने अपनी बात सही ढंग से कह दी है।’’ केरल कार्टून अकादमी ने भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंजुल और आचार्य के कार्टून पर लगाई गई पाबंदियों का कड़ा विरोध किया है।
अकादमी ने एक बयान में कहा कि कई अन्य कार्टूनिस्ट पर भी ऐसी ही पाबंदियां लगाई गई थीं, और चिंता जताई कि पीड़ित लोग खुलकर विरोध करने के लिए आगे नहीं आए। अकादमी ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कार्टूनिस्ट शंकर के बीच हुए एक संवाद को भी याद किया, जिसमें नेहरू ने उनसे कहा था, ‘‘मुझे बख्शना मत।’’ उनका यह कथन अक्सर उद्धृत किया जाता है।
RCom Bank Fraud: पूर्व MD अमिताभ झुंझुनवाला को CBI कोर्ट से मिली मेडिकल जमानत
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के करोड़ों रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) समूह के पूर्व प्रबंध निदेशक अमिताभ झुंझुनवाला को मंगलवार को चिकित्सकीय आधार पर जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश नितिन वी जीवाने ने झुंझुनवाला की बिगड़ती सेहत के आधार पर यह याचिका स्वीकार की। अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस हालिया आदेश का सहारा लिया, जिसके तहत उन्हें धन शोधन से जुड़े मामले में वैधानिक राहत दी गई थी।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने झुंझुनवाला को एक जून को गिरफ्तार किया था। झुंझुनवाला ने अपने वकीलों आबाद पोंडा, राहुल अग्रवाल और जास्मीन पुरानी के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, हड्डियों का कमजोर या खोखला होना, मांसपेशियों का क्षय और हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारी जैसी गंभीर रोगों का हवाला दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इन बीमारियों के लिए लगातार डॉक्टरों की निगरानी और लंबे इलाज की जरूरत है, जो न्यायिक हिरासत में संभव नहीं है। अधिवक्ता पोंडा ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उन्हें बीमार या अस्वस्थ पाते हुए नियमित जमानत दे दी थी। इस दलील को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि चिकित्सकीय स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए आवेदक सीबीआई मामले में भी चिकित्सकीय आधार पर नियमित जमानत का हकदार है।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट और सीधे शब्दों में कहा था कि उनकी चिकित्सकीय स्थिति के लिए विशेष इलाज की आवश्यकता है। यह इलाज सिर्फ दवाइयां देने या दर्द को थोड़े समय के लिए कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक लगातार देखरेख और सुधार की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की गारंटी देने वाले एक या दो स्थानीय जमानतदारों को पेश करने पर जमानत दे दी।
सीबीआई का यह मामला भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अगस्त 2025 में आरकॉम और अन्य के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। बैंक ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया था, जिससे बैंक को शुरू में 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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