पाकिस्तान के साथ यूएई ने कैंसिल की डील, आखिर भारत के लिए क्या हैं इसके मायने
पाकिस्तान को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान को इस बार यूएई से झटका मिला है. दरअसल, पाकिस्तान के साथ होने वाली अहम एयरपोर्ट मैनेजमेंट डील को यूएई ने रद्द कर दिया है. खास बात है कि यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत के दौरे पर आए थे और इसी दौरे के बाद यूएई ने पाकिस्तान के साथ होने वाली इस डील को रद्द कर दिया.
दिलचस्पी खत्म हो गई: यूएई का स्पष्ट संदेश
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यूएई ने पाकिस्तान के एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में दिलचस्पी खत्म होने की बात कहकर समझौता रद्द कर दिया है. कहा जा रहा है कि कराची, इस्लामाबाद और लाहौर एयरपोर्ट्स के संचालन और विकास से जुड़ी डील पर लंबे वक्त से बातचीत हो रही थी लेकिन अब इसे पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
भारत दौरे के बाद बदला समीकरण
एक्सपर्ट्स की मानें तो यूएई के राष्ट्रपति हाल में भारत आए थे, जिसके बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है. भारत और यूएई के बीच रणनीतिक, आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. इसका असर पाकिस्तान पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है.
पाकिस्तान की कमजोर होती वैश्विक पकड़
पाकिस्तान वर्तमान में राजनीतिक अस्थिरता, सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक संकट से जूझ रहा है. पाकिस्तान को पहले से ही विदेशी निवेश के मोर्चे पर संघर्ष करना पड़ रहा है. यूएई जैसे करीबी सहयोगी देश का पीछे होना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है. वहीं, यूईए और भारत के बीच मजबूत संबंध हैं. दोनों देश प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं. आने वाले वक्त में भारत को इसका सीधा लाभ दिया जा सकता है.
पाकिस्तान की चिंता बढ़ी
एयरपोर्ट डील रद्द होने की वजह से पाकिस्कतान की इंटरनेशनस बेइज्जती हुई है. पाकिस्तान कमजोर दिख रहा है. विश्लेषकों की मानें तो हालात अगर नहीं सुधरे तो अन्य विदेशी निवेशक भी पाकिस्तान से दूरी बना सकते हैं.
'मदर ऑफ ऑल डील्स' का कल होगा ऐलान, भारतीय बिजनेस के लिए खुलेंगे यूरोप के दरवाजे
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर चल रही बातचीत अब पूरी हो गई है. ट्रेड सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस बड़ी डील का ऑफिशियल ऐलान मंगलवार को किया जाएगा. हालांकि, कागज पर साइन करने से पहले इसकी कानूनी बारीकियों की जांच होगी, जो कि किसी भी इंटरनेशनल समझौते के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोसेस है.
क्यों कहा जा रहा है इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स'?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को‘मदर ऑफ ऑल डील्स’यानी अब तक की सबसे बड़ी डील बताया है. उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप एक-दूसरे के लिए बहुत जरूरी पार्टनर हैं. पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत हुई है, जिससे अब अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं. इस डील से दोनों तरफ के बिजनेस और आम लोगों के लिए तरक्की के नए मौके खुलेंगे.
यूरोपीय संघ के ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविच इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. उन्होंने बताया कि इस डील को फाइनल करने के लिए पीयूष गोयल के साथ उनकी 10 बार मुलाकात हुई. यही नहीं, यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी भारत आई हुई हैं। वह 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात करेंगी, जिसमें इस ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लगेगी.
बिजनेस और आम जनता को क्या मिलेगा?
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. अनुमान है कि 2024-25 में दोनों के बीच करीब 136 अरब डॉलर का व्यापार होगा. इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय सामानों के लिए यूरोप का बड़ा बाजार आसानी से खुल जाएगा. दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बीच भारत और यूरोप की आर्थिक दोस्ती और मजबूत होगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे हमारे घरेलू उद्योगों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि बिजनेस के नए रास्ते खुलेंगे.
अब आगे क्या होगा?
भले ही बातचीत पूरी हो गई है, लेकिन इसे लागू होने में अभी कुछ स्टेप्स बाकी हैं. मंगलवार को होने वाले ऐलान के बाद कागजी कार्यवाही पूरी की जाएगी. इसके बाद भारत में केंद्रीय कैबिनेट और यूरोप में यूरोपीय संसद से मंजूरी लेनी होगी. इस पूरी प्रक्रिया के बाद यह समझौता पूरी तरह से लागू हो जाएगा.
Delhi: Prime Minister Narendra Modi, President of the European Commission Ursula von der Leyen and President of the European Council António Costa attend the ‘At Home’ reception hosted by President Droupadi Murmu at Rashtrapati Bhavan pic.twitter.com/8fbYFJ1ZAo
— IANS (@ians_india) January 26, 2026
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