केदारनाथ-बद्रीनाथ सहित उत्तराखंड के 50 मंदिरों में BAN हो सकती है गैर-हिंदुओं की एंट्री, जानें क्या बोले सीएम
उत्तराखंड के चारधाम सहित 50 मंदिरों में जल्द गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने ये प्रस्ताव दिया है, जिस पर सरकार की ओर से सहमति भी बन गई है. हालांकि, ये प्रतिबंध जैन, बुद्ध और सिख धर्म के अनुयायियों पर लागू नहीं होगा. प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने पुरोहितों की आस्था को ध्यान में रखते हुए फैसला करने की बात की है.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने एक न्यूज चैनल को बताया कि हमारी समिति के तहत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव अगली बोर्ड मीटिंग में रखा जाएगा. इसमें तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल होंगे. उत्तराखंड के गंगा घाटों से भी हिंदुओं की एंट्री वर्जित करने की योजना बनाई जा रही है.
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है कि जैन, बौद्ध और सिख धर्म के अनुयायियों की एंट्री वर्जित नहीं की जाएगी. हम इन तीनों धर्म को हिंदू धर्म की ही एक शाखा मानते हैं. इस वजह से उनके ऊपर ये बैन नहीं लगाया जाएगा. यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगाने पर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि जल्द इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
गैर-हिंदू की परिभाषा क्या है?
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि गैर-हिंदू का मतलब उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है. जिन लोगों की सनातन परंपरा में विश्वास है, उनके लिए केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम खुले रहेंगे.
मामले में क्या बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में कहा कि धामों के संचालन से जुड़े धार्मिक संगठनों, संत समाज और तीर्थ पुरोहितों की राय पर ही सरकार फैसला करेगी. इन स्थलों के लिए पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है. सभी तथ्यों को परखने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा.
Republic Day 2026: 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को कर्तव्य पथ पर किया लीड, कुछ ऐसी है कैप्टन समीरा की प्रेरक कहानी
Republic Day 2026: जब देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और उत्साह के साथ मनाएगा, तब कर्तव्य पथ पर एक ऐसी तस्वीर दिखेगी, जो हर भारतीय का सीना चौड़ा कर देगी. कैप्टन समीरा बुट्टर अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए परेड में आगे बढ़ेंगी. उनके कदमों की ताल सिर्फ परेड का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि यह नए भारत की ताकत और आत्मविश्वास का संदेश भी देगी.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को दर्शाया
कैप्टन समीरा उस टुकड़ी की कमांडर हैं, जो इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को दर्शा रही है. यह वही ऑपरेशन है, जिसने 2025 में पड़ोसी देश को भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता का साफ संदेश दिया था. हालांकि, यह जिम्मेदारी उनके लिए आसान नहीं है.
पिता को खोकर भी कर्तव्य को चुना
कैप्टन समीरा हाल ही में अपने पिता कर्नल सरबजीत सिंह बुट्टर को खो चुकी हैं. पिता के जाने का गहरा दुख होने के बावजूद उन्होंने कर्तव्य को चुना और परेड में टुकड़ी का नेतृत्व करने का फैसला लिया. यह सेना के उस सिद्धांत को दर्शाता है, जिसमें कहा जाता है ‘स्वयं से पहले सेवा’. उनका मानना है कि गणतंत्र दिवस परेड में एक टुकड़ी की कमांडर होना ही उनके पिता को सच्ची श्रद्धांजलि है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भले ही उनका परिवार परेड देखने नहीं आ पाएगा, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि उनके पिता ऊपर से उनका हौसला बढ़ा रहे होंगे, जैसे वे हमेशा करते थे.
ये है उनका बैकग्राउंड
कैप्टन समीरा चंडीगढ़ से आती हैं और वे अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जो भारतीय सेना में देश सेवा कर रही हैं. उनके दादा ब्रिगेडियर संपूरण सिंह बुट्टर को महावीर चक्र और वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जबकि परदादा रिसालदार मेजर रतन सिंह भी सेना में थे. बचपन से ही समीरा ने सेना में जाने का सपना देखा और आज वह सपना पूरे देश के सामने साकार हो रहा है.
गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर चलती कैप्टन समीरा बुट्टर सिर्फ एक अफसर नहीं होंगी, बल्कि वे साहस, समर्पण और देशभक्ति की वह मिसाल होंगी, जो देश की हर बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी.
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