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बहराइच की 7 सीटों का क्या है चुनावी इतिहास? जानिए किसका रहा दबदबा

UP Election 2027: यूपी में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, जिसको लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. यूपी के प्रमुख जिलों में बहराइच भी शामिल है. यहां विधानसभा की बलहा , नानपारा, म मटेरा, महसी, बहराइच, पयागपुर और कैसरगंज समेत सात सीटें आती है. आपको बता दें कि बहराइच विधानसभा सीट पर लंबे समय तक समाजवादी पार्टी (SP) का मजबूत प्रभाव रहा है, जिसे सपा के कद्दावर नेता डॉ. वकार अहमद शाह का गढ़ माना जाता था. हालांकि, हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. आइए जानते हैं बहराइच विधानसभा के बारे में. 

बलहा विधानसभा का इतिहास

बलहा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. इससे पहले यह क्षेत्र अलग-अलग सीमाओं में था. यहां दलित मतदाताओं की अच्छी संख्या है, इसलिए पहले BSP की मजबूत पकड़ मानी जाती थी, लेकिन बाद में BJP ने यहां अपनी जगह बना ली.

सीट का इतिहास मुख्य रूप से 2012 से उपलब्ध है (परिसीमन के बाद):

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2012 सावित्री बाई फुले BJP पहली जीत, BSP के किरन भारती को हराया
2014 (उपचुनाव) बंशीधर बौद्ध SP सावित्री बाई फुले के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद रिक्त हुई सीट
2017 अक्षयबर लाल (अक्षयवर लाल) BJP BSP के किरन भारती को बड़े अंतर से हराया
2019 (उपचुनाव) सरोज सोनकर BJP अक्षयबर लाल के निधन/रिक्ति के बाद
2022 सरोज सोनकर BJP SP को हराकर फिर जीत


2022 में सरोज सोनकर (BJP) ने 1,00,483 वोट (लगभग 46.8%) हासिल किए और SP के अक्षयबर नाथ कनौजिया को करीब 16,573 वोटों से हराया। BSP तीसरे स्थान पर रही. 2017 में BJP को 51% से अधिक वोट मिले. 2012 में BJP ने करीब 33% वोटों के साथ जीत हासिल की.

किस पार्टी का गढ़?

BJP का गढ़ बन चुका है. परिसीमन के बाद से BJP ने 2012, 2017, 2019 (उपचुनाव) और 2022 में जीत हासिल की है. केवल 2014 के उपचुनाव में SP जीती थी. पहले BSP यहां प्रतिस्पर्धी रही (खासकर दलित वोटों की वजह से), लेकिन 2017 के बाद BJP की पकड़ मजबूत हुई है। SP भी समय-समय पर चुनौती देती रही है. बलहा एक अपेक्षाकृत नई (2008 के बाद) SC आरक्षित सीट है, जहां दलित मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पिछले एक दशक में BJP ने इसे अपना मजबूत क्षेत्र बना लिया है. वर्तमान में सरोज सोनकर यहां की विधायक हैं.

नानपारा  विधानसभा सीट का इतिहास

नानपारा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. 2008 के परिसीमन के बाद इसका नंबर 283 है. इस सीट पर वर्तमान में विधायक राम निवास वर्मा (अपना दल (सोनेलाल) 2022 में चुने गए. BJP गठबंधन (NDA) के हिस्से के रूप में. यह सीट पुरानी है और 1950-60 के दशक से अस्तित्व में है. पहले यहां CPI (कम्युनिस्ट पार्टी) का प्रभाव रहा, फिर BJP, BSP, कांग्रेस और अन्य पार्टियां बारी-बारी से जीतीं. दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी (SP) ने 1977 से 2017 तक कभी इस सीट पर जीत नहीं हासिल की (2022 में माधुरी वर्मा SP से लड़ीं लेकिन हार गईं). 2022 में अपना दल प्रत्याशी राम निवास वर्मा  को 87,689 वोट (लगभग 43.9%), वहीं समाजवादी प्रत्याशी माधुरी वर्मा को 75,505 वोट मिले.

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2022 राम निवास वर्मा AD(S) SP की माधुरी वर्मा को ~12,184 वोटों से हराया
2017 माधुरी वर्मा BJP कांग्रेस के वारिस अली को ~18,669 वोटों से हराया
2012 माधुरी वर्मा INC (कांग्रेस) BSP के वारिस अली को हराया
2007 वारिस अली BSP BJP के जटा शंकर सिंह को हराया
2002 जटा शंकर सिंह BJP BSP के वारिस अली को कड़ी टक्कर देकर जीते
1996 जटा शंकर सिंह BJP -
1993 फजलुर रहमान अंसारी BSP BJP को हराया
1991 जय शंकर सिंह / जटा शंकर BJP राम मंदिर लहर के दौरान
1989 देवता दीन JD (जनता दल) -
1985 देवता दीन INC -
1980 जटा शंकर सिंह BJP -
1977 फजलुर रहमान अंसारी CPI -
1974 फजलुर रहमान CPI -

किस पार्टी का गढ़?

BJP ने यहां कई बार जीत (1980, 1991, 1996, 2002, 2017) हासिल की है. जटा शंकर सिंह लंबे समय तक BJP के प्रमुख चेहरे रहे. 2017 में माधुरी वर्मा (जो पहले कांग्रेस से जीती थीं) BJP में शामिल होकर जीतीं. BSP ने 1993 और 2007 में जीत दर्ज की. कांग्रेस ने 1985 और 2012 में जीत हासिल की. CPI का शुरुआती प्रभाव (1970 के दशक) रहा. 2022 में BJP की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने जीत हासिल की. कुल मिलाकर, BJP और उसके सहयोगी हाल के वर्षों में मजबूत रहे हैं, लेकिन सीट किसी एक दल का “किला” नहीं रही. नानपारा बहराइच की एक महत्वपूर्ण और पुरानी सामान्य श्रेणी की सीट है. यहां राजनीतिक उतार-चढ़ाव ज्यादा रहे हैं. वर्तमान में अपना दल (सोनेलाल) के राम निवास वर्मा विधायक हैं.

मटेरा विधानसभा सीट का इतिहास

मटेरा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद नई बनी. इससे पहले यह क्षेत्र मुख्य रूप से चरदा विधानसभा सीट का हिस्सा था, जिसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. चरदा के बड़े हिस्से और नानपारा के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर मटेरा बनाया गया. पहला चुनाव 2012 में हुआ.

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2012 यासर शाह SP कांग्रेस के अली अकबर को ~2,801 वोटों से हराया (पहला चुनाव)
2017 यासर शाह SP BJP के अरुण वीर सिंह को सिर्फ ~1,595 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया
2022 मारिया शाह SP BJP के अरुण वीर सिंह को ~10,428 वोटों से हराया

चुनाव इतिहास और विधायक

मटेरा पर अब तक तीन चुनाव हुए हैं, और तीनों बार समाजवादी पार्टी (SP) जीती है. 2022 में मारिया शाह (SP) ने 1,02,255 वोट (लगभग 48.15%) हासिल किए. BJP के अरुण वीर सिंह को 91,827 वोट मिले. 2017 में मोदी लहर के बावजूद SP ने यह सीट बचाई, जबकि बहराइच की ज्यादातर सीटें BJP के पास चली गईं. यासर शाह दो बार विधायक रहे, और 2022 में उनकी पत्नी मारिया शाह जीतीं.

समाजवादी पार्टी (SP) का मजबूत गढ़ है. सीट के अस्तित्व में आने के बाद से SP ने लगातार तीन बार जीत हासिल की है. BJP यहां मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी रही है (खासकर 2017 और 2022 में करीबी मुकाबला), लेकिन अभी तक जीत नहीं पाई. BSP और कांग्रेस भी प्रतिस्पर्धा करती रही हैं, लेकिन SP का दबदबा कायम है. पुरानी चरदा सीट पर भी 1990 के दशक से SP का प्रभाव रहा था. मटेरा बहराइच की एक अपेक्षाकृत नई सामान्य श्रेणी की सीट है, जो SP का विश्वसनीय क्षेत्र बन चुकी है. यासर शाह और उनकी पत्नी मारिया शाह के परिवार का यहां मजबूत प्रभाव है. वर्तमान में मारिया शाह विधायक हैं.

महसी विधानसभा सीट का इतिहास

महसी विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यह सीट 1970 के दशक से अस्तित्व में है (पहला चुनाव 1974)। महसी तहसील और आसपास के क्षेत्रों को कवर करती है। सुरेश्वर सिंह का परिवार यहां लंबे समय से सक्रिय रहा है—उनके पिता सुखद राज सिंह भी पहले विधायक रह चुके हैं.

 

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2022 सुरेश्वर सिंह BJP SP के कृष्ण कुमार ओझा को ~42,684 वोटों से हराया
2017 सुरेश्वर सिंह BJP कांग्रेस के अली अकबर को ~58,969 वोटों के बड़े अंतर से हराया
2012 कृष्ण कुमार ओझा BSP BJP के सुरेश्वर सिंह को करीब 2,489 वोटों से हराया
2007 सुरेश्वर सिंह BJP BSP के अली अकबर को सिर्फ 441 वोटों से हराया
2002 अली बहादुर BSP -
2003 (उपचुनाव) दिलीप कुमार वर्मा SP अली बहादुर के निधन के बाद
1996 दिलीप कुमार SP -
1993 दिलीप कुमार वर्मा SP -
1991 नीलम सिंह BJP सुखद राज सिंह की पत्नी
1989/85/80 इंद्र प्रताप सिंह INC तीन बार जीते
1977 सुखद राज सिंह JNP -
1974 सुखद राज सिंह BJS पहली बार

किस पार्टी का गढ़?

हाल के वर्षों में BJP का मजबूत गढ़ बन चुका है. सुरेश्वर सिंह ने 2007, 2017 और 2022 में जीत हासिल की (2012 में हारे थे). 1990 के दशक में SP का प्रभाव रहा, 2000 के दशक में BSP ने भी जीत दर्ज की. 1980 के दशक में कांग्रेस का दबदबा था. परिवारिक राजनीति (सुखद राज सिंह → नीलम सिंह → सुरेश्वर सिंह) यहां महत्वपूर्ण रही है. कुल मिलाकर, BJP ने पिछले दो चुनावों में बड़े अंतर से जीत हासिल कर इसे अपना क्षेत्र बना लिया है. महसी बहराइच की एक पुरानी सामान्य श्रेणी की सीट है, जहां राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं. वर्तमान में BJP के सुरेश्वर सिंह विधायक हैं और पार्टी की पकड़ मजबूत है.

बहराइच विधानसभा का इतिहास

बहराइच विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की मुख्य सीट है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यह सीट जिले का शहरी-ग्रामीण मिश्रित क्षेत्र कवर करती है. शुरुआती वर्षों में यह बहराइच पूर्व/पश्चिम या उत्तर/दक्षिण के रूप में विभाजित थी. 1967 के बाद एकीकृत बहराइच सीट बनी.  

किस पार्टी का गढ़?

पहले लंबे समय तक समाजवादी पार्टी (SP) का गढ़ रहा, अब BJP ने कब्जा कर लिया है. डॉ. वकार अहमद शाह ने 1993 से 2012 तक पांच बार लगातार जीत हासिल की. यह SP का मजबूत गढ़ था. 2017 में BJP की अनुपमा जायसवाल ने वकार शाह के परिवार (पत्नी रूबाब सैयदा) को हराकर सीट छीन ली. 2022 में उन्होंने फिर जीत हासिल की (यासर शाह के खिलाफ). 1990 के दशक से पहले कांग्रेस और BJP/जनसंघ का प्रभाव रहा. कुल मिलाकर, 1990-2010 के दशक में SP का दबदबा था, लेकिन 2017 के बाद BJP ने इसे अपना क्षेत्र बना लिया है। मुकाबला अक्सर करीबी रहता है. बहराइच जिले की प्रमुख विधानसभा सीट है, जहां लंबे समय तक वकार अहमद शाह परिवार का प्रभाव रहा. वर्तमान में BJP की अनुपमा जायसवाल विधायक हैं.

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2022 अनुपमा जायसवाल BJP SP के यासर शाह को ~4,078 वोटों के करीबी अंतर से हराया
2017 अनुपमा जायसवाल BJP SP की रूबाब सैयदा को ~6,702 वोटों से हराया
2012 डॉ. वकार अहमद शाह SP कांग्रेस को हराया
2007 डॉ. वकार अहमद शाह SP BSP को हराया
2002 डॉ. वकार अहमद शाह SP -
1996 वकार अहमद शाह SP -
1993 वकार अहमद शाह SP -
1991 बृज राज त्रिपाठी BJP -
1989 धर्मपाल INC -
1985 महारन नाथ कौल INC -
1980 धर्मपाल BJP -
1977 खान मोहम्मद आतिफ खान JNP -

पयागपुर विधानसभा सीट का इतिहास

पयागपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद नई बनी. बहराइच सदर, कैसरगंज और पुरानी फखरपुर विधानसभा के कुछ इलाकों को मिलाकर इसका गठन हुआ.  2022 में सुभाष त्रिपाठी (BJP) ने 1,10,162 वोट (लगभग 47.77%) हासिल किए। SP के मुकेश श्रीवास्तव को 98,106 वोट मिले. मुकेश श्रीवास्तव 2012 में कांग्रेस से जीते थे, बाद में SP में शामिल हो गए और दोनों बार BJP से हारे.

किस पार्टी का गढ़?

हाल के वर्षों में BJP का गढ़ बन चुका है. इस सीट पर पहला चुनाव 2012 में हुआ. 2012 में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. 2017 और 2022 में BJP के सुभाष त्रिपाठी ने लगातार जीत दर्ज की. SP यहां मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी रही है, लेकिन अभी तक जीत नहीं पाई. कुल मिलाकर, 2017 के बाद BJP ने इसे अपना मजबूत क्षेत्र बना लिया है. पयागपुर बहराइच की एक अपेक्षाकृत नई सामान्य श्रेणी की सीट है। वर्तमान में BJP के सुभाष त्रिपाठी विधायक हैं.

वर्ष विधायक पार्टी टिप्पणी
2012 मुकेश श्रीवास्तव (उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप) INC (कांग्रेस) BSP के अजीत प्रताप सिंह को ~27,000 वोटों से हराया (पहला चुनाव)
2017 सुभाष त्रिपाठी BJP SP के मुकेश श्रीवास्तव को ~41,541 वोटों के बड़े अंतर से हराया
2022 सुभाष त्रिपाठी BJP SP के मुकेश श्रीवास्तव को ~12,056 वोटों से हराया

कैसरगंज विधानसभा सीट का इतिहास

कैसरगंज विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है. यह सीट बहराइच और गोंडा जिले की सीमाओं को प्रभावित करने वाली राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल और चर्चित सीटों में से एक है. राजनीतिक रूप से यह निर्वाचन क्षेत्र कैसरगंज लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जो कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार का मजबूत प्रभाव क्षेत्र माना जाता है. 

कैसरगंज विधानसभा: किसका रहा है गढ़?

कैसरगंज विधानसभा का चुनावी इतिहास मिला-जुला रहा है और इसे किसी एक पार्टी का स्थायी गढ़ नहीं कहा जा सकता. यहां समय-समय पर मतदाताओं ने परिवर्तन को चुना है:  सपा और भाजपा के बीच मुकाबला: हालिया दशकों में मुख्य लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच सिमट कर रह गई है. बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव: भले ही यह विधानसभा सीट अलग हो, लेकिन लोकसभा स्तर पर बृजभूषण शरण सिंह के व्यक्तिगत प्रभाव के कारण इसे भाजपा का प्रभाव-क्षेत्र माना जाता रहा है. हालांकि, विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी यहां भाजपा को कड़ी टक्कर देती आई है और वर्तमान में यहां सपा का ही कब्जा है.
• शुरुआती दौर: 1977 में यहां पहली बार जनता पार्टी के बाबू लाल वर्मा जीते थे। इसके बाद 1980 और 1985 में कांग्रेस ने वापसी की.
• भाजपा की पहली जीत: राम मंदिर लहर के दौरान 1991 में पहली बार भाजपा के रुद्रेंद्र विक्रम सिंह ने यहाँ कमल खिलाया.
• सपा की धमक: 1993 के ऐतिहासिक चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामतेज ने भाजपा को हराकर यह सीट सपा के खाते में डाली.
• बसपा का खाता: 2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर यहां से चुनाव जीता गया था.
• भाजपा की वापसी: 2012 के विधानसभा चुनाव और फिर 2017 के चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुट बिहारी वर्मा ने लगातार दो बार यहां से शानदार जीत दर्ज कर इसे भाजपा का मजबूत किला बना दिया था.
• 2022 का बड़ा उलटफेर: 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की हैट्रिक लगाने की उम्मीदों को करारा झटका लगा। समाजवादी पार्टी (SP) के आनंद कुमार यादव ने 1,03,135 वोट हासिल कर भाजपा के गौरव वर्मा (मुकुट बिहारी के बेटे) को बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया.

 

 

वर्ष विजेता पार्टी मुख्य बात / अंतर
1951/52 सियाराम कांग्रेस कैसरगंज सेंट्रल
1957 हुकुम सिंह कांग्रेस पहली स्पष्ट जीत (निर्दलीय को हराया)
1962 हुकुम सिंह विसेन कांग्रेस दोबारा जीत
1967 डी. सिंह भारतीय जनसंघ पहली बार जनसंघ की जीत
1969 भगवती सिंह कांग्रेस वापसी
1974 बाबू लाल वर्मा भारतीय जनसंघ -
1977 बाबू लाल वर्मा जनता पार्टी आपातकाल के बाद
1980 सुंदर सिंह कांग्रेस (I) -
1985 एहतिशाम वली खान कांग्रेस -
1989 रामतेज यादव लोकदल (बी) बहुत कम अंतर से
1991 रुदेन्द्र विक्रम सिंह भाजपा राम मंदिर लहर
1993 रामतेज यादव समाजवादी पार्टी -
1996 रामतेज यादव समाजवादी पार्टी बहुत कम अंतर (234 वोट)
2002 मुकुट बिहारी वर्मा भाजपा -
2007 गुलाम मोहम्मद खान बसपा बसपा की एकमात्र जीत
2012 मुकुट बिहारी वर्मा भाजपा -
2017 मुकुट बिहारी भाजपा 27,363 वोटों से जीत
2022 आनंद कुमार यादव समाजवादी पार्टी 7,711 वोटों से जीत (भाजपा की हैट्रिक रोकी)

 

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रूस में मिलिट्री प्लेन क्रैश, 6 लोगों की मौत, अमूर क्षेत्र में टेकऑफ के दौरान हुआ हादसा

Russia Military Plane Crash: रूस में बड़ा विमान हादसा हो गया है. रूस के सुदूर पूर्वी अमूर क्षेत्र में मंगलवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद क्रास्नोयारोवो गांव के पास हुआ. विमान में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें से छह की मौत हो गई.

रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि मृतकों में दो लोगों ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया. हादसे में विमान में सवार एक व्यक्ति के बचने की जानकारी सामने आई है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त विमान टुपोलेव Tu-154 था. हादसा किस वजह से हुआ, इसकी अभी जानकारी नहीं मिली है. दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी.

ईंधन टैंक में हुआ था धमाका

अमूर क्षेत्र के क्रास्नोयारोवो गांव के पास हुए इस हादसे में विमान में सवार सात लोगों में से छह की मौत हो गई. इनमें दो लोगों ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में चोटों के कारण दम तोड़ दिया. हादसे के बाद विमान के ईंधन टैंक में धमाका हुआ, जिसके चलते मलबे में आग लग गई. दुर्घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया.

सोवियत दौर का प्रमुख विमान था Tu-154

Tu-154 सोवियत संघ के दौर में इस्तेमाल होने वाला तीन इंजन वाला जेट विमान था. इसे शुरुआत में मध्यम दूरी की यात्री उड़ानों के लिए तैयार किया गया था. इस विमान ने 1968 में पहली उड़ान भरी और 1970 के दशक की शुरुआत में इसे यात्री सेवाओं में शामिल किया गया.

बाद में सेना और सरकार ने भी Tu-154 का इस्तेमाल परिवहन और अन्य विशेष अभियानों के लिए करना शुरू किया. सोवियत संघ के समय यह घरेलू उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख यात्री विमानों में शामिल था. इस विमान के 1,000 से ज्यादा मॉडल बनाए गए थे. तीन इंजन, मजबूत लैंडिंग गियर और कम सुविधाओं वाले हवाई अड्डों से भी संचालन की क्षमता के कारण यह रूस जैसे बड़े देश के अलग-अलग इलाकों में लंबे समय तक उपयोगी रहा.

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