झारखंड बोर्ड के कक्षा 9वीं और 11वीं स्पेशल एग्जामिनेशन का रिजल्ट जारी, ऐसे करें चेक
बता दें झारखंड बोर्ड की ओर से कक्षा 9वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा 28 फरवरी से आयोजित की गई थी। जबकि 11वीं की परीक्षा 25 फरवरी 2026 से निर्धारित थी। अब रिजल्ट ऑनलाइन जारी कर दिया गया है।
स्मोकिंग जोन की आड़ में नहीं चलेगा हुक्का, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट और कैफे संस्कृति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होने जा रहा है. लंबे समय से स्मोकिंग ज़ोन की आड़ में हुक्का परोसने वाले कारोबारियों के लिए अदालत का यह रुख बेहद सख्त संदेश देता है. मुख्य रूप से यह फैसला जनस्वास्थ्य को व्यावसायिक हितों से ऊपर रखने का एक ठोस न्यायिक कदम है.
अदालत का स्पष्ट रुख और याचिकाएं खारिज
न्यायालय के समक्ष कई रेस्टोरेंट और लाउंज संचालकों ने याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें हुक्का बार चलाने और ग्राहकों को हुक्का सर्व करने की अनुमति मांगी गई थी. हालांकि अदालत ने इन सभी याचिकाओं को एक सिरे से खारिज कर दिया. पीठ ने साफ किया कि राज्य के भीतर किसी भी रेस्टोरेंट, कैफे या लाउंज में ग्राहकों को हुक्का परोसने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती.
स्मोकिंग एरिया के तर्क पर करारा प्रहार
कारोबारियों ने अपनी पैरवी में यह दलील दी थी कि उनके पास वैध फूड लाइसेंस मौजूद है और उन्होंने हुक्का पीने के शौकीनों के लिए परिसर के भीतर अलग से स्मोकिंग जोन बना रखा है. अदालत ने इस दलील को पूरी तरह अमान्य करार दिया. हाईकोर्ट ने यह सिद्धांत स्पष्ट किया कि सिर्फ अलग से जगह चिन्हित कर देने भर से किसी को हुक्का परोसने का वैधानिक अधिकार नहीं मिल जाता.
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सेवा के दायरे में हुक्का तैयार करना
अदालत ने सर्विस की परिभाषा को बहुत ही सूक्ष्मता से रेखांकित किया. पीठ का मानना था कि रेस्टोरेंट के कर्मचारियों द्वारा हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू या फ्लेवर सेट करना और फिर उसे ग्राहक की टेबल तक पहुंचाना सीधे तौर पर कमर्शियल सर्विस के दायरे में आता है. जब यह पूरी प्रक्रिया व्यावसायिक गतिविधि का हिस्सा है, तो इसे महज स्मोकिंग ज़ोन की छूट का सहारा लेकर जायज नहीं ठहराया जा सकता.
फूड लाइसेंस की सीमाएं और पुलिस कार्रवाई
फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नगर निगम अथवा खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला लाइसेंस केवल खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए होता है. इसे हुक्का बार चलाने के लाइसेंस के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो पुलिस प्रशासन के पास उस पर सीधी, त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है. हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश का मूल आधार आम जनता की सेहत की सुरक्षा है. अदालत ने साफ कहा कि हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने और स्वस्थ माहौल का अधिकार है. किसी भी व्यापारिक लाभ या मनोरंजन के नाम पर आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
कारोबारियों पर असर और भविष्य की तस्वीर
इस फैसले का सीधा और व्यापक असर प्रदेश भर के कैफे, लाउंज और रेस्टोरेंट उद्योग पर देखने को मिलेगा। अब तक जो संस्थान कानून के अस्पष्ट पहलुओं या स्मोकिंग एरिया का सहारा लेकर हुक्का परोस रहे थे, उन पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर भी अब ऐसे हुक्का सेंटरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाए जाने की उम्मीद है.
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