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एशियन गेम्स 2026 में 75 साल का सूखा खत्म कर रचा इतिहास, बीमारी को हराकर गोल्ड जीतने वाली कौन हैं भारतीय नायब सूबेदार नीरू ढांडा?

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के जींद की बेटी नीरू ढांडा ने वह कर दिखाया है, जिसे देश हमेशा याद रखेगा. जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में उन्होंने महिलाओं की ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. 75 साल के एशियन गेम्स के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय महिला खिलाड़ी ने इस खेल में अकेले दम पर सोना जीता हो. नीरू की यह जीत कोई तुक्का नहीं है. इसी साल जुलाई में उन्होंने इटली में हुए वर्ल्ड कप में भी गोल्ड मेडल जीता था और ऐसा करने वाली भी वह भारत की पहली महिला बनी थीं. लेकिन इस चमचमाती कामयाबी के पीछे एक साधारण किसान परिवार की बेटी की कड़ी मेहनत छुपी है. भारतीय सेना का कड़ा अनुशासन और खेल से ठीक पहले एक गंभीर बीमारी को हराकर मैदान पर वापसी करने का उनका जज्बा यह साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल आपको देश का नाम रोशन करने से नहीं रोक सकती. 

किसान पिता की बेटी और शिवपुरी का सफर

नीरू ढांडा का जन्म 25 मई 2000 को हरियाणा के जींद जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता खेती करते हैं और मां घर संभालती हैं. एक किसान के घर में पैसों की हमेशा तंगी रहती है, और शूटिंग जैसा महंगा खेल चुनना किसी बड़े सपने जैसा था, जहां बंदूक और कारतूसों पर लाखों का खर्च आता है.

बचपन में ही नीरू का परिवार हरियाणा छोड़कर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में आकर बस गया. घर के आर्थिक हालात ऐसे नहीं थे कि नीरू को महंगी बंदूकें और प्रैक्टिस के लिए कारतूस आसानी से मिल सकें. लेकिन सलाम है उनके माता-पिता को, जिन्होंने गरीबी को कभी नीरू के सपनों के आड़े नहीं आने दिया और अपनी क्षमता से बढ़कर अपनी बेटी का साथ दिया. 

कजिन भाई से प्रेरणा और टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने से की खेल की शुरुआत

नीरू के शूटिंग करियर की शुरुआत बहुत ही दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है. उन्हें निशानेबाजी में आने की प्रेरणा अपने ममेरे भाई लक्ष्य श्योराण से मिली, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल जीता था. भाई की इस सफलता को देखकर नीरू के मन में भी देश के लिए मेडल जीतने की इच्छा पैदा हुई.

शुरुआती दौर में उनके पास खुद की बंदूक तक नहीं थी. उनके भाई लक्ष्य ने ही उन्हें अपनी पहली गन उधार दी और शुरुआती मार्गदर्शन दिया. किसी प्रोफेशनल रेंज में जाने से पहले, बंदूक के जोरदार झटके को सहने की आदत डालने के लिए नीरू अपने घर पर ही परिवार की पुरानी दोनाली बंदूक से टिन के खाली डिब्बों पर निशाना लगाया करती थीं. इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी का ट्रायल पास किया, जहां से उनके करियर को एक सही दिशा मिली. 

कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस की बनीं नायब सूबेदार

नीरू ढांडा के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह भारतीय सेना का हिस्सा बनीं. जब भारतीय सेना ने महिलाओं को कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में शामिल करना शुरू किया, तब नीरू सेना में भर्ती हुईं. खेल में उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें सेना में नायब सूबेदार का सम्मानित पद दिया गया.

सेना में शामिल होने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के महू स्थित प्रतिष्ठित आमी मार्क्समैनशिप यूनिट (AMU) में शामिल किया गया. सेना के कड़े अनुशासन, बेहतरीन ट्रेनिंग सुविधाओं और सीनियर अफसरों के सहयोग ने नीरू की खेल प्रतिभा को पूरी दुनिया में चमका दिया. नीरू हमेशा गर्व से कहती हैं कि एक सैनिक के रूप में खेल का मैदान भी उनके लिए देश की सेवा करने का एक जरिया है.

एशियन गेम्स से 10 दिन पहले अस्पताल और H1N1 फ्लू का कहर

एशियन गेम्स 2026 में नीरू ढांडा की यह ऐतिहासिक जीत जितनी शानदार दिखती है, इसके पीछे का संघर्ष उतना ही दर्दनाक रहा है. एशियन गेम्स की शुरुआत से ठीक 10 दिन पहले नीरू गंभीर संक्रमण की चपेट में आ गईं, जिसके बाद उन्हें H1N1 (स्वाइन फ्लू) की आशंका के चलते 3 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था.

इस खतरनाक बीमारी के कारण वह एशियन गेम्स से पहले करीब साढ़े तीन हफ्ते तक कोई ट्रेनिंग या प्रैक्टिस नहीं कर पाईं. नई दिल्ली में लगे राष्ट्रीय कैंप के दौरान वह अपने कमरे में कैद थीं और वह लगातार पांच दिनों तक सिर्फ पानी पर जिंदा रहीं. इतनी गंभीर शारीरिक कमजोरी के बावजूद, जब वह जापान के नागोया में मैदान पर उतरीं, तो उनके हाथ में बंदूक और आंखों में सिर्फ देश का तिरंगा था. उन्होंने नागोया की कड़कड़ाती ठंड और बारिश के बीच अपनी नसों पर काबू रखा और इतिहास रच दिया.  

इंटरनेशनल लेवल पर कामयाबी और जीते हुए मेडल

नीरू ढांडा ने साल 2022 में ओसिजेक में आयोजित ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2025 (कजाकिस्तान): नीरू ने यहां महिला ट्रैप सूटिंग में व्यक्तिगत और टीम दोनों में गोल्ड मेडल जीतकर एशिया में अपनी बादशाहत कायम की थी.

ISSF वर्ल्ड कप 2026 (लोनाटो, इटली): नीरू ने इस प्रतियोगिता में 125 में से 121 का नेशनल रिकॉर्ड स्कोर बनाया और फाइनल में 27/30 का स्कोर कर फ्रांस की पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल को पछाड़कर गोल्ड मेडल जीता. वह इस स्पर्धा में वर्ल्ड कप गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.

एशियन गेम्स 2026 (नागोया, जापान): 29 सितंबर 2026 को हुए फाइनल में नीरू ने 30 में से 28 टारगेट पर सटीक निशाना लगाकर 28 अंकों का नया एशियन रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसी दिन उन्होंने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल भी भारत की झोली में डाला. 

जीत के बाद का मिशन और अगला बड़ा लक्ष्य

नीरू के सफर में सरकार की खेल योजनाओं (TOPS) से बड़ी आर्थिक मदद मिली. एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद नीरू ने अपना यह मेडल देश के वीर जवानों और दिग्गज शूटर राजा रणधीर सिंह को समर्पित किया है. महज 26 साल की उम्र में दुनिया में देश का डंका बजाने वाली सेना की इस जांबाज बेटी का अगला लक्ष्य लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में गोल्ड जीतना है. नीरू की कहानी सिखाती है कि पक्के हौसले से गरीबी को हराकर भी वर्ल्ड चैंपियन बना जा सकता है.

यह भी पढ़ें:  एशियन गेम्स 2026 में विथ्या रामराज का डबल धमाका, 400m हर्डल्स में ब्रॉन्ज के बाद अब 4x400m रिले में जीता गोल्ड मेडल

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पीएम-आरकेवीवाई के तहत 10 राज्यों को 1,200 करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी, कृषि विकास को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को 1,200 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय स्वीकृति पत्र सौंपे। सरकार का कहना है कि इस राशि से राज्यों में कृषि विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और तेज होगा तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

जारी राशि में पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपए, हरियाणा को 198 करोड़ रुपए, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपए, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपए, बिहार को 114 करोड़ रुपए, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपए, मिजोरम को 75 करोड़ रुपए, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपए, झारखंड को 58 करोड़ रुपए और पंजाब को 43 करोड़ रुपए शामिल हैं।

विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराकर यह भी सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का क्रियान्वयन बिना देरी के जमीन पर शुरू हो सके।

कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के बाद से देश की कृषि वृद्धि दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है। वहीं खाद्यान्न उत्पादन में औसत वार्षिक वृद्धि पहले लगभग 40 लाख टन थी, जो अब बढ़कर 84 लाख टन प्रति वर्ष हो गई है।

चौहान ने बताया कि केवल दो वर्षों में, यानी 2023-24 से 2025-26 के बीच, रबी खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड 205 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय कृषि की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

सहकारी संघवाद को और मजबूत बनाने के लिए उन्होंने एक नई समीक्षा व्यवस्था की घोषणा की। इसके तहत केंद्र की तरह राज्यों के साथ भी हर महीने वर्चुअल समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही राज्यों में कृषि मंत्री, कृषि सचिव, कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), एटीएमए और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को शामिल करते हुए एक मजबूत राज्य कृषि टीम गठित की जाएगी। जिला स्तर पर भी मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित होंगी।

मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए चौहान ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान चलाने की घोषणा की। इस अभियान में वैज्ञानिकों और अन्य प्रमुख हितधारकों की भागीदारी होगी। अभियान के दौरान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भूमि की उर्वरता और लाभकारी कीटों का संरक्षण किया जा सके।

उन्होंने पूर्वी भारत के राज्यों झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान की कटाई के बाद खाली पड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर दलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया।

रबी सीजन की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि फसलों और उन्नत बीजों के संबंध में सिफारिशें मिट्टी में उपलब्ध नमी और जल संसाधनों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में खाद और बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन राज्यों को नकली उर्वरक, फर्जी बीज और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें फसल कटाई के बाद प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण और आधुनिक विपणन प्रणाली को मजबूत करना शामिल है।

चौहान ने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जाएगी और किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर करने की व्यवस्था रहेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से उभर रहे नए अवसरों का लाभ उठाएगा। इसके जरिए भारतीय कृषि उत्पादों, फलों, सब्जियों और खाद्यान्न को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और भारत दुनिया की एक प्रमुख फूड बास्केट के रूप में उभर सकेगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

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