Asia Society में बोले S Jaishankar, US-Pakistan संबंधों और आतंकवाद पर स्पष्ट की भारत की नीति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींची। उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंध इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे भारत के पड़ोसियों से पनपने वाले सीमा-पार आतंकवाद को स्वीकार करते हैं या नहीं। इस बयान को हाल ही में अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों में आई मजबूती और नई दिल्ली-वॉशिंगटन के रिश्तों के संदर्भ में एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है। जयशंकर ने मंगलवार को यह बात कही। वे 'एशिया सोसाइटी' द्वारा आयोजित एक विशेष बातचीत कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों तथा नीति विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम सोमवार को UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र के 'हाई-लेवल वीक' के समापन के बाद आयोजित किया गया था। इस चर्चा का संचालन पूर्व अमेरिकी राजनयिक और 'एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के डिस्टिंग्विश्ड फेलो डैनियल रसेल ने किया।
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भारत-अमेरिका संबंधों और टैरिफ़ के मुद्दे पर जयशंकर
जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों की स्थिति के बारे में पूछा गया, खासकर पिछले एक साल में व्यापार और टैरिफ़ से जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर रास्ते पर लाने के लिए क्या ज़रूरी होगा। जयशंकर ने कहा मुझे लगता है कि अगर मैं पीछे हटकर संबंधों को देखूँ, तो मैं पाता हूँ कि दुनिया के ज़्यादातर देशों के अमेरिका के साथ संबंध मुश्किल रहे हैं। मेरा मतलब है कि यह कोई सांत्वना की बात नहीं हो सकती, लेकिन यह एक सच्चाई है।
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भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है
इसके बाद जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में हालिया सुधार का ज़िक्र किया, खासकर जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से। उन्होंने कहा कि हर देश की संवेदनशीलता में अंतर उन मुद्दों में से एक है जो द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए कहा भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है। हमें लगता है कि शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसे किसी पड़ोसी देश की सोची-समझी और जानबूझकर अपनाई गई नीति के तहत इतने दशकों तक उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा हो, जैसा हमने किया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत की चिंताओं को समझा या सराहा नहीं जाता है, तो इसका असर अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा अगर कोई ऐसी बात जो हमारे लिए बहुत मायने रखती है, उसे लेकर पर्याप्त समझ, सराहना या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे भी समस्या पैदा होती है। अगर मेरा साथी मेरी किसी मुख्य चिंता को पूरी तरह से नहीं समझता है, तो ज़ाहिर है कि इसका असर रिश्तों पर पड़ता है।
Rooppur Nuclear Plant: Pakistan ने रोका Airspace, अब नए रूट से डिलीवरी करेगा Rosatom
ऐसे समय में जब बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है, उसे एक कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए न्यूक्लियर फ्यूल ले जा रही एक रूसी फ्लाइट के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। बांग्लादेश के पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल की पहली खेप 24 सितंबर को पहुँचने वाली थी। यह समय इसलिए भी अहम है क्योंकि बांग्लादेश अपने पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट में जल्द से जल्द कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करना चाहता है, क्योंकि वह दशकों के सबसे बुरे एनर्जी संकट का सामना कर रहा है। ऐसे हालात में पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस की मंज़ूरी न देने से न्यूक्लियर फ्यूल की डिलीवरी में देरी हो सकती है और संभवतः प्लांट के ऑपरेशन शुरू होने के समय पर भी असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान ने एयरस्पेस से गुज़रने की मंज़ूरी नहीं दी।
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रूस की सरकारी न्यूक्लियर एनर्जी कंपनी 'रोसाटॉम' रूपपुर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और बांग्लादेश को यूरेनियम पहुंचाने की ज़िम्मेदारी भी उसी की है। बांग्लादेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फ़कीर महबूब अनाम ने माना कि पाकिस्तान ने मंज़ूरी नहीं दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस्लामाबाद की तरफ़ से इसकी कोई वजह नहीं बताई गई। रूसी फ़्लाइट को ढाका में उतरने से पहले अज़रबैजान, कज़ाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के ऊपर से गुज़रना था। मंत्री ने ANI को बताया फ्लाइट को पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं दी गई। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि पाकिस्तान ने एयरस्पेस की मंज़ूरी क्यों नहीं दी। बांग्लादेशी मीडिया की खबरों के मुताबिक, एयरस्पेस की मंज़ूरी न मिलने की बात आखिरी समय पर पता चली। हालांकि, बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन (BAEC) ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि किस देश ने एयरस्पेस की मंज़ूरी नहीं दी। विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव तौहिदुल इस्लाम ने कहा कि एयरपोर्ट पर सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, तभी अधिकारियों को रोसाटॉम (Rosatom) से पता चला कि उन्हें एयरस्पेस की मंज़ूरी नहीं मिली है।
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द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोसाटॉम ने अब एक वैकल्पिक रास्ते से डिलीवरी का नया शेड्यूल तय किया है। रूपपुर प्लांट के लिए न्यूक्लियर फ्यूल की शिपमेंट अब अक्टूबर में फिर से शुरू होगी। रोसाटॉम ने बांग्लादेश को भरोसा दिलाया कि प्रोजेक्ट के शेड्यूल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और कहा बांग्लादेश के लिए बाकी फ्यूल बैच दिसंबर तक सात अलग-अलग कार्गो उड़ानों से पहुंचेंगे। ढाका में पाकिस्तान हाई कमीशन ने इस घटना के पीछे तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतों का हवाला दिया। पाकिस्तानी दूतावास ने कहा पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को बहुत अहमियत देता है। इसलिए, इस मामले को सही तकनीकी संदर्भ में देखना ही उचित होगा, न कि ऐसी खबरों या बातों को बेवजह अहमियत दी जाए जो हमारे द्विपक्षीय रिश्तों को कमजोर करने के लिए इसे गलत तरीके से पेश करने की कोशिश कर सकती हैं।
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