Maharashtra का लोकप्रिय Traditional Snack है कोथिंबीर वड़ी, शाम की चाय के लिए ऐसे बनाएं
क्या आपने महाराष्ट्र का सबसे लोकप्रिय ट्रेडिशनल स्नैक कोथिंबीर वड़ी को खाया है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इस लेख में रेसिपी बताने जा रहे हैं। इसे लोग अक्सर चाय के साथ खाना काफी पसंद करते हैं। इसे बनाना काफी आसान है।
कोथिंबीर यानी खूब सारा ताजा धनिया, बेसन और मसालों को मिलाकर वड़ी बनाई जाती है। यह महाराष्ट्र के साथ ही गुजरात के कई हिस्सों में भी खाना जाने वाला एक पारंपरिक व्यंजन है।
कोथिंबीर वड़ी रेसिपी
यह डिश कोथिंबीर वड़ी को तलकर और भाप में पकाकर तैयार किया जाता है, इसे बनाना काफी आसान-
सामग्री
-2 कप बारीक कटा हरा धनिया
-1 कप बेसन
-1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
-1-2 बारीक कटी हरी मिर्च
-1 चम्मच तिल
-1/2 चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च
-1/2 चम्मच धनिया पाउडर
-1/2 चम्मच हल्दी
-1/4 चम्मच गरम मसाला
-1 चम्मच भुना हुआ जीरा
-1 छोटा चम्मच नींबू का रस
-आवश्यकतानुसार पानी
-तलने के लिए जरूरत अनुसार तेल
-स्वादानुसार नमक
कोथिंबीर वड़ी बनाने की विधि
- कोथिबीर वड़ी बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक बड़े कटोरे में 2 कप बारीक कटा हरा धनिया डालना होगा।
- इस बात का ध्यान रहे कि धनिया धोकर अच्छे से सुखा लें, क्योंकि उसमें नमी रहने पर बेसन ज्यादा लग जाता है।
- इसके बाद सूखे हुए धनिए में 1 कप बेसन मिला लें।
- अब इसमें 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 1-2 बारीक कटी हरी मिर्च और 1 चम्मच तिल भी डालें।
- इसके बाद 1/2 चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1/2 चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 चम्मच हल्दी, 1/4 चम्मच गरम मसाला, 1 चम्मच भुना हुआ जीरा और 1 छोटा चम्मच नींबू का रस डालें।
- एकदम लास्ट में स्वादानुसार नमक डालें और मिश्रण को अच्छे से बना लें।
- अब जरुरत के अनुसार, पानी डालकर एकदम नरम आटा गूंध लें।
- आटे को हाथ में लेकर बेलन आकार देना है और उसके बाद स्टीमर ट्रे में रखकर 15-20 मिनट के लिए भाप देकर पकाएं।
- फिर टूथपिक की मदद से चेक करें कि आटा पक गया है या नहीं।
- जब मिश्रण पकने के बाद इसे प्लेट में निकालकर ठंडा कर लें। इसके बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
- इसके बाद में तेल गर्म करें और उसमें टुकड़ों डालकर फ्राई करें।
- इनको आप बीच-बीच में चलाते रहें और जब वड़ी का रंग हल्का सुनहरा या भूरा होने लगे गैस से उतार लें।
- महाराष्ट्र का ट्रेडिशनल स्नैक कोथिंबीर वड़ी तैयारी है, इसे शाम की चाय के साथ परोसें।
Asia Society में बोले S Jaishankar, US-Pakistan संबंधों और आतंकवाद पर स्पष्ट की भारत की नीति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींची। उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंध इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे भारत के पड़ोसियों से पनपने वाले सीमा-पार आतंकवाद को स्वीकार करते हैं या नहीं। इस बयान को हाल ही में अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों में आई मजबूती और नई दिल्ली-वॉशिंगटन के रिश्तों के संदर्भ में एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है। जयशंकर ने मंगलवार को यह बात कही। वे 'एशिया सोसाइटी' द्वारा आयोजित एक विशेष बातचीत कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों तथा नीति विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम सोमवार को UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र के 'हाई-लेवल वीक' के समापन के बाद आयोजित किया गया था। इस चर्चा का संचालन पूर्व अमेरिकी राजनयिक और 'एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के डिस्टिंग्विश्ड फेलो डैनियल रसेल ने किया।
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भारत-अमेरिका संबंधों और टैरिफ़ के मुद्दे पर जयशंकर
जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों की स्थिति के बारे में पूछा गया, खासकर पिछले एक साल में व्यापार और टैरिफ़ से जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर रास्ते पर लाने के लिए क्या ज़रूरी होगा। जयशंकर ने कहा मुझे लगता है कि अगर मैं पीछे हटकर संबंधों को देखूँ, तो मैं पाता हूँ कि दुनिया के ज़्यादातर देशों के अमेरिका के साथ संबंध मुश्किल रहे हैं। मेरा मतलब है कि यह कोई सांत्वना की बात नहीं हो सकती, लेकिन यह एक सच्चाई है।
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भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है
इसके बाद जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में हालिया सुधार का ज़िक्र किया, खासकर जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से। उन्होंने कहा कि हर देश की संवेदनशीलता में अंतर उन मुद्दों में से एक है जो द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए कहा भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है। हमें लगता है कि शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसे किसी पड़ोसी देश की सोची-समझी और जानबूझकर अपनाई गई नीति के तहत इतने दशकों तक उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा हो, जैसा हमने किया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत की चिंताओं को समझा या सराहा नहीं जाता है, तो इसका असर अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा अगर कोई ऐसी बात जो हमारे लिए बहुत मायने रखती है, उसे लेकर पर्याप्त समझ, सराहना या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे भी समस्या पैदा होती है। अगर मेरा साथी मेरी किसी मुख्य चिंता को पूरी तरह से नहीं समझता है, तो ज़ाहिर है कि इसका असर रिश्तों पर पड़ता है।
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