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रोज सोने से पहले सिर्फ 5 मिनट करें ये पोज, न्यूट्रीशनिस्ट से जानें क्या फायदे मिलेंगे!

Healthy Habits: अगर आप रात में सोने से पहले सिर्फ 5-10 मिनट के लिए दीवारों के सहारे अपने पैर टिका कर ऊपर की तरफ रखते हैं, तो ये सिंपल सी पोजीशन आपकी बॉडी में कई बदलाव ले कर आती है।

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Weekly Lucky zodiacs: 26 जनवरी से 1 फरवरी तक 4 राशियों का समय वरदान से कम नहीं, होगा लाभ

Weekly Horoscope : ग्रहों की चाल से 26 जनवरी से 1 फरवरी का सप्ताह कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। आइए जानते हैं, 26 जनवरी से 1 फरवरी का सप्ताह क्या आपके लिए लकी साबित होगा या नहीं और वो भी कैसे-

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पंजाब की 12 वर्षीय डिंपी पहलवान में गजब का स्टेमिना:रोज करती है 8 घंटे जूडो-रेसलिंग की प्रैक्टिस, लगातार 40 किलोमीटर तक दौड़ने की क्षमता

पंजाब के लुधियाना की 12 साल की डिंपी पहलवान में गजब का स्टेमिना है। उसका स्टेमिना देखकर बड़े-बड़े रेसलर और कोच दंग रह जाते हैं। इतनी कम उम्र में रोजाना 8-8 घंटे जूडो और रेसलिंग की प्रैक्टिस करना आसान नहीं है। यही नहीं डिंपी पहलवान में इतना स्टेमिना है कि लगातार 30 से 40 किलोमीटर की दौड़ लगा देती हैं। लुधियाना के मायापुरी निवासी डिंपी पहलवान सीमित संसाधनों के बावजूद अंडर-14 जूडो और रेसलिंग में स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीत चुकी है। छोटी- बड़ी प्रतियोगिताओं को मिलाकर वो अब तक 40 से ज्यादा मेडल जीत चुकी है। डिंपी पहलवान का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद ओलिंपिक में खेलने का सपना देख रही हूं। डिंपी के पिता कृपा शंकर पल्लेदारी का काम करते हैं। उनकी आमदनी सीमित है, लेकिन बेटी के खेल सामान, ट्रेनिंग और डाइट के लिए वह हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। परिवार में पत्नी, मां और तीन बच्चे हैं। इतने बड़े परिवार का खर्च उठाने के साथ बेटी को जूडो और रेसलिंग की ट्रेनिंग दिलाना आसान नहीं है, फिर भी पिता रोज सुबह पांच बजे डिंपी को लेकर गुरुनानक स्टेडियम पहुंचते हैं, उसे प्रैक्टिस करवाते हैं। उनका सपना है कि वो रेसलिंग व जूडो में देश का प्रतिनिधित्व करे। लुधियाना से दौड़कर फतेहगढ़ साहिब पहुंची फतेहगढ़ साहिब में जब माता गुजरी और साहिबजादों का शहीदी मेला चल रहा था तो डिंपी पहलवान लुधियाना से फतेहगढ़ साहिब तक दौड़कर गई। हालांकि उन्हें भीड़ के कारण पहले खन्ना में रोक दिया था और फिर अगले दिन सुबह उसे फतेहगढ़ साहिब जाने दिया गया। दादी प्यार से कहती थी पहलवान डिंपी घर की बेटी बेटी है। जब पैदा हुई तो दादी ने उसे प्यार से पहलवान कहना शुरू किया। पिता पहलवानी करते थे। पिता को देखते- देखते चार साल की उम्र में पहलवानी करनी शुरू की। इसलिए उसका नाम डिंपी पहलवान ही पड़ गया। दस्तावेजों में भी उसका नाम डिंपी पहलवान है। सिलसिलेवार जानिए डिंपी पहलवान की कहानी... मेडल जीतने के बाद बढ़ा दी प्रैक्टिस डिंपी अब प्रोफेशनल जूडो खिलाड़ी व रेसलर बनाना चाहती है। इसलिए उसने बाकायदा अपना ट्रेनिंग शेड्यूल भी बेहद टाइट रखा है। दो गेम्स की प्रेक्टिस करना आसान नहीं है, लेकिन वो उसे भी आसान कर देती है और रोजाना 10-10 घंटे पसीना बहाती है। डिंपी का प्रैक्टिस शेड्यूल डिंपी के पिता कृपा शंकर ने बताया कि, सुबह पांच बजे गुरुनानक स्टेडियम पहुंच जाते हैं, जहां डिंपी प्रैक्टिस शुरू कर देती है। सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक दोनों खेलों की प्रैक्टिस करती है। घर आकर दोपहर 12 बजे स्कूल जाती है और दो से ढाई बजे के बीच में घर आ जाती है। तीन बजे फिर गुरुनानक स्टेडियम पहुंच जाती है। तीन बजे से शाम को आठ से साढ़े आठ बजे तक गुरुनानक स्टेडियम में प्रैक्टिस करती है। वहां पर जूडो व रेसलिंग के कोच उसे अब खेल की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं। इसके अलावा दिन में जब भी वक्त मिलता है तो वह धांधरा में जाकर मॉडर्न अप्रेटस वाले रिंग में जाकर जूडो व रेसलिंग की कोचिंग लेती है। स्कूल से मिल जाती है छुट्‌टी डिंपी की मेहनत को देखते हुए स्कूल टीचर्स ने भी उसे क्लास अटैंड न करने की छूट भी दी है। टीचर्स को पता है कि अगर डिंपी स्कूल नहीं आई है तो इसका मतलब वो कहीं पर रेसलिंग व जूडो की प्रैक्टिस कर रही होगी। डिंपी को रोजाना जल्दी छुट्‌टी दी जाती है ताकि वो गेम पर फोकस कर सके। अब तक जीत चुकी है 40 से ज्यादा मेडल डिंपी की उम्र सिर्फ 12 साल है, लेकिन उसका आत्मविश्वास और मेहनत किसी सीनियर खिलाड़ी जैसी है। सातवीं कक्षा में पढ़ते हुए उसने अंडर-14 स्टेट लेवल पर जूडो और रेसलिंग में मेडल जीतकर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। डिंपी ने बताया कि वो अब तक 40 से ज्यादा मेडल जीत चुकी है। देसी डाइट से बनी ताकत डिंपी के पिता कृपा शंकर ने बताया कि डिंपी पूरी तरह से वेजिटेरियन है। इसके अलावा उसको किसी भी तरह का बाजारू या महंगा सप्लीमेंट नहीं दिया जाता। उसकी पूरी डाइट देसी और साधारण है। उन्होंने बताया कि प्रोटीन के लिए काले छोले, मूंग की दाल, राजमा, दूध, दही और पनीर दिया जाता है जबकि कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति के लिए ड्राई फ्रूट्स व उबले हुए आलू दिए जाते हैं। छोटा भाई भी मैदान में चमक रहा डिंपी का छोटा भाई मोहित रुद्रा भी एथलेटिक्स में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। वह जिला स्तर पर रेस में गोल्ड मेडल जीत चुका है। परिवार में खेल का माहौल बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। प्रेरणा बनती डिंपी पहलवान डिंपी पहलवान की कहानी यह बताती है कि सीमित संसाधन भी अगर मजबूत इरादों के साथ जुड़ जाएं तो बड़ी कामयाबी की राह बन सकती है। छोटी उम्र में उसका अनुशासन, मेहनत और देश-समाज से जुड़ी सोच आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल है। पिता ने की सहयोग की अपील कृपा शंकर सरकार व अन्य लोगों से अपील की है कि अगर उनकी बेटी को पर्याप्त संसाधन मिल जाएं तो वो ओलिंपिक तक देश का नाम रोशन करने का साहस रखती हैं। उन्होंने अपील की है कि बेटी को आगे बढ़ाने के लिए उसकी मदद करें ताकि वो अपनी प्रैक्टिस वर्ल्ड क्लास संसाधनों के साथ कर सके। Mon, 26 Jan 2026 23:47:00

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