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क्या चीन में सबकुछ ठीक नहीं? शी जिनपिंग के सबसे करीबी जनरल ने दिया धोखा, अमेरिका से हाथ मिलाने के लगे आरोप

चीन की राजनीति और मिलिट्री के गलियारों में इस वक्त एक ऐसा तूफान आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. बीजिंग से आ रही खबरें इशारा कर रही हैं कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले जनरल झांग यूक्सिया अब बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं. यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं है, बल्कि इसमें देशद्रोह और अमेरिका के साथ मिलीभगत जैसे संगीन आरोप शामिल हैं.

कौन हैं जनरल झांग यूक्सिया और उनका कद क्या है? 

झांग यूक्सिया चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सबसे ताकतवर चेहरों में से एक रहे हैं. वह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन हैं, जिसका मतलब है कि सेना में शी जिनपिंग के बाद वह दूसरे सबसे बड़े पद पर थे. झांग के परिवार का इतिहास भी काफी रसूख वाला रहा है. उनके पिता झांग जोंगशुन माओ त्से तुंग के करीबी साथियों में गिने जाते थे. यही वजह थी कि शी जिनपिंग उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे. झांग को चीन की न्यूक्लियर मिसाइल फोर्स और मिलिट्री कमांड का मास्टरमाइंड माना जाता था. उनकी पकड़ चीन की रक्षा नीतियों और गुप्त हथियारों के डेटा पर बहुत गहरी थी. 

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियारों यानी न्यूक्लियर वेपन्स से जुड़ा बेहद कॉन्फिडेंशियल डेटा अमेरिका को लीक किया है. इसके बदले में करोड़ों की रिश्वत लेने की बात भी सामने आ रही है. अगर यह सच है, तो यह आधुनिक चीन के इतिहास का सबसे बड़ा जासूसी मामला साबित हो सकता है. सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि क्या अमेरिका चीन के भीतर सत्ता परिवर्तन यानी शासन बदलने की कोशिश कर रहा था? कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ने झांग जैसे बड़े अधिकारी को मोहरा बनाकर चीन की मिलिट्री पावर को अंदर से कमजोर करने की स्क्रिप्ट तैयार की थी. 

क्या चीन में सबकुछ ठीक नहीं? 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग ने हाल के समय में सेना के भीतर एक बड़ी सफाई मुहिम चला रखी है. वह अब तक 50 से ज्यादा बड़े सैन्य अफसरों को पद से हटा गए हैं. झांग जैसे करीबी पर कार्रवाई होना यह दिखाता है कि जिनपिंग को अपनी सत्ता पर खतरा महसूस हो रहा है और वह किसी भी कीमत पर गद्दारी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं. 

भारत के लिए इस उथल-पुथल के मायने

चीन की सेना में टॉप लेवल पर मची यह खलबली भारत के लिए बहुत अहमियत रखती है. जब भी चीनी सेना यानी PLA की लीडरशिप में अस्थिरता आती है, तो उसका सीधा असर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और हिंद महासागर की सुरक्षा पर पड़ता है. अगर चीन की मिलिट्री कमान कमजोर होती है या वहां सत्ता के लिए आपसी संघर्ष शुरू होता है, तो सीमा पर तनाव बढ़ सकता है. भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन अपनी अंदरूनी कलह से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए सीमा पर कोई उकसावे वाली हरकत कर सकता है. इसलिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर बीजिंग के हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर टिकी हुई है. 

झांग यूक्सिया क्यों हैं अहम? 

अगर झांग यूक्सिया जैसा व्यक्ति जांच के घेरे में आता है, तो चीन का पूरा मिलिट्री स्ट्रक्चर हिल जाता है. झांग की पकड़ न्यूक्लियर कमांड पर थी, जिसका मतलब है कि चीन की सबसे घातक मिसाइलों की चाबी उनके पास थी. अगर उन्होंने वाकई अमेरिका के साथ डेटा शेयर किया है, तो चीन की सालों की मेहनत और सुरक्षा रणनीति खतरे में पड़ जाएगी. शी जिनपिंग के लिए यह स्थिति बहुत नाजुक है, क्योंकि झांग को हटाने का मतलब है अपनी ही टीम के सबसे मजबूत स्तंभ को गिराना. 

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चावल या गेहूं, जानें कौन है सेहत के लिए फायदेमंद और हानिकारक?

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। गेहूं और चावल दोनों ही भारतीय थाली का मुख्य भोजन रहे हैं। दोनों के बिना भारतीय थाली अधूरी है, लेकिन चावल और गेहूं के बीच हमेशा सेहत को लेकर दो मत रहे हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि गेहूं ज्यादा फायदेमंद है, जबकि कुछ लोग चावल को गेहूं की तुलना में ज्यादा पौष्टिक मानते हैं। हालांकि आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि गेहूं और चावल दोनों ही सेहत के लिए खराब हो सकते हैं।

आयुर्वेद मानता है कि समस्या अनाज में नहीं, बल्कि रिफाइंड अनाज, गलत मात्रा और गलत तरीके से खाने में है। आधुनिक चावल और गेहूं दोनों के फायदे भी हैं और नुकसान भी। सही चुनाव, सही पकाने का तरीका और संतुलित थाली ही असली समाधान है, तो चलिए गेहूं और चावल दोनों के फायदे जानते हैं। पहले बात करते हैं गेहूं की।

गेहूं में हाई ग्लूटेन होता है, जो लंबे समय तक सेवन करने से मधुमेह और थायराइड जैसी बीमारियों को जन्म देता है। इससे पेट से जुड़े रोग भी होते हैं, क्योंकि ये आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को पनपने के लिए माहौल नहीं दे पाता है। दूसरा, आज के गेहूं में पोषक तत्वों की कमी होती है, खासकर जिंक और आयरन की। तीसरा, ज्यादा गेहूं का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जिससे रक्त में शुगर की मात्रा तेजी से बढ़ती है। लेकिन हां, गेहूं में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो ऊर्जा का बेहतरीन विकल्प है।

वहीं चावल की बात करें तो हर किस्म के चावल में हाई ग्लाइसेमिक का इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है, जो मोटापा और मधुमेह होने के चांस बढ़ा देता हैं। दूसरा, चावल के पौधे की जड़ में गेहूं के पौधे की तुलना में मिट्टी से पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता कम होती है। ऐसे में चावल में ज्यादा हानिकारक रसायन पाए जाते हैं। तीसरा, आजकल मिलने वाले पॉलिश किए हुए चावलों में आयरन, जिंक और बाकी पोषक तत्व नहीं होते हैं। चावल सिर्फ पचने में आसान होते हैं और एक सीमित मात्रा तक पेट के लिए सही हैं।

अब सवाल है कि खाएं क्या? स्वस्थ भोजन के लिए जीवन में तीन नियमों का पालन करना जरूरी है। पहला, भोजन को ठीक से पकाना। रोटी हो या चावल, दोनों को अच्छे से पकाना बहुत जरूरी है। चावल को कई बार धोएं और अच्छे से पकाएं, जबकि रोटी को आहार में सीमित करें। एक दिन में 2 से ज्यादा रोटियां का सेवन न करें। दूसरा, भोजन में बाकी अनाज को भी शामिल करें। सिर्फ चावल और गेहूं पर ही निर्भर न रहें। बाजरा, ज्वार और मक्का भी इस्तेमाल करें। तीसरा, अनाज की मात्रा कम और सब्जी की मात्रा थाली में ज्यादा रखें। धारणा है कि रोटी और चावल से ताकत और मजबूती मिलती है, लेकिन ये गलत है। ये सिर्फ अस्थायी ऊर्जा देते हैं, ताकत या मजबूती नहीं।

--आईएएनएस

पीएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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