CSK की जर्सी में फिर लौटेगा धोनी का सबसे भरोसेमंद सिपाही! जहीर खान का देगा साथ, IPL 2027 में बन सकता है बॉलिंग कोच
IPL 2027: चेन्नई सुपर किंग्स के फैंस के लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आ रही है. आईपीएल 2027 से पहले सीएसके अपने सपोर्ट स्टाफ में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है. साल 2014 में चेन्नई के लिए खेलते हुए पर्पल कैप जीतने वाले पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज मोहित शर्मा को CSK अपना नया बॉलिंग कोच नियुक्त कर सकती है. सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन की माने तो, टीम के नए हेड कोच जहीर खान ने खुद मोहित शर्मा के नाम की सिफारिश की है. इस फैसले के साथ ही चेन्नई सुपर किंग्स की टीम अपने कोचिंग स्टाफ में मजबूत भारतीय कोर तैयार कर रही है.
जहीर खान और मोहित शर्मा की नई जोड़ी
चेन्नई सुपर किंग्स ने हाल ही में भारतीय दिग्गज तेज गेंदबाज जहीर खान को अपना नया हेड कोच नियुक्त किया है. जहीर के आते ही टीम की गेंदबाजी रणनीति को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद थी. अब रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि सीएसके मोहित शर्मा को अपना नया बॉलिंग कोच बना सकती है. मोहित के आने से सीएसके का 'बॉलिंग थिंग टैंक' बेहद मजबूत हो जाएगा. जहीर और मोहित दोनों के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ आईपीएल का भी लंबा अनुभव है, जिसका सीधा फायदा चेन्नई के युवा तेज गेंदबाजों को मिलेगा.
???? MOHIT SHARMA TO CHENNAI SUPER KINGS ????
— Johns. (@CricCrazyJohns) September 29, 2026
- Mohit is likely to become the new bowling coach of CSK in IPL 2027. [Sahil Malhotra from TOI] pic.twitter.com/Gsga05zKJM
चेन्नई के साथ मोहित शर्मा का पुराना और सुनहरा रिश्ता
मोहित शर्मा के लिए चेन्नई सुपर किंग्स का परिवार कोई नया नहीं है. उन्होंने अपने आईपीएल करियर का सबसे सुनहरा सफर एमएस धोनी की कप्तानी में इसी टीम के साथ तय किया है. साल 2014 के आईपीएल में मोहित ने सीएसके के लिए घातक गेंदबाजी करते हुए 23 विकेट चटकाए थे और 'पर्पल कैप' जीतकर तहलका मचा दिया थ. मैदान पर माही को जब भी विकेट की तलाश होती थी, उनका भरोसा हमेशा मोहित शर्मा पर ही होता था.
स्लोअर और डेथ ओवरों की महारत से चमकेगा युवा अटैक
मोहित शर्मा को मुख्य रूप से उनकी जादुई 'बैक-ऑफ-द-हाथ' स्लोअर बॉल, कटीली नकल बॉल और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर डालने की महारत के लिए जाना जाता है. उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आईपीएल 2023 का सीजन था. आईपीएल 2022 में वह अनसोल्ड हो गए थे, लेकिन फिर उन्हें गुजरात टाइटंस की तरफ से खेलने का मौका मिला और उन्होंने आईपीएल 2023 के सीजन में 27 विकेट हासिल कर एक ऐतिहासिक और धमाकेदार वापसी की थी. उनकी इस जादुई गेंदबाजी ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि आधुनिक टी20 क्रिकेट की चाल और बल्लेबाजों के दिमाग को पढ़ने में उनका कोई तोड़ नहीं है.
एक खिलाड़ी से गुरु बनने का नया सफर
37 वर्षीय दिग्गज तेज गेंदबाज मोहित शर्मा ने दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखकर क्रिकेट के सभी प्रारूपों को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था. अपने लगभग 14 साल लंबे और शानदार क्रिकेट करियर में 120 आईपीएल मैच खेलने और 134 विकेट चटकाने वाले मोहित शर्मा ने एक खिलाड़ी के तौर पर मैदान पर हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया और अपनी गेंदबाजी की एक अमिट छाप छोड़ी. अब आईपीएल 2027 में मोहित शर्मा चेन्नई सुपर किंग्स के डगआउट में नजर आ सकते हैं, जहां वह चेपॉक के ऐतिहासिक मैदान पर 'येलो आर्मी' के गेंदबाजों को मैच जिताने वाली रणनीतियां समझाते और विकेट चटकाने के अनोखे गुर सिखाते हुए दिखाई देंगे. उनकी और जहीर खान की जोड़ी सीएसके में एक नई ऊर्जा भर सकती है.
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Explainer: SIR विवाद के बीच I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक: कौन आएगा कौन नहीं, CEC पर क्या होगी रणनीति?
Explainer: नई दिल्ली में 30 सितंबर को विपक्षी दलों के I.N.D.I.A. ब्लॉक की अहम बैठक होने जा रही है. बैठक ऐसे समय हो रही है जब चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है. विपक्षी दल इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर भी चर्चा कर सकते हैं.
बैठक में कई प्रमुख दलों के नेता शामिल होने की संभावना है, लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इसमें मौजूद नहीं रहेंगे. शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे. ऐसे में बैठक का एक अहम सवाल यह भी होगा कि अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक प्राथमिकताओं के बीच विपक्ष SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कितनी साझा रणनीति बना पाता है.
SIR और चुनाव आयोग का विवाद क्या है?
SIR मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है. इसके तहत मतदाता सूची को अपडेट करने, पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्र या मृत मतदाताओं जैसे रिकॉर्ड को हटाने की प्रक्रिया की जाती है.
मौजूदा विवाद सिर्फ मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है. विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जरूरत, नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. हाल में चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया.
विपक्ष इसे आयोग के भीतर मतभेद के तौर पर देख रहा है. दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने कामकाज और निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया है. इसी पृष्ठभूमि में 30 सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अखिलेश यादव बैठक में क्यों नहीं होंगे?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 30 सितंबर को दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं होंगे. पार्टी की ओर से बताया गया है कि वह लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा है कि अखिलेश पहले से तय कार्यक्रम के कारण बैठक में नहीं आ पाएंगे.
हालांकि, इस अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं. कुछ रिपोर्टों में इसे उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे से जुड़ी बातचीत के संदर्भ में देखा गया है.
लेकिन सपा की ओर से सार्वजनिक तौर पर अखिलेश की गैरमौजूदगी के लिए पहले से तय कार्यक्रम और चुनावी व्यस्तताओं का हवाला दिया गया है. इसलिए इसके राजनीतिक कारणों को तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा.सपा बैठक में अपने प्रतिनिधि को भेजेगी.
उद्धव ठाकरे ऑनलाइन जुड़ेंगे
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे. पार्टी सांसद संजय राउत के मुताबिक, पार्टी महाराष्ट्र में 2 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों में व्यस्त है.
ठाकरे गुट चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाले अन्य प्रदर्शनों के समर्थन में भी सामने आया है. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की ओर से 4 अक्टूबर को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च की घोषणा की गई है. इसी बीच CJP की ओर से 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को भी समर्थन देने की बात सामने आई है.
बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद माना जा रहा है. विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से हटाने की मांग पहले भी उठाई जा चुकी है.
इसके साथ संसद में उनके खिलाफ प्रस्ताव लाने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है. मार्च 2026 में लोकसभा के 130 सदस्यों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव नोटिस दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने उस नोटिस को स्वीकार नहीं किया था.
यहां एक संवैधानिक पहलू समझना जरूरी है. संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है. यानी केवल राजनीतिक मांग से सीईसी को पद से हटाया नहीं जा सकता, इसके लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया जरूरी होती है.
इसलिए 30 सितंबर की बैठक में अगर प्रस्ताव या संयुक्त करार्वाई पर चर्चा होती है, तो वह आगे की राजनीतिक और संसदीय रणनीति तय करने का चरण होगा, अपने आप में पद से हटाने का फैसला नहीं.
कौन-कौन से नेता पहुंच सकते हैं?
बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है. तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, आरजेडी की ओर से तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला और सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी के शामिल होने की जानकारी सामने आई है.
वाम दलों और दूसरे विपक्षी दलों की भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी चिंताएं हैं. ऐसे में बैठक का उद्देश्य सिर्फ एक बयान जारी करना नहीं, बल्कि अलग-अलग दलों के रुख को एक साझा राजनीतिक कार्यक्रम में बदलना भी हो सकता है.
केजरीवाल और AAP की क्या भूमिका है?
आम आदमी पार्टी I.N.D.I.A. ब्लॉक की पिछली बैठकों में कई बार अलग भूमिका में रही है. एमए बेबी के मुताबिक, उन्होंने अरविंद केजरीवाल को इस बैठक के लिए व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण नहीं दिया है. हालांकि, केजरीवाल ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर मजबूत अभियान की जरूरत बताई है और अपनी पार्टी के नेताओं से इस पर चर्चा करने की बात कही है.
महत्वपूर्ण यह है कि AAP और DMK ने 8 जून की पिछली बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन बाद में SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र पर दोनों दलों ने हस्ताक्षर किए थे. 30 जून को 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद की ओर से तत्कालीन CJI सूर्यकांत को भेजे गए पत्र में SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे.
इससे संकेत मिलता है कि किसी बैठक में मौजूद रहना और किसी खास मुद्दे पर संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा बनना हमेशा एक ही बात नहीं है.
I.N.D.I.A. ब्लॉक की अब तक की यात्रा
1. I.N.D.I.A. ब्लॉक की कहानी जून 2023 से शुरू हुई. 23 जून 2023 को पटना में विपक्षी दलों की पहली बड़ी बैठक हुई. नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह बैठक हुई. इसमें करीब 15 दल शामिल हुए और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता की रूपरेखा पर चर्चा हुई.
2. इसके बाद 17-18 जुलाई 2023 को बेंगलुरु में दूसरी बैठक हुई, जिसमें करीब 26 दल शामिल हुए. इसी दौर में विपक्षी गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. तय किया गया.
3. 31 अगस्त-1 सितंबर 2023 को मुंबई में तीसरी बैठक हुई. इसमें गठबंधन के समन्वय, अभियान, मीडिया, सोशल मीडिया और रणनीति से जुड़े ढांचे पर काम आगे बढ़ाया गया.
4. 19 दिसंबर 2023 को दिल्ली में चौथी बैठक हुई. इसमें सीट शेयरिंग, संयुक्त कार्यक्रम और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर प्रस्तावित किए जाने की खबर आई, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ.
5. 13 जनवरी 2024 को पांचवीं बैठक वर्चुअल हुई. इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का चेयरपर्सन बनाने पर सहमति बनी, जबकि सीट शेयरिंग और चुनावी तैयारी पर भी चर्चा हुई.
6. इसके बाद 1 जून 2024 को लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में बैठक हुई. 8 जून 2026 को दिल्ली में गठबंधन की एक और महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें SIR और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दे सामने रहे.
अब 30 सितंबर की बैठक क्यों अहम है?
30 सितंबर की बैठक I.N.D.I.A. ब्लॉक के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार मुद्दा सीधे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ा है. गठबंधन के सामने तीन स्तरों पर रणनीति बनाने की चुनौती होगी SIR को लेकर साझा राजनीतिक रुख, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर संयुक्त कार्रवाई और संसद के भीतर उठाए जाने वाले कदम.
साथ ही, अलग-अलग दलों की क्षेत्रीय प्राथमिकताएं भी इस बैठक में अहम रहेंगी. अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी, उद्धव ठाकरे का ऑनलाइन जुड़ना और AAP और DMK की अलग-अलग भागीदारी यह दिखाती है कि विपक्षी दल किसी मुद्दे पर साथ आ सकते हैं, लेकिन हर मंच पर उनकी भागीदारी एक जैसी नहीं है.
इसलिए 30 सितंबर की बैठक का वास्तविक महत्व केवल इसमें शामिल होने वाले नेताओं की सूची में नहीं, बल्कि बैठक के बाद सामने आने वाले साझा प्रस्ताव, संसदीय रणनीति और SIR के मुद्दे पर विपक्ष के अगले कदम में दिखाई देगा.
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