भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता 20 अक्टूबर से लागू, 100% भारतीय निर्यात पर नहीं लगेगा शुल्क
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक दोगुना करना है. इसके तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है.
खालसा वॉक्स न्यूज वेबसाइट के एक लेख के अनुसार, इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के वस्त्र और परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को मिलेगा. आयात शुल्क हटने से भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड में अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. इस समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है. दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा लक्ष्य भी निर्धारित किया है. एफटीए लागू होने के बाद इसके प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे. कुछ उत्पादों पर शुल्क तुरंत समाप्त हो जाएगा, जबकि कुछ श्रेणियों में शुल्क कई वर्षों में धीरे-धीरे कम किया जाएगा. कुछ कृषि उत्पादों के लिए कोटा और सुरक्षा उपाय भी बनाए रखे गए हैं.
भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव न्यूजीलैंड से आने वाले उत्पादों जैसे कीवी फल, सेब और मनुका हनी पर पड़ सकता है. हालांकि, समझौता भारतीय बाजार को पूरी तरह नहीं खोलता। सरकार ने डेयरी क्षेत्र और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को विशेष सुरक्षा प्रदान की है. समझौते के तहत भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है. कुछ उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खालें शामिल हैं. कृषि उत्पादों के मामले में भारत ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था अपनाई है, जिसके तहत सीमित मात्रा में आयात कम शुल्क पर किया जा सकेगा, जबकि अधिक आयात पर सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे. इससे बाजार पहुंच और घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है.
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कीवी फल इस व्यवस्था के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल है। समझौते के पहले वर्ष में न्यूजीलैंड से 6,250 टन कीवी फल शुल्क-मुक्त आयात किए जा सकेंगे. यह सीमा छठे वर्ष तक बढ़कर 15,000 टन हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू रहेंगी. इसी तरह सेब के लिए भी कोटा तय किया गया है। हालांकि इन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो वर्तमान 50 प्रतिशत शुल्क का आधा है. यहां भी न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू होंगी. इससे भारतीय फल उत्पादकों पर सस्ते आयात का प्रभाव सीमित रखने का प्रयास किया गया है. समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी क्षेत्र को कम शुल्क वाले आयात के लिए नहीं खोला है. सरकार ने करोड़ों छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए डेयरी सहित कई कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.
INPUT: IANS
Thailand Flood: थाईलैंड में बाढ़ ने मचाई तबाही, अब तक 23 की मौत, राजधानी में 7 लाख लोग प्रभावित
Thailand Flood: थाईलैंड में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने देश भर में तबाही मचा दी है. सरकार ने मंगलवार को बाढ़ से जुड़ी जानकारी दी. सरकार के अनुसार, थाईलैंड की राजधानी में बाढ़ की वजह से मंगलवार को चार और लोगों की मौत हो गई है. इन चार लोगों की मौत को मिलाकर थाईलैंड में अब तक मरने वाले लोगों की कुल संख्या 23 हो गई है. अकेले बैंकॉक शहर में बाढ़ से करीब 7 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
बैंकॉक में 230 से अधिक शेल्टर होम्स
बैंकॉक में लगातार 48 घंटे तक इतनी तेज बारिश हुई है कि 3 दिन बाद भी कुछ हिस्सों में पानी भरा रहा. भारी बारिश की वजह से शहर में आपदा घोषित किया गया है. स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा, बैंकॉक में 230 से अधिक शेल्टर होम खोले गए हैं, जिसमें 7 हजार से अधिक लोग रहने को मजबूर हैं. थाईलैंड के 77 प्रांतों में से 29 प्रांत बाढ़ से प्रभावित हैं.
#Bangkok remains flooded#Thailand’s flood death toll has reached 23, with 29 provinces affected & thousands in shelters.
— ⚡️???? World News ????⚡️ (@ferozwala) September 29, 2026
▪️8 people have died in Bangkok following heavy rainfall and widespread flooding, according to a government announcement on Tuesday, bringing the number of… pic.twitter.com/jSnOtURha5
बैंकॉक से बाढ़ की तस्वीरें सामने आईं हैं, जिसमें गाडियां पूरी तरह से डूबी दिखाई दे रहीं हैं. स्वर्ण भूमि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुईं हैं. बाढ़ की वजह से बैंकॉक सहित देश के प्रमुख शहरों की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है.
राहत और बचाव कार्य जारी
बता दें, थाईलैंड में सितंबर माह में सबसे अधिक बारिश होती है. हालांकि, राजधानी के रहने वाले लोगों का कहना है कि इस साल आई बाढ़ पिछली बाढ़ों की तुलना में सबसे ज्यादा गंभीर लग रही है. बता दें, बैंकॉक शहर दलदली जमीन पर बसा हुआ है. यहां नहरों का जाल बिछा हुआ है. बारिश की वजह से इनमें से कई नहरें ऊफान पर आ जाती हैं और शहर बाढ़ की जद में आ जाता है.
Bangkok was declared a city-wide disaster zone after up to 300 mm of rain in 48 hours flooded at least 37 key locations. All 50 districts faced emergency measures, disrupting roads, flights, schools and businesses. pic.twitter.com/vkFMu5EcKj
— HINT News (@9415st) September 29, 2026
शहर से पानी निकालने में लगेगा कम से कम एक सप्ताह
इसके अलावा, पंपिंग स्टेशन पिछले कई दिनों से अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं. बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट ने रविवार को बताया था कि पानी को पूरी तरह से निकलने में एक सप्ताह तक का वक्त लग सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ेगी.
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