वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार
नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितता और तनाव के बीच सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है और इसने नया रिकॉर्ड बना लिया है।
सुरक्षित निवेश वाली कीमती धातु सोना कारोबार के दौरान 5,026 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि चांदी पहली बार 102 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। जनवरी 2024 में सोने का भाव 2,000 डॉलर प्रति औंस से थोड़ा ऊपर था।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे हम 2026 में आगे बढ़ रहे हैं, कीमती धातुएं यानी सोना और चांदी मजबूत तेजी वाले बाजार में कारोबार कर रही हैं, और बीच-बीच में थोड़ी गिरावट के बावजूद इनकी तेजी की रफ्तार कायम है।
विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा स्थिति कमजोरी की नहीं बल्कि कीमतों के स्थिर होने की है। लॉन्ग टर्म के मजबूत कारणों का असर शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव से ज्यादा है।
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थटेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर. ने कहा कि सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक स्तर पर नरम मौद्रिक नीतियों की उम्मीदें कीमतों को मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिन स्तरों पर रेजिस्टेंस रहता था, अब वहीं मजबूत मांग देखने को मिल रही है, जिससे बाजार की मजबूती और बढ़ी है।
चांदी ने इस तेजी में सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। कॉमेक्स सिल्वर 100 डॉलर के पार चली गई है और नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी की खासियत यह है कि यह निवेश के साथ-साथ उद्योगों में भी इस्तेमाल होती है। इसी वजह से चांदी की मांग ज्यादा मजबूत दिख रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी अफवाहों या सट्टेबाजी की वजह से नहीं, बल्कि मजबूत आर्थिक कारणों से आई है।
आने वाले समय में, खासकर 2026 की पहली तिमाही और उसके बाद भी सोने और चांदी का भविष्य मजबूत बना हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि कम आपूर्ति, निवेश और उद्योग दोनों की मांग और दुनिया में नकदी की उपलब्धता कीमतों को आगे भी सहारा देगी। अगर थोड़े समय के लिए कीमतों में गिरावट आती भी है, तो वह ज्यादा नहीं होगी और निवेशक इसे खरीद का मौका मान सकते हैं।
चांदी में आगे भी बेहतर प्रदर्शन की संभावना है, जबकि सोना आर्थिक और वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव का सबसे भरोसेमंद साधन बना हुआ है।
सोना और चांदी दोनों को केंद्रीय बैंकों की खरीद, मुद्राओं में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे वैश्विक कारणों से फायदा मिल रहा है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पद्म भूषण मिलने पर उदय कोटक बोले-भारत को और महान बनाने का लंबा सफर अभी बाकी
नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अनुभवी बैंकर और उद्योगपति उदय कोटक ने सोमवार को कहा कि पद्म भूषण सम्मान मिलने पर वह खुद को विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
सरकार ने रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिसमें वित्तीय क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए उदय कोटक को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, आज का भारत उस भारत से बिल्कुल अलग है, जिसमें मेरा जन्म हुआ था। यह सफर बहुत रोमांचक रहा है। इस गणतंत्र दिवस पर हम कई रास्तों के चौराहे पर खड़े हैं।
उन्होंने कहा, मैंने कर्म का रास्ता चुना है, जिसमें सावधानी भी है, आगे बढ़ने की इच्छा भी है और जमीनी हकीकतों को समझने की समझ भी है। मुझे पूरा भरोसा है कि हम सभी मिलकर भारत को और महान बनाएंगे। हमें अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।
पद्म भूषण सम्मान के जरिए भारतीय बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था में उदय कोटक के लंबे और गहरे प्रभाव को पहचाना गया है। साथ ही, आर्थिक उदारीकरण के बाद एक मजबूत और भरोसेमंद निजी वित्तीय संस्था बनाने में उनकी भूमिका को भी सम्मान मिला है।
उदय कोटक की यात्रा को भारत के वित्तीय क्षेत्र की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक माना जाता है। 1990 के शुरुआती वर्षों में कोटक फाइनेंस ने ऑटो लोन, निवेश बैंकिंग और शेयर ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों में काम बढ़ाया, जब भारत की अर्थव्यवस्था खुल रही थी।
1991 के आर्थिक उदारीकरण ने निजी वित्तीय संस्थानों के लिए नए मौके पैदा किए। जब उदय कोटक ने अपना काम शुरू किया, तब वह किसी बड़े कारोबारी परिवार से नहीं थे और न ही उन्हें बड़े निवेशकों का सहारा मिला था।
शुरुआत में कई लोग नई कंपनी को पैसा देने से हिचकिचाते थे। इन चुनौतियों के बावजूद उदय कोटक ने ईमानदारी, पारदर्शिता और कम जोखिम वाले कर्ज के सिद्धांतों पर अपना कारोबार खड़ा किया।
उनके फैसले जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिए जाते थे। कंपनी की शुरुआती तरक्की परिवार और दोस्तों से लिए गए 30 लाख रुपए के कर्ज से शुरू हुई, जिससे बिल डिस्काउंटिंग का कारोबार शुरू किया गया।
समय के साथ यही छोटी शुरुआत आगे चलकर भारत के सबसे बड़े निजी बैंकिंग समूहों में से एक की मजबूत नींव बन गई।
--आईएएनएस
डीबीपी/वीसी
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