ऊंची बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितताओं से कीमती धातुओं पर दबाव, सोने-चांदी में 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट
मुंबई, 29 सितंबर (आईएएनएस)। ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के चलते मंगलवार के सत्र में सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोनों कीमती धातुओं में 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बुलियन बाजार पर दबाव बना रहा।
एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 487 रुपए या 0.33 प्रतिशत गिरकर 1,48,410 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोना 747 रुपए या 0.50 प्रतिशत टूटकर 1,48,150 रुपए के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं इसका दिन का उच्चतम स्तर 1,49,034 रुपए रहा।
दूसरी ओर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में अधिक दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान चांदी 2,942 रुपए या 1.29 प्रतिशत गिरकर 2,24,500 रुपए प्रति किलोग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गई। बाद में यह 2,104 रुपए या 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,25,338 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के कारण आई। इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों को कम आकर्षक बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड दबाव में रहा। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जिससे यह सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वॉशिंगटन के साथ किसी समझौते की संभावना को लेकर निराशा जताई है।
यह स्थिति तब और जटिल हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने संबंधी ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों के बजाय यील्ड-आधारित निवेशों की ओर बढ़ा है।
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए निकट अवधि में 1,50,000 से 1,50,700 रुपए का स्तर पहला प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र है। इसके ऊपर 1,52,000 से 1,52,600 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं नीचे की ओर 1,48,000 से 1,47,300 रुपए का दायरा प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र है। यदि सोना 1,48,000 रुपए के नीचे मजबूती से फिसलता है, तो इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है।
वहीं, चांदी के लिए 2,27,000 से 2,28,000 रुपए प्रति किलोग्राम का स्तर निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) माना जा रहा है। इसके ऊपर अगला प्रतिरोध 2,32,000 से 2,33,000 रुपए के क्षेत्र में है। वहीं नीचे की ओर 2,24,000 से 2,23,000 रुपए और उसके बाद 2,20,000 से 2,19,000 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों में रुख सतर्क से नकारात्मक बना हुआ है। सोने को मजबूती के संकेत देने के लिए 1.50 लाख रुपए के ऊपर टिकना होगा, जबकि चांदी के लिए 2.28 लाख रुपए का स्तर पार करना जरूरी होगा। दूसरी ओर, समर्थन स्तरों के टूटने पर दोनों धातुओं में और गिरावट की आशंका बनी रहेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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योगी सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा एक्शन, भूखंड घोटाले के दोषी सीनियर PCS अधिकारी को किया बर्खास्त
UP News: योगी सरकार राज्य में विकास परियोजनाओं से जहां गरीबों को राहत पहुंचा रही है तो वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति भी अपना रही है. इस बीच योगी सरकार ने सोमवार देर रात भ्रष्टाचार के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की. दरअसल, योगी सरकार ने वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को नोएडा में 4000 करोड़ रुपये के भूखंड घोटाले के मामले में बर्खास्त कर दिया.
सरकार ने जारी किया आदेश
बता दें कि हरीश चंद्र वर्तमान में कोलकाता में स्थानिक प्रतिनिधि खाद्य एवं रसद विभाग के पद पर तैनात हैं. उनकी बर्खास्तगी के संबंध में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने आदेश जारी कर दिया है.
जानें क्या है पूरा मामला?
वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र पर नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (NOIDA) में तैनाती के दौरान शाहदरा गांव के सेक्टर 140-A, 141, 142 और 143 में प्राधिकरण की तरफ से अर्जित और कब्जा प्राप्त 381527 वर्ग मीटर भूमि के लिए नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगा था. उनपर नियमों के विपरीत लीज बैक कर गंभीर अनियमितता के आरोप में 27 सितंबर 2013 को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मेरठ के कमिश्नर को जांच सौंपी गई थी.
जांच में क्या आया सामने?
इस जांच रिपोर्ट में सामने आया कि नियमों के विपरीत जाकर लीज बैक कर गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार किया गया. बता दें कि नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान शहदरा की आबादी निस्तारण के लिए सर्वे कराया गया था. इसके लिए आबादी का निर्धारण सेटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना चाहिए था, लेकिन फैक्ट्स को छिपाने के लिए सेटेलाइट इमेज का इस्तेमाल ही नहीं किया गया. जो सर्वे आख्या पेश की गई उसमें भी कई भू-मालिक, प्राइवेट कंपनियों और गांव के बाहर के लोगों को भी शामिल किया गया था. अनियमित तरीके से आवंटित की गई जमीन का समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का भी उल्लेख नहीं किया गया.
वहीं लीज बैक के लिए डीएम, एसएसपी की सदस्यता वाली समिति, प्राधिकरण बोर्ड और अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष तथ्यों को छिपाते हुए भ्रामक आख्या प्रस्तुत की गई थी, जिससे लीज बैक शाहदरा के बाहर के व्यक्तियों और प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के पक्ष में कराई जा सके. उसके बाद समिति को भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर लगभग 400447 वर्ग मीटर भूमि जिसका बाजार मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपए था. इसे अनियमित तरीके से भू-माफिया से साठगांठ कर आवंटित कर दिया गया.
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मामले में दोषी पाए गए वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी
इस मामले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी ने वास्तविक तथ्यों को छिपाया और नियमों के विपरीत जानबूझकर भ्रामक आख्या प्रस्तुत की, साथ ही स्वयं व संबंधित निजी पक्षकारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से करीब 4000 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है. जांच में पाया गया कि तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया. राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की तरफ से कुलदीप शर्मा पुत्र भूलेराम के स्थान पर तथ्यों को छिपाते हुए सिर्फ कुलदीप शर्मा का नाम सर्वे में दर्ज किया गया.
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