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जम्मू-कश्मीर से महाराष्ट्र और केरल तक मानसून का कहर: बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त

पूरे देश में मानसून का विकराल रूप देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और घर ढह रहे हैं. महाराष्ट्र में बाढ़ से खेत और घर जलमग्न हैं, वहीं झरने पर रील बनाने के चक्कर में एक युवक की जान चली गई. केरल भी जलभराव से बेहाल है. प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, साथ ही सुरक्षा बरतने की अपील कर रहा है.

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Rajya Sabha में MSME Bill पर चर्चा, सदस्यों ने बेरोजगारी दूर करने में बताई अहम भूमिका

नयी दिल्ली, तीन अगस्त देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए सोमवार को राज्यसभा में सदस्यों ने कहा कि यह क्षेत्र बेरोजगारी दूर करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उच्च सदन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 में चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा की सुमित्रा वाल्मीक ने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का हमारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है और यह विधेयक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बचत के माध्यम से आज लघु उद्योग आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना आज वरदान साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं है बल्कि करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को सालाना लाखों रुपये कमाने वाली और रोजगार देने वाली बनाना है।

यह विधेयक सदन में 28 जुलाई को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम माझी ने पेश किया था। तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने कहा कि एमएसएमई की मदद से बेरोजगारी दूर की जा सकती है। ‘‘आज बेरोजगारों की तो बात छोड़िये, रोजगार वाले भी सुरक्षित नहीं है और सत्ता पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं आता।’’ उन्होंने कहा कि यह विधेयक सरकार ला तो रही है लेकिन वह साथ ही निजीकरण और कारपोरेटाइजेशन को बढ़ावा भी दे रही है।

बीजद के डॉ संतृप्त मिश्रा ने कहा कि जीडीपी में एमएसएमई का 35 फीसदी योगदान रहता है लेकिन इसकी राह आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि मूल विधेयक 2006 में आया था और बीस साल बाद इसका संशोधन आया है। ‘‘इस दौरान एमएसएमई क्षेत्र में बहुत बदलाव हो चुका है।

विधेयक में बड़ी चुनौतियों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।’’ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्लाबाबू राव ने कहा कि विधेयक में मध्यस्थता और फैसलों के त्वरित निपटारे के लिए नए नियम तय किए गए हैं जो सराहनीय कदम है लेकिन इन नियमों का पालन भी जरूरी है अन्यथा न्याय मिलने में देर होगी। अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै ने कहा कि देश के विकास के लिए एमएसएमई जरूरी है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि वह तमिलनाडु में एमएसएमई कार्यक्रम को सहयोग दे।

राकांपा के राजेंद्र हीरालाल जैन ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि एमएसएमई हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह विधेयक उसे शक्ति प्रदान करेगा। ‘‘यह विधेयक विकसित भारत के संकल्प का दस्तावेज है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संवर्धन एवं विकास को सुगम बनाना है। उन्होंने चावल उत्पादन क्षेत्र में बिजली की दरें घटाने या इसके लिए सब्सिडी दिए जाने की मांग की।

तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इस विधेयक के जरिये 2006 के मूल कानून में कई संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जो लघु कंपनियों के लिए सुचारू व्यावसायिक संचालन को बढ़ाने पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में यह अनिवार्य किया गया है कि मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने के 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता संबंधी निर्णय जारी किए जाएं, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े विवादों का तेजी से समाधान सुनिश्चित हो सके। बीआरएस के रविचंद्र वद्दीराजू ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा किप्रस्तावित विधेयक मध्यस्थता और मध्यस्थता कार्यवाही को ऑनलाइन माध्यमों से संचालित करने की अनुमति देता है, जिससे विवादों का समाधान तेजी से, अधिक सुलभ और कुशल तरीके से हो सकेगा।

उनके अनुसार, इन मानदंडों का उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों को कम करना और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बकाया वसूली को बढ़ाना है। बसपा के रामजी ने कहा कि विधेयक में उन बच्चों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है जो एमएसएमई सेक्टर में काम कर रहे हैं। उन बच्चों को स्कूल जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार कमजोर वर्ग के लोगों को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने पर विचार करे। चर्चा में यूपीएल (एल) के प्रमोद बोरो, भाजपा के संजय सेठ, कांग्रेस के नीरज डांगी, प्रवीण चक्रवर्ती और बीजद की सुलता देव ने भी हिस्सा लिया।

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  Sports

गुस्से और बदले की आग में जल रहे बेन स्टोक्स का क्या है अगला प्लान? इंग्लैंड टीम को लेकर जाहिर कर दिए इरादे

ben stokes england coaching: इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने कहा है कि भविष्य में वह इंग्लैंड टीम के हेड कोच बनना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने जो रूट को दोबारा टेस्ट कप्तान बनाए जाने को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है. स्टोक्स ने अपने आखिरी टेस्ट मैच के बाद भी कहा था कि उनके डिप्टी हैरी ब्रूक को ही अगला टेस्ट कप्तान बनाया जाना चाहिए. अब उन्होंने एक बार फिर इसी बात को दोहराया है. Tue, 4 Aug 2026 18:32:47 +0530

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