Justice Devendra Kumar Upadhyaya: Supreme Court कॉलेजियम ने की पदोन्नति की सिफारिश
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश के साथ ही वह पिछले 25 वर्षों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से शीर्ष अदालत पहुंचने वाले दूसरे न्यायाधीश बन गए हैं। न्यायमूर्ति उपाध्याय की शीर्ष अदालत के लिए सिफारिश उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने लखनऊ में ही अपने कानूनी और न्यायिक करियर की शुरुआत की तथा लखनऊ पीठ में 11 वर्ष से अधिक समय तक न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं।
अधिवक्ता रितिका सिंह सिसोदिया ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति उपाध्याय पिछले 25 वर्षों में लखनऊ पीठ से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने वाले दूसरे न्यायिक अधिकारी हैं। उनसे पहले न्यायमूर्ति बृजेश कुमार को वर्ष 2000 में उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।’’ दिल्ली उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय का जन्म 16 जून 1965 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मुस्कराई गांव में हुआ था। उन्होंने 1991 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और 11 मई 1991 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।
उन्होंने अपने पिता आर.ए. उपाध्याय के चैंबर से वकालत शुरू की। इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ताओं मोहम्मद आरिफ खान और एस.के. कालिया के साथ भी काम किया। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने मुख्य रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में दीवानी और संवैधानिक मामलों की पैरवी की।
मई 2007 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया। नवंबर 2011 में उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने तक उन्होंने इस पद पर सेवाएं दीं। उन्होंने 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
28 मार्च 2023 को उन्हें लखनऊ पीठ का वरिष्ठ न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 29 जुलाई 2023 को उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। जनवरी 2025 में न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और उन्होंने 21 जनवरी 2025 को पद की शपथ ली।
उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने सोमवार को तीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की। इनमें गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह भी शामिल हैं। यह सिफारिश सोमवार को हुई कॉलेजियम की बैठक में की गई।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा बैठक में शामिल थे। कॉलेजियम की सिफारिश पर अब उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई की जाएगी।
Mysuru Dasara में सैन्य झांकियों और Air Show के लिए DK Shivakumar ने Rajnath Singh से मांगा सहयोग
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर मैसूरु दशहरा उत्सव के दौरान तीनों सैन्य बलों की झांकियों और औपचारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का अनुरोध किया। उन्होंने इस साल 21 अक्टूबर को होने वाले उत्सव के दौरान एक ‘एयर शो’ आयोजित करने का भी अनुरोध किया। शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केंद्र ने इन अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में कई प्रमुख शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्रभावित कर रहे भूमि संबंधी मुद्दों के समाधान और मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए रक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने शहर के लिए स्थायी सार्वजनिक पार्क और हरित क्षेत्र के रूप में इबलुर फायरिंग रेंज के पास स्थित करीब 730 एकड़ सैन्य भूमि को विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने सुझाव दिया है कि इस भूमि का इस्तेमाल केवल पार्क के रूप में किया जाए, इसमें कोई व्यावसायिक विकास नहीं हो और इसका स्वामित्व रक्षा अधिकारियों के पास ही रहे।’’ शिवकुमार ने सेना की करीब 43.838 एकड़ जमीन पर स्थित 10 अधिसूचित झुग्गी बस्तियों के लिए व्यावहारिक समाधान की मांग की।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से भी मुलाकात करके कई अहम जल संसाधन परियोजनाओं के लिए जल्द मंजूरी दिए जाने का अनुरोध किया। इनमें 16,745 करोड़ रुपये की ‘मेकेदातु बैलेंसिंग जलाशय’ और पेयजल परियोजना भी शामिल है। शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि राज्य की पेयजल, सिंचाई और सूखे से निपटने की जरूरतों को पूरा करने तथा कर्नाटक को जल संसाधनों में अपना वाजिब हिस्सा इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने के लिए पानी से जुड़े लंबित मामलों पर समय पर फैसले लेना जरूरी है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









