Pitru Paksha 2026 Tritya Shradh: आज पितृ पक्ष का तृतीया श्राद्ध है, जानें पिंडदान और श्राद्ध का उत्तम मुहूर्त
Pitru Paksha 2026 Tritya Shradh: पितृपक्ष अवधि की शुरुआत हो चुकी है. इस श्राद्ध के दिन उन दिवंगतों का तर्पण और पिंडदान किया जाएगा, जिनती मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार, तृतीया को हुआ था. यह तिथि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों की हो सकती है. पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए आज के दिन तृतीया तिथि पर गुजरे लोगों का श्राद्ध किया जाता है. श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्म कुतुप काल में किए जाते हैं. ये सभी कार्य आपको किसी योग्य ब्राह्मण की देखरेख में किए जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण मिलने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है.
आज है तृतीया श्राद्ध
आज यानी 29 सितंबर को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है. इस तिथि का प्रारंभ 28 सितंबर को रात 7 बजकर 13 मिनट पर हुआ था और आज शाम 5:09 पर समाप्त होगी. इसलिए, उदयातिथि के आज तृतीया तिथि का श्राद्ध मंगलवार के दिन किया जा रहा है.
आज के लिए श्राद्ध व तर्पण का मुहूर्त
हमें पितृपक्ष में पूर्वजों का पिंडदान दोपहर के समय करना चाहिए. पिंडदान या श्राद्ध के लिए यह अवधि शास्त्र सम्मत मानी जाती है. तर्पण करने के लिए कुतुप वेला को सबसे उत्तम माना जाता है. आज, 29 सितंबर 2026 को कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12:35 तक रहेगा. इस बीच पिंडदान करना शुभ होगा. हालांकि, कुतुप वेला का समय अलग-अलग शहरों में अलग भी हो सकता है. इसलिए, अपने शहर के पंचांग के अनुसार, समय सुनिश्चित कर लेना चाहिए.
तृतीया तिथि पर श्राद्ध की विधि
द्रिक पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि पर श्राद्ध करने के लिए चावल, आटे या जौ से पिंड बनाए जाते हैं. इन पिंडों को ही पितरों को अर्पित करना होता है. पिंडदान करने के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का श्राद्ध किया जाता है. पितरों का तर्पण करने के दौरान हाथ में कुशा जरूर रखें. इसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण करें. श्रााद्ध के बाद जरूरतमंद ब्राह्मणों की सेवा करनी चाहिए और उन्हें भोजन करवाने के साथ दक्षिणा भी दें. अंत में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.
जीव-जंतुओं के लिए जरूर निकाले अंश
श्राद्ध करते समय आपको भोजन में से गाय, कुत्तों, कौवों और चींटियों के लिए भी अंश निकालना होता है. धार्मिक मान्यता है कि इन जीवों के माध्यम से ही हमारे पितरों को भोजन प्राप्त होता है और वे प्रसन्न होते हैं. इससे पितृ दोष भी नहीं लगता है और उनकी आत्मा को भी शांति मिलती है.
तृतीया श्राद्ध पर किन बातों का ध्यान रखें?
- पितृपक्ष में श्राद्ध के दिन कुछ खास बातों का ख्याल रखना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान घर में सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद, क्रोध या अपशब्दों को बोलने से बचना चाहिए. श्राद्ध कर्म श्रद्धा और शांत मन से करना शुभ माना जाता है.
- श्राद्ध के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और अन्य तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, खाने में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल भी न करना चाहिए. पितरों के निमित्त बनाए गए भोजन को पहले भगवान और पितरों को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण करने की मान्यता भी है.
- पितृ पक्ष की अवधि के दौरान बाल और नाखून काटने, अनावश्यक खरीदारी करने और शुभ मांगलिक कार्यों को करने से भी कई धार्मिक परंपराओं में परहेज किया जाता है. हालांकि, इन नियमों में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है.
- श्राद्ध कर्म के दौरान पिंडदान और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों का अपमान या अनादर बिल्कुल नहीं करना चाहिए. साथ ही, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करने की परंपरा है. इन लोगों का भी अपमान नहीं करना चाहिए.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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