बजट 2026-27: अफोर्डेबल हाउसिंग, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स टोकनाइजेशन पर हो फोकस
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। आम बजट आने में करीब एक हफ्ते का समय बचा हुआ है। इसे लेकर रियल एस्टेट सेक्टर्स को भी काफी उम्मीद हैं, जिसमें अफोर्डेबल हाउसिंग की सीमा बढ़ाना, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिक आवंटन और एसेट्स टोकनाइजेशन शामिल है।
रियल एस्टेट सेक्टर्स के एक्सपर्ट ने कहा कि मौजूदा समय में पूरे देश में घरों की कीमतें काफी बढ़ गई है। ऐसे में सरकार को अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित सीमा को 45 लाख रुपए से बढ़कर 80 लाख या फिर एक करोड़ रुपए कर देना चाहिए। इससे देश में अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं की संख्या बढ़ेगी और लोगों के लिए घर खरीदना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा।
एक अन्य एक्सपर्ट ने आगे बताया कि बजट में शहरी विकास के लिए बजट में अधिक फंड आवंटित करना चाहिए, क्योंकि मौजूदा समय में वायु प्रदूषण, जल की गुणवत्ता, अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर वैकल्पिक नहीं जरूरी बन गए हैं। इससे शहरों में जीवन की गुणवत्ता बढ़ेगी और निवेशकों को रियल एस्टेट में निवेश करने का भरोसा बढ़ेगा।
इसके अलावा, एक एक्सपर्ट ने कहा कि सरकार को आने वाले बजट में घर खरीदारों को होम लोन में मिलने वाली छूट को बढ़ाना चाहिए। साथ ही, स्थिरता केंद्रित विकास वाली रियल एस्टेट परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए और रियल एस्टेट में छोटे निवेश को आगे बढ़ाने के लिए एसेट टोकनाइजेशन का फ्रेमवर्क लाना चाहिए। इससे बड़ी संख्या में एसआईपी की तरह ही रियल एस्टेट में निवेश कर पाएंगे।
केंद्रीय बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को सुबह 11 बजे पेश किया जाएगा। यह वर्ष 2000 के बाद पहली बार है कि केंद्रीय बजट संसद में रविवार को पेश किया जाएगा। इससे पहले 2025 में, सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश किया था और दिवंगत अरुण जेटली के नेतृत्व में 2015 का बजट भी 28 फरवरी, 2015 को शनिवार को पेश किया गया था।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एस जयशंकर ने अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की; द्विपक्षीय संबंधों और इंडो-पैसिफिक पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात में माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी शामिल थे। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास और चल रहे यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की।
इस मुलाकात की जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देते हुए लिखा, अमेरिकी डेलीगेशन के साथ अच्छी बातचीत हुई, जिसमें प्रतिनिधि माइक रोजर्स, रिप्रेजेंटेटिव एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ-साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। भारत-अमेरिका संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई। कांग्रेसनल बातचीत हमेशा हमारे रिश्ते का एक अहम पहलू रही है।
बता दें, इससे पहले 18 जनवरी को विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स से मुलाकात की थी और द्विपक्षीय संबंधों और इसके रणनीतिक महत्व पर चर्चा की। बैठक के बारे में ईएएम ने जानकारी देते हुए लिखा, आज सुबह दिल्ली में सीनेटर स्टीव डेन्स से मिलकर खुशी हुई। हमारे द्विपक्षीय संबंधों और इसके स्ट्रेटेजिक महत्व पर बड़े पैमाने पर और खुली चर्चा हुई।
इससे पहले 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने ईएएम जयशंकर से फोन पर बात की थी। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक में सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, ट्रेड बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित सहयोग के मुख्य क्षेत्रों का रिव्यू किया।
रुबियो के साथ बातचीत को लेकर ईएएम जयशंकर ने कहा, “ट्रेड, जरूरी मिनरल्स, न्यूक्लियर कोऑपरेशन, डिफेंस और एनर्जी पर चर्चा हुई। इन और दूसरे मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमत हुए।”
फोन पर रुबियो ने भारत को ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल के लिए सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी बिल (परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन एवं विकास बिल/ शांति) लागू करने पर बधाई दी। अमेरिकी राज्य विभाग के प्रिंसिपल उपप्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि यह एक हालिया कानून है जो भारत के न्यूक्लियर एनर्जी फ्रेमवर्क का हिस्सा है।
पिगॉट ने कहा, “उन्होंने अमेरिका-भारत सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन को बढ़ाने, अमेरिकन कंपनियों के लिए मौके बढ़ाने, शेयर्ड एनर्जी सिक्योरिटी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इस जरूरी विकास का फायदा उठाने में दिलचस्पी दिखाई।”
पिगॉट ने कहा, “उन्होंने क्षेत्रीय विकास पर भी अपने विचार शेयर किए, और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक के लिए अमेरिका और भारत के कमिटमेंट को फिर से पक्का किया।”
वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे एक सकारात्मक कॉल बताया। गोर ने एक्स पर लिखा, “उन्होंने हमारे द्विपक्षीय ट्रेड नेगोशिएशन, जरूरी मिनरल्स और अगले महीने होने वाली मीटिंग के बारे में अगले चरण पर चर्चा की। अमेरिका दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन को मजबूत करने के लिए कानून पर काम करने में दिलचस्पी रखता है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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