एस जयशंकर ने अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की; द्विपक्षीय संबंधों और इंडो-पैसिफिक पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात में माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी शामिल थे। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास और चल रहे यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की।
इस मुलाकात की जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देते हुए लिखा, अमेरिकी डेलीगेशन के साथ अच्छी बातचीत हुई, जिसमें प्रतिनिधि माइक रोजर्स, रिप्रेजेंटेटिव एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ-साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। भारत-अमेरिका संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई। कांग्रेसनल बातचीत हमेशा हमारे रिश्ते का एक अहम पहलू रही है।
बता दें, इससे पहले 18 जनवरी को विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स से मुलाकात की थी और द्विपक्षीय संबंधों और इसके रणनीतिक महत्व पर चर्चा की। बैठक के बारे में ईएएम ने जानकारी देते हुए लिखा, आज सुबह दिल्ली में सीनेटर स्टीव डेन्स से मिलकर खुशी हुई। हमारे द्विपक्षीय संबंधों और इसके स्ट्रेटेजिक महत्व पर बड़े पैमाने पर और खुली चर्चा हुई।
इससे पहले 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने ईएएम जयशंकर से फोन पर बात की थी। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक में सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, ट्रेड बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित सहयोग के मुख्य क्षेत्रों का रिव्यू किया।
रुबियो के साथ बातचीत को लेकर ईएएम जयशंकर ने कहा, “ट्रेड, जरूरी मिनरल्स, न्यूक्लियर कोऑपरेशन, डिफेंस और एनर्जी पर चर्चा हुई। इन और दूसरे मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमत हुए।”
फोन पर रुबियो ने भारत को ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल के लिए सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी बिल (परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन एवं विकास बिल/ शांति) लागू करने पर बधाई दी। अमेरिकी राज्य विभाग के प्रिंसिपल उपप्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि यह एक हालिया कानून है जो भारत के न्यूक्लियर एनर्जी फ्रेमवर्क का हिस्सा है।
पिगॉट ने कहा, “उन्होंने अमेरिका-भारत सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन को बढ़ाने, अमेरिकन कंपनियों के लिए मौके बढ़ाने, शेयर्ड एनर्जी सिक्योरिटी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इस जरूरी विकास का फायदा उठाने में दिलचस्पी दिखाई।”
पिगॉट ने कहा, “उन्होंने क्षेत्रीय विकास पर भी अपने विचार शेयर किए, और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक के लिए अमेरिका और भारत के कमिटमेंट को फिर से पक्का किया।”
वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे एक सकारात्मक कॉल बताया। गोर ने एक्स पर लिखा, “उन्होंने हमारे द्विपक्षीय ट्रेड नेगोशिएशन, जरूरी मिनरल्स और अगले महीने होने वाली मीटिंग के बारे में अगले चरण पर चर्चा की। अमेरिका दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन को मजबूत करने के लिए कानून पर काम करने में दिलचस्पी रखता है।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका में आईसीई अधिकारियों के हाथों एक और नागरिक की मौत, भड़के लोगों ने ट्रंप से कर दी ये मांग
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में एक बार फिर से इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) अधिकारियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। शनिवार को फेडरल इमिग्रेशन एजेंटों द्वारा एक अमेरिकी नागरिक की हत्या का मामला सामने आया। कुछ हफ्ते पहले मिनियापोलिस में आईसीई अधिकारियों ने एक महिला को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद इलाके में यह दूसरी हत्या है। इसने नए विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया और स्थानीय नेताओं ने ट्रंप सरकार से शहर में अपना ऑपरेशन बंद करने की मांग की।
शनिवार को फेडरल एजेंटों ने बर्फीली सड़क पर आईसीयू नर्स एलेक्स प्रेट्टी को गोली मार दी। करीब तीन हफ्ते से भी कम समय पहले आईसीई के एक अधिकारी ने 37 साल की रेनी गुड को उनकी कार में गोली मार दी थी।
हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने आईसीई की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सेल्फ डिफेंस था। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने प्रेट्टी के पास से मिला एक पिस्तौल और गोला-बारूद की ओर इशारा किया।
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने एक ब्रीफिंग में कहा था, वह हिंसा फैलाने के लिए वहां था। वहीं व्हाइट हाउस ने भी प्रेट्टी को हत्यारा बताया। रेनी गुड की मौत की तरह इस घटना का भी फुटेज सामने आया है। मोबाइल से निकाले गए वीडियो ने फेडरल सरकार के घटना के ब्योरे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी मीडिया में बड़े पैमाने पर दिखाए गए वीडियो में प्रेट्टी बर्फ से ढकी सड़क पर एजेंटों को फिल्माते और ट्रैफिक को कंट्रोल करते हुए दिख रहे हैं। एक वीडियो में आईसीई अधिकारी को एक महिला प्रदर्शनकारी को फुटपाथ पर जमीन पर धकेलते हुए देखा गया। इसके बाद प्रेट्टी उनके बीच आ जाते हैं और एजेंट के चेहरे पर एक केमिकल इरिटेंट स्प्रे कर देता है।
इसके बाद एजेंट, प्रेट्टी को जमीन पर खींच लेता है और कई अधिकारी उसे बर्फ वाली सड़क पर हिरासत में लेने की कोशिश करने लगते हैं। इस बीच जैसे ही एक अधिकारी को लगता है कि प्रेट्टी के पास बंदूक है, वह उसके पैंट से बंदूक निकालता है कि तभी दूसरा एजेंट प्रेट्टी पर गोली चला देता है। इसके बाद आईसीई अधिकारी दूर से उसके बेजान शरीर पर कई बार गोली चलाते हैं।
ताजा मामले को लेकर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, जब मैं मिनेसोटा गया तो आईसीई ज्यादा स्थानीय कानून प्रवर्तन के साथ काम करना चाहते थे ताकि जमीनी हालात हाथ से बाहर न हों। मिनेसोटा में स्थानीय नेतृत्व ने अब तक उन रिक्वेस्ट का जवाब देने से मना कर दिया है।
मिनियापोलिस में प्रदर्शन को लेकर एक अन्य पोस्ट में वेंस ने लिखा, इस तरह की बनावटी अफरा-तफरी सिर्फ मिनियापोलिस में होती है। यह स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने वाले कट्टर वामपंथी आंदोलनकारियों का सीधा नतीजा है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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