सनी देओल की 36 साल पुरानी ब्लॉकबस्टर, जिस पर कोई नहीं लगाना चाहता था दांव, पिता ने महीसा बनकर बना दिया स्टार
सनी देओल इन दिनों 'बॉर्डर 2' में नजर आ रहे हैं. फिल्म रिलीज के 2 दिन बाद ही ताबड़तोड़ कमाई कर रही हैं. सनी देओल के फैंस आज भी उनकी दमदार एक्टिंग पर जान छिड़कते हैं. लेकिन आज से 36 साल पहले आई एक फिल्म में सनी का नाम सुनते ही कोई प्रोड्यूसर फिल्म पर पैसा लगाने को तैयार नहीं था. फिर पिता धर्मेंद्र उनके लिए मसीहा बने थे.
वचन निभाने राखी बहनों के घर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री:आधे घंटे तक रुके और चाय पी, कोटा क्रिकेट ग्राउंड पर चौके-छक्के लगाए
बागेश्वर धाम (MP) के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री 24 जनवरी (शनिवार) की देर रात करीब एक बजे अपने भक्त (राखी बहनों) के घर चाय पीने पहुंचे। कोटा के रामगंजमंडी इलाके में करीब आधा घंटा रुके थे। इस दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी साथ थे। इससे पहले धीरेंद्र शास्त्री रात करीब 12 बजे मोड़क स्थित ग्राउंड पर क्रिकेट खेला और चौके-छक्के लगाए। पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा 23 जनवरी से रामगंज मंडी (कोटा) इलाके के मोड़क के गुणदी गांव में चल रही है। आज (रविवार) कथा का समापन होगा। श्रीराम कथा के पहले दिन राखी बांधी थी श्रीराम कथा के पहले दिन (23 जनवरी) भावना और खुशबू राठौर ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने की इच्छा जताई थी। दोनों बहनों ने राखी भी बांधी थी। दोनों लड़कियों ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से घर आने का न्योता दिया था। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि वे तीन दिन रामगंज मंडी में हैं। उनके घर चाय पीने जरूर आएंगे। खुशबू सरकारी टीचर है और छोटी बहन भावना ने नीट का पेपर दिया है। भावना ने एसटीसी भी कर रखी है। बहनों से वादा निभाया आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बहनों से किया हुआ वायदा निभाया। शनिवार देर रात करीब एक बजे रामगंज मंडी के वार्ड नंबर 3 की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित भावना और खुशबू राठौर के घर पहुंचे। धीरेंद्र शास्त्री को घर में देख भावना और खुशबू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दोनों बहनों की आंखों से खुशियों के आंसू निकल आए। धीरेंद्र शास्त्री को भाई बनाना चाहती थीं भावना ने कहा- मुझे विश्वास था, मेरे भाई मेरे घर चाय पीने जरूर आएंगे। अपना किया हुआ वादा पूरा करेंगे। भावना ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को बताया था कि वे दोनों बहने हैं। उनका कोई भाई नहीं है। इसलिए वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को राखी बांधकर अपना भाई बनना चाहती थीं। उन्होंने कई बार प्रयास किया लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। रामगंज मंडी में जब कथा करने आचार्य शास्त्री पहुंचे तो दोनों बहनों ने ठान ली कि वह अब अपनी इच्छा पूरी करके रहेंगी। आखिरकार वो आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने और घर पर बुलाकर चाय पिलाने में सफल रहीं। पिता बोले- बेटियों का सपना पूरा हुआ दोनों बहनों के पिता लालचंद राठौर और माता हेमलता राठौर ने आचार्य को बताया कि दोनों बेटियां अक्सर उनसे ऐसी बातें किया करती थीं। परंतु उनको विश्वास नहीं होता था। कई बार बेटी को समझाया भी कि यह संभव नहीं है। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री कभी भी उसके घर चाय पीने नहीं आएंगे। बागेश्वर धाम सरकार का आशीर्वाद है कि बेटियों का सपना पूरा हुआ और आज स्वयं आप भगवान के रूप में हमारे घर पधारे हैं। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने खुशबू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि आज से हम तुम्हारे भाई हैं। भाई की कमी कभी महसूस मत करना। बागेश्वर धाम आने का न्योता दिया आचार्य धीरेंद्र शास्त्री करीब आधा घंटा इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रुके। उन्होंने चाय पी। खुशबू और भावना के माता-पिता और वहां उपस्थित भक्तों का हालचाल जाना। घर से विदा होने से पहले दोनों बहनों को बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भावना व खुशबू के पिता लालचंद्र राठौर को बागेश्वर धाम की तरफ से एक कूपन भी दिया। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के साथ शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर भी मौजूद रहे। पहले शिक्षा मंत्री के घर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री शनिवार रात करीब 9 बजे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कोटा के रंगबाड़ी स्थित आवास पहुंचे थे। यहां से करीब 10 बजे बोरखेड़ा इलाके में पहुंचे और भक्तों से संवाद किया। रात करीब 12 बजे मोड़क स्थित मंगलम सीमेंट फैक्ट्री के ग्राउंड पहुंचे। यहां उन्होंने भक्तों के साथ 30 से 45 मिनट तक क्रिकेट खेला था। यहां मनोज जैन, कमल जैन के बुलावे पर पहुंचे थे। बहनों के बुलावे पर आधी रात के बाद घर आए क्रिकेट खेलने के बाद धीरेंद्र शास्त्री रामगंज मंडी के लिए रवाना हुए। इसी इलाके के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रात करीब 1 बजे भावना और खुशबू के घर पहुंचे थे।
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