Rajasthan High Court: राजस्थान में पहली बार देर रात खुला हाईकोर्ट, बीकानेर पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक
राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच रविवार देर रात हाईकोर्ट में असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। बीकानेर मेयर चुनाव से पहले नव निर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई हुई।
मकसूद अहमद बीकानेर नगर निगम के वार्ड-18 से निर्वाचित पार्षद हैं। उन्होंने करीब दो महीने पुरानी FIR से जुड़े मामले में पुलिस की ओर से जारी नोटिस और गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। तात्कालिकता को देखते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की व्यवस्था की गई।
जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने दी अंतरिम राहत
मामले की सुनवाई जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ के सामने हुई। अदालत ने मकसूद अहमद को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका अधिवक्ता कौशल गौतम के माध्यम से दाखिल की गई थी, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य ने अदालत में उनका पक्ष रखा।
15 सितंबर को पुलिस ने भेजा था नोटिस
मकसूद अहमद को 15 सितंबर को कोटगेट थाने की ओर से गवाह के तौर पर नोटिस जारी किया गया था। यह मामला करीब दो महीने पुरानी FIR से जुड़ा बताया जा रहा है।
शिकायत सरकारी डिस्पेंसरी में सरकारी काम में बाधा डालने और डॉक्टर से अभद्रता से जुड़ी बताई गई है। मेयर चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी की आशंका के चलते रविवार देर शाम हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
रविवार को अन्य पार्षदों के मामलों की भी हुई सुनवाई
बीकानेर के मामले से पहले रविवार को अवकाश के दिन भी राजस्थान हाईकोर्ट में निकाय चुनाव से जुड़े कुछ अन्य मामलों की विशेष सुनवाई हुई। रिपोर्टों के अनुसार, हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया। वहीं अन्य निकायों से जुड़े मामलों में भी अदालत ने चुनाव से पहले गिरफ्तारी की आशंका पर याचिकाओं की सुनवाई की। इससे पहले नागौर और श्रीगंगानगर के पार्षदों से जुड़े मामलों में भी अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की जानकारी सामने आई थी।
273 निकायों में आज अध्यक्ष पद के चुनाव
राजस्थान में 9 सितंबर को हुए निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया चल रही है। 21 सितंबर को 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना है। इनमें बीकानेर, पाली, अजमेर, उदयपुर और अलवर जैसे प्रमुख नगर निगम भी शामिल हैं।
वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर चुनाव 25 सितंबर को होना है। इन निकायों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान होने के कारण चुनाव कार्यक्रम अलग रखा गया है।
बीकानेर में मेयर चुनाव से ठीक पहले पार्षद मकसूद अहमद को मिली हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के बाद अब सोमवार को होने वाली चुनावी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
सिक्किम के 71 सरकारी स्कूलों में शुरू हुआ AI-पावर्ड लर्निंग प्रोग्राम, बच्चों की पढ़ाई होगी और आसान
Sikkim AI learning programme: सिक्किम सरकार ने स्कूली शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 71 सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित लर्निंग प्रोग्राम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और गणितीय कौशल को मजबूत करना है। शिक्षा विभाग की ओर से रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
शिक्षकों की भूमिका रहेगी सर्वोपरि
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक ही केंद्र में रहेंगे। एआई का इस्तेमाल क्लासरूम की पारंपरिक पढ़ाई के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक सहायक टूल के रूप में किया जाएगा। इस आधुनिक तकनीक को नियमित स्कूल समय के दौरान एक विशेष 60 मिनट की 'AI-FunZone' क्लास के माध्यम से जोड़ा गया है। विभाग के मुताबिक, इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद अनुकूली और तकनीक-सक्षम शिक्षा के जरिए छात्रों की बुनियादी योग्यताओं को निखारना है।
इन क्षेत्रों के स्कूलों में हो रहा है लागू
यह महत्वाकांक्षी 'AI-FunZone' कार्यक्रम फिलहाल गंगटोक जिले के खामदोंग, नाडोक और मार्तम ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने बीते अप्रैल महीने में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों पर केंद्रित है, जिन्हें अंग्रेजी, नेपाली और गणित विषयों में डिजिटल लर्निंग सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है।
कैसे काम करता है 'AI-FunZone'?
विभाग के अनुसार, यह कार्यक्रम बच्चों को कंप्यूटर या साझा डिजिटल उपकरणों के जरिए रोजाना छोटे और व्यक्तिगत प्रैक्टिस सेशन उपलब्ध कराता है। यह स्मार्ट सिस्टम बच्चों को पढ़ते हुए सुन सकता है, उनकी खास कमियों की पहचान कर सकता है और उनके सीखने के स्तर के अनुसार अगले कार्यों को ढाल सकता है। गणित के विषय में यह तकनीक खास गलतियों को पकड़कर उसी हिसाब से अभ्यास तैयार करती है। इसके अलावा, एक रियल-टाइम डैशबोर्ड शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की प्रगति पर नजर रखने और जिन क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है, उन्हें तुरंत पहचानने में मदद करता है।
तकनीकी बुनियादी ढांचा और ट्रेनिंग
इस प्रोग्राम को सुचारू रूप से चलाने के लिए कंप्यूटर या टैबलेट, हेडसेट और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ स्टैंडअलोन प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की कुछ कमी की बात सामने आई है। इसके बावजूद, तीनों ब्लॉकों के लगभग 300 रिसोर्स पर्सन (संसाधन व्यक्तियों) का प्रशिक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
बिना परीक्षा के डर के सीख रहे हैं बच्चे
विभाग ने बताया कि शिक्षक और छात्र दोनों की तरफ से इस प्रोग्राम को लेकर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कंप्यूटर, ग्राफिक्स, ऑडियो और इंटरैक्टिव गतिविधियों के इस्तेमाल से बच्चों में स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने और उपचारात्मक शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। इस गैर-परीक्षा आधारित दृष्टिकोण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र बिना किसी रैंकिंग या तुलना के डर के खुलकर अभ्यास कर सकते हैं। साथ ही, एआई आधारित मूल्यांकन से शिक्षकों को लर्निंग गैप समझने और नियमित कक्षाओं के दौरान उन्हें दूर करने में आसानी होती है। स्कूल प्रमुखों ने भी माना है कि इस कार्यक्रम को लागू करना काफी सरल है और इससे प्रशासनिक काम का बोझ भी न्यूनतम रहता है।
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