Asian Games 2026: Indian Hockey Team की लगातार 5वीं जीत, Bangladesh को 10-0 से रौंदा
28 सितंबर को ऐची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लगातार पांचवीं जीत हासिल की। खराब मौसम और पिच की मुश्किल स्थितियों के बावजूद टीम ने बांग्लादेश को 10-0 से हराया और पूल A में टॉप पर रही। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने हैट्रिक लगाई, जबकि शिलानंद लाकरा ने दो गोल किए। इससे भारत ने अपने पूल मैच +45 के गोल अंतर के साथ खत्म किए। इस जीत के साथ 1 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ़ सेमीफ़ाइनल मुकाबला तय हो गया है, जबकि दूसरा सेमीफ़ाइनल मलेशिया और दक्षिण कोरिया के बीच होगा।
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तेज़ बारिश की वजह से मैच में 30 मिनट की देरी हुई; इसी बारिश के कारण पाकिस्तान और ओमान का पिछला मैच भी रोकना पड़ा था। पिच गीली और पानी से भरी होने के बावजूद, ज़्यादा फ़िट भारतीय टीम ने हालात के हिसाब से बेहतर खेल दिखाया। भारत ने तीसरे मिनट में पहला गोल किया, जब संजय की मदद से अभिषेक ने रिवर्स हिट के ज़रिए गोल दागा। बांग्लादेश को 12वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन गोलकीपर सूरज करकेरा ने उसे रोक दिया। 15वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिलने की संभावना थी, लेकिन बांग्लादेश के वीडियो रेफरल के बाद उसे रद्द कर दिया गया।
शुरुआती दबाव के बाद, भारत ने 22वें मिनट में अपनी बढ़त दोगुनी कर ली। जुगराज सिंह ने ड्रैग-फ्लिक रोके जाने के बाद मिले पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदला। इसके बाद हाफ-टाइम से पहले हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर सफल फ्लिक से बढ़त को 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ में, सुखजीत सिंह ने 32वें मिनट में गोल किया, जिसमें दिलप्रीत सिंह ने उनकी मदद की। हरमनप्रीत ने 40वें और 45वें मिनट में गोल करके अपना स्कोर बढ़ाया और 45वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से अपनी हैट्रिक पूरी की, जबकि शिलानंद लाकड़ा ने जल्दी-जल्दी दो गोल करके स्कोर 8-0 कर दिया।
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आखिरी क्वार्टर में हालात मुश्किल होने के बावजूद, भारत ने दो और गोल किए। संजय ने आखिरी से ठीक पहले वाले मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला, और मंदीप ने 60वें मिनट में सुखजीत के रोके गए प्रयास के बाद रिबाउंड पर गोल करके 10-0 से जीत पक्की कर दी।
Oxford Study: भारत में आर्थिक विकास के साथ PM 2.5 प्रदूषण बढ़ा, मौतों में 30% इजाफा
नए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2000 के बाद भारत की तेज आर्थिक प्रगति के कारण बिजली की मांग में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई और इस मांग का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा कोयले से पूरा किया गया, जिसके कारण हवा में पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर बढ़ा और 2000 से 2020 के बीच शहरों में प्रदूषण के कारण जान गंवाने वालों की संख्या में वृद्धि हुई। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में कहा गया कि तेज आर्थिक प्रगति से भारत में बिजली की आपूर्ति और स्वच्छ ईंधन से खाना पकाने की सुविधा में बड़ा सुधार हुआ, लेकिन कोयले से बनने वाली बिजली पर बढ़ती निर्भरता ने बाहरी वायु प्रदूषण बढ़ाया और शहरों में वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों में वृद्धि हुई। ‘नेचर सिटीज जर्नल’ में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्षों में कहा गया कि भारत के आर्थिक और ऊर्जा परिदृष्य में बदलाव का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मिला-जुला असर हुआ है।
अध्ययन के मुताबिक, एक ओर घरों के अंदर प्रदूषण से जुड़े जोखिम कम हुए, वहीं दूसरी ओर बाहर हवा में प्रदूषण बढ़ा। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के बासुदेव स्वैन ने कहा, चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन सुधारों में मददगार साबित हुई बिजली का उत्पादन अधिक स्वच्छ तरीके से हो। शोधकर्ताओं ने उपग्रहों से मिले आंकड़ों, वायुमंडलीय विश्लेषण, रासायनिक परिवहन मॉडलिंग, सामाजिक-आर्थिक और ऊर्जा आंकड़ों तथा जनसंख्या और मृत्यु दर के आंकड़ों को मिलाकर अध्ययन किया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000 से 2020 के बीच भारत में प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब 600-700 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2,000 डॉलर से अधिक हो गई, जबकि बिजली की मांग लगभग 450 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) से बढ़कर करीब 2,000 टीडब्ल्यूएच हो गई। प्रति व्यक्ति जीडीपी में 1 प्रतिशत की वृद्धि के बाद बिजली की मांग में करीब 1.14 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस वृद्धि के साथ भारत में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई।
वर्ष 2000 से पहले 71 संयंत्र चालू किए गए थे, जबकि 2001 से 2024 के बीच 182 और संयंत्र शुरू किए गए। अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि पीएम2.5 के संपर्क में आने से शहरों में साल 2000 में करीब 6.70 लाख लोगों की मौत हुई थी, जबकि साल 2020 में यह आंकड़ा बढकर 8.70 लाख हो गया, यानी इनमें करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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