पति-पत्नी के विवाद ने रोकी दिल्ली की बिजली:पति ने नहीं दिए ₹250, गुस्से में पत्नी हाईटेंशन टॉवर पर चढ़ी, 3 घंटे बंद रही लाइन
सिंगरौली के झारा गांव में शनिवार को उस समय अफरा तफरी मच गई, जब एक महिला 200 फीट ऊंचे हाईटेंशन बिजली टॉवर पर चढ़ गई। घटना की सूचना मिलते ही सरई थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और बिजली विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए एनटीपीसी की 36 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन बंद कराई गई, जिससे दिल्ली जाने वाली बिजली सप्लाई करीब तीन घंटे तक प्रभावित रही। सरई थाना पुलिस की जांच में सामने आया है कि महिला का पति गुजरात में प्राइवेट नौकरी करता है और वहीं रहता है। दोपहर करीब 3 बजे महिला पति को बिना बताए झारा गांव का मेला देखने पहुंची थी। मेले में उसने नाव झूला झूलने के लिए पति को फोन कर 250 रुपए मांगे। फोन पर बातचीत के दौरान पति इस बात पर नाराज हो गया कि वह बिना बताए मेला देखने क्यों आई। आरोप है कि पति ने गुस्से में महिला से दोबारा सामने नहीं आने की बात कह दी। इससे आहत होकर महिला ने पास लगे हाईटेंशन बिजली टॉवर पर चढ़कर हंगामा शुरू कर दिया। तस्वीरों में देखिए पूरा घटनाक्रम तीन घंटे की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतारा प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार महिला से बातचीत कर उसे समझाया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। सरई एसडीएम धर्म मिश्रा ने बताया कि प्रशासनिक प्रयासों से स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लिया गया है। महिला से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला की काउंसलिंग की जा रही है। .............................................. यह खबर भी देखें शादी की जिद पर अड़ा प्रेमी युवक टावर पर चढ़ा सिंगरौली के देवसर थाना क्षेत्र के धनहा गांव में शुक्रवार को एक युवक प्रेम प्रसंग के चलते मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक ने मांग कि जब तक उसकी प्रेमिका मौके पर आकर उससे शादी के लिए सहमति नहीं देती, वह नीचे नहीं उतरेगा। इस घटना के बाद टावर के नीचे ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद युवक 5 घंटे बाद टावर से नीचे उतर गया। पढ़ें पूरी खबर
उधार के पेन से लिखा वो बेशकीमती गाना, सुनते ही खड़े हो जाते हैं रोंगटे, गाते-गाते रो पड़ी थीं लता मंगेशकर
नई दिल्ली: हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, उसे राष्ट्रगान के बराबर सम्मान मिला. गाने को सुनकर हर एक भारतीय की आंखें नम हो जाती हैं और रोमांच से रोंगटे खड़े हो जाते हैं. कहते हैं कि यह गाना सुनने के बाद नम आंखों से जवाहरलाल नेहरू ने लता मंगेशकर के कहा था कि अगर कोई देशवासी इस गीत से प्रेरित नहीं होता, तो वह सच्चा भारतीय नहीं है. साल 1963 में चीन से मिली हार के बाद कवि प्रदीप ने समुद्र किनारे टहलते हुए उधार के पैन और सिगरेट के पैकेट पर इस गाने के बोल लिखे थे, जिसे लता मंगेशकर ने पहली दफा नेशनल स्टेडियम में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के सामने गाया था. रुंधे गले से लता मंगेशकर ने जब गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों' खत्म किया, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था और वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम थीं.
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