Arvind Kejriwal पर बरसे Pravesh Verma, कहा- गुंडागर्दी से नहीं जीता जाता जनता का दिल
दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने तिलक नगर में सड़क के निरीक्षण के दौरान हुई एक हालिया घटना को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने उनसे बहस की, वह 'जेनरेशन Z' का सदस्य नहीं, बल्कि AAP से जुड़ा एक गुंडा था। X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए वर्मा ने कहा कि वह AAP विधायक जरनैल सिंह की शिकायतों के बाद उस जगह पर गए थे और दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे कामों के बारे में जानकारी देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जी, मैं आपको सिखा सकता हूं कि जनता का दिल कैसे जीता जाता है। लेकिन यह तभी हो सकता है जब आपके पास अपने ड्रामे से फुर्सत हो। पहले यह वीडियो देखिए!
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वर्मा ने केजरीवाल के पुराने बर्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि बच्चों की झूठी कसम खाना, वोटिंग के दिन इमोशनल कार्ड खेलने के लिए बुजुर्ग माता-पिता को व्हीलचेयर पर बिठाना, शीश महल में महिला सांसद के साथ मारपीट करना और दिल्ली के मुख्य सचिव की पिटाई करना—ये सब उनकी आदत बन गई थी। और अब, वे 'जेन Z' का बहाना बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल जी, कल मेरे इलाके में जो व्यक्ति आया था, वह जेन Z नहीं था; वह आपका गुंडा था। आपका विधायक कई गुंडों के साथ वहां पहुंचा था। मैं उसे प्यार से समझाना चाहता था कि हम किस तरह का काम कर रहे हैं। अगर आपको कोई शिकायत थी, तो मैं उन शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने के लिए वहां गया था।
वर्मा ने कहा कि शायद यह पहला मौका है जब किसी विपक्षी विधायक की शिकायत के बाद कोई मंत्री खुद मौके पर जाकर समाधान करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप इन बातों को नहीं समझ पा रहे हैं, तो इसकी वजह यह है कि 15 सालों तक आपने न तो दिल्ली में सड़कें बनाईं और न ही कोई विकास का काम किया। केजरीवाल जी, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आपका यह 'जेन ज़ी' (Gen Z) वाला ड्रामा काम नहीं आएगा।
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उनसे सवाल-जवाब करने वाले व्यक्ति का ज़िक्र करते हुए वर्मा ने दावा किया कि तीन महीने पहले उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) के एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के साथ मारपीट करने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उसने MCD के एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की गर्दन तोड़ दी थी। उस FIR में जरनैल सिंह के भतीजे का नाम भी शामिल है। हमारी दिल्ली पुलिस ने उन दोनों को गिरफ़्तार किया था। और बाद में, आपने उस बेचारे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी का घर और दुकान तक तुड़वाने की कोशिश की। वर्मा ने चेतावनी दी कि वह दिल्ली सरकार के काम में रुकावट या अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर्स को परेशान करने की हरकत बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर आप आज वहाँ जा रहे हैं, तो ज़रूर जाएँ। अपने साथ अपने सभी गुंडों को भी ले जाएँ। जितना चाहें उतना ड्रामा करें, लेकिन मेरे सामने आपकी गुंडागर्दी बिल्कुल नहीं चलेगी।
NTA परीक्षा सुधार के लिए Nandan Nilekani कार्यबल ने K Radhakrishnan से की चर्चा
परीक्षा में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्यबल ने पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से विचार-विमर्श किया जिन्होंने 2024 में नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद केंद्र द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता की थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जुलाई में गठित यह कार्यबल फिलहाल विभिन्न हितधारकों से परामर्श कर रहा है।
उसने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं। राधाकृष्णन समिति का गठन जून 2024 में किया गया था और उसने उसी वर्ष अक्टूबर में अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। इसके बाद केंद्र ने इन सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक अन्य समिति गठित की थी, जिसे उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति (एचपीएससी) नाम दिया गया और इसकी अध्यक्षता भी राधाकृष्णन को सौंपी गई।
शिक्षा मंत्रालय इन सिफारिशों को लागू कर रहा था, तभी इस वर्ष मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में एक और प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। इसे लेकर व्यापक विवाद और विरोध प्रदर्शन हुए तथा अंततः तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को प्रश्नपत्र लीक से सुरक्षित बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने के वास्ते इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा की थी।
कार्यबल ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में व्यापक सुधारों का अध्ययन करने और व्यापक सुधारों की सिफारिश करने के लिए पूर्व यूआईडीएआई अध्यक्ष नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल (एचपीटीएफ) का गठन किया गया है। एचपीटीएफ परीक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है और परीक्षा प्रणाली को मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, विश्वसनीय तथा भविष्य के लिए तैयार बनाने के वास्ते सुधारों की सिफारिश करेगा।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति की सिफारिशें नवीनतम प्रौद्योगिकियों के उपयोग और उनके बेहतर इस्तेमाल को लेकर होंगी।
कार्यबल ने एनटीए के महानिदेशक और उच्च शिक्षा विभाग समेत विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है। एचपीटीएफ ने एचपीएससी के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी सलाह-मशविरा किया है।’’ सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने तथा एनटीए की संरचना और कामकाज में बदलाव के लिए सिफारिशें की थीं। एनटीए के पूर्ण पुनर्गठन की वकालत करते हुए राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए सुरक्षा नियंत्रण मजबूत करने के वास्ते 101 सिफारिशें की थीं।
इनमें प्रश्नपत्र प्रणाली, अभ्यर्थी पंजीकरण, शुल्क भुगतान, प्रवेश पत्र प्रणाली, कंप्यूटर आधारित परीक्षा मंच, ओएमआर प्रसंस्करण, सामान्यीकरण प्रणाली और परिणाम प्रणाली शामिल थीं। समिति ने यह भी कहा था कि एनटीए का दायरा उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं तक ही सीमित किया जाना चाहिए और इसके प्रशासन, सुरक्षा तथा डिजिटल बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव किया जाना चाहिए। हालांकि, इस वर्ष प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने एनटीए पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था ‘‘उसने कोई सबक नहीं लिया है।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछली समिति द्वारा की गई सिफारिशों का नए कार्यबल द्वारा अध्ययन किया जा रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने भी केंद्र से सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।’’ नीलेकणी के अलावा कार्यबल के अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
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