विश्व रेबीज दिवस: हर नौ मिनट में एक व्यक्ति की मौत, 'प्राणघातक' वायरस से ऐसे करें बचाव
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। हर वर्ष 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। यह दुनिया का पहला रेबीज टीका विकसित करने वाले फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि अवसर पर मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रेबीज जैसी घातक बीमारी और उसके रोकथाम के ऊपायों के बारे में जागरूक करना है। वर्ष 2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज से इंसानों की मौत को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य है।
विश्व रेबीज दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, आज विश्व रेबीज दिवस है। हर नौ मिनट में एक व्यक्ति की मौत रेबीज से होती है, जबकि इसे 100 प्रतिशत रोका जा सकता है। अपने कुत्ते को हर वर्ष वैक्सीन लगवाकर खुद को और अपने प्यारे डॉगी को सुरक्षित रखें। यह भी पक्का करें कि जिन लोगों को काटा गया है, उन्हें भी जान बचाने वाली वैक्सीन मिल सके!
डब्ल्यूएचओ की ओर से रेबीज के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। रेबीज मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है। यह एक वायरल, जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली) और नजरअंदाज की गई ट्रॉपिकल बीमारी है, जिससे हर वर्ष हजारों लोगों की मौत होती है। इनमें से 40 प्रतिशत मौतें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होती हैं। इंसानों में रेबीज के 99 प्रतिशत मामले कुत्तों के काटने या खरोंचने से होते हैं। कुत्तों का टीकाकरण करके और काटने से बचाव करके इसे रोका जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एक बार जब वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) को संक्रमित कर देता है और बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो रेबीज के सभी मामलों यानी 100 प्रतिशत केस में मौत निश्चित होती है। लेकिन वायरस को सेंट्रल नर्वस सिस्टम तक पहुंचने से रोककर और तुरंत पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) देकर रेबीज से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, पीईपी में घाव को अच्छी तरह धोना, ह्यूमन रेबीज वैक्सीन का कोर्स देना और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (आरआईजी) या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (आरएमएबी) देना शामिल है। अगर किसी व्यक्ति को रेबीज होने की आशंका वाले जानवर ने काटा या खरोंचा है, तो उसे तुरंत घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोना चाहिए और डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके ग्लोबल पार्टनर्स ने कुत्तों से फैलने वाले रेबीज से इंसानों की मौत को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वे वन हेल्थ अप्रोच अपनाते हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर कुत्तों का टीकाकरण, पीईपी तक पहुंच सुनिश्चित करना, हेल्थ वर्करों की ट्रेनिंग, बेहतर निगरानी और कम्युनिटी अवेयरनेस (सामुदायिक जागरूकता) के जरिए काटने से बचाव शामिल है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इंसानों में रेबीज के 99 प्रतिशत मामलों में वायरस के फैलने के लिए कुत्ते जिम्मेदार होते हैं। 5 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चे अक्सर इसका शिकार होते हैं। रेबीज स्तनधारी जीवों को संक्रमित करता है, जिनमें कुत्ते, बिल्लियां, पालतू जानवर और जंगली जानवर शामिल हैं।
रेबीज लोगों और जानवरों में लार के जरिए फैलता है, आमतौर पर काटने, खरोंचने या म्यूकोसा (जैसे आंख, मुंह या खुले घाव) के सीधे संपर्क में आने से होता है। एक बार लक्षण दिखने के बाद 100 प्रतिशत जानलेवा होता है। इस बीमारी की वजह से हर वर्ष लगभग 82,448 करोड़ रुपया वैश्विक खर्च होता है। अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों पर रेबीज मौजूद है।
अमेरिका में कुत्तों से फैलने वाला रेबीज काफी हद तक नियंत्रित है, वहां अब खून पीने वाले चमगादड़ इंसानों में रेबीज फैलने का मुख्य कारण हैं। चमगादड़, लोमड़ी, रैकून, स्कंक और अन्य जंगली स्तनधारी जानवरों के संपर्क में आने के बाद इंसानों की मौत बहुत कम होती है, और कृंतक (जैसे चूहे) के काटने से रेबीज फैलने की कोई जानकारी नहीं है।
रेबीज के लक्ष्णों में बुखार, दर्द और घाव वाली जगह पर असामान्य या अस्पष्ट झनझनाहट, चुभन या जलन जैसा महसूस होता है। जैसे-जैसे वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में फैलता है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सूजन होने लगता है। रेबीज के रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर कुत्तों (पिल्लों सहित) का टीकाकरण करना सबसे किफायती तरीका है। कुत्तों में टीकाकरण करने से बीमारी जड़ से ही रुक जाती है।
17 सितंबर 2026 तक, 3 देशों (भूटान, चिली और मैक्सिको) को डब्ल्यूएचओ ने कुत्तों से फैलने वाले इंसानी रेबीज को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर खत्म करने के लिए मान्यता दी है।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नटराजासन से पहले जरूर करें ये 7 पूर्वाभ्यास, इन स्टेप्स से शरीर को बनाएं सेहतमंद
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। योग में किसी भी कठिन आसन को सीधे करने से पहले शरीर को उसके लिए तैयार करना बहुत जरूरी होता है, जिसे पूर्व-अभ्यास कहा जाता है। नटराजासन पूरे शरीर का संतुलन एक पैर पर होता है, इसलिए इसे करने के लिए पैरों, कूल्हों, कमर, कंधों और छाती में पर्याप्त लचीलापन होना चाहिए। भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित एक बेहद सुंदर, संतुलन और एकाग्रता वाला आसन है। इस आसन को बिना किसी तैयारी के करने से चोट लगने का डर रहता है। इसलिए नटराजासन का अभ्यास करने से पहले कुछ सरल आसनों और स्ट्रेचिंग से शरीर को खोलना और संतुलन साधना आवश्यक है।
सूर्यनमस्कार, वृक्षासन, आंजनेयासन, धनुरासन, भुजंगासन, वीरभद्रासन, एकपाद राजकपोतासन कुछ ऐसे योगाभ्यास हैं, जिन्हें नटराजासन से पूर्व करना चाहिए।
सूर्य नमस्कार- नटराजन से पूर्व सूर्य नमस्कार शरीर को वार्म-अप, लचीलापन बढ़ाने और संतुलन के लिए तैयार करने के लिए किया जाता है। नटराजासन एक मध्यम स्तर का, संतुलन आधारित और पीठ को पीछे की ओर मोडने वाला कठिन योगासन है। इसे सीधे करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट आ सकती है।
वृक्षासन- एक पौर पर संतुलन बनाने की क्षमता बढ़ाता है, जो नटराजासन के लिए सबसे बुनियादी जरूरत है।
आंजनेयासन- यह आसन शरीर को नटराजासन की गहरी और कठिन मुद्रा के लिए पूरी तरह तैयार करता है। साथ ही, यह हिप फ्लेक्सर्स और जांघों के सामने के हिस्से को गहरा स्ट्रेच देता है।
धनुरासन- योग विज्ञान के अनुसार, धनुरासन एक फाउंडेशन बैकबेंड (बुनियादी पीछे झुकने वाला आसन) है जो शरीर को नटराजासन जैसे अधिक कठिन और एडवांस संतुलन वाले आसन के लिए पूरी तरह तैयार करता है। यह कंधों, छाती और जांघों को एक साथ स्ट्रेच करता है।
भुजंगासन- नटराजन आसन में एक पैर पर खड़े होकर शरीर को पीछे की ओर खींचना होता है, जिसके लिए मजबूत पीठ और बेहतर संतुलन की आवश्यकता होती है। भुजंगासन शरीर के पिछले हिस्से को मजबूत कर इस कठिन संतुलन को आसान बनाता है।
वीरभद्रासन- वीरभद्रासन शरीर को नटराजासन जैसी कठिन और गहरी बैकबेंड स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है।। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है, जिससे नटराजासन करते समय पीठ के निचले हिस्से में चोट लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
एकपाद राजकपोतासन - यह कूल्हों को खोलता है, जिससे पैर को पीछे और ऊपर की तरफ ले जाना आसान हो जाता है। यह आसन नटराजासन के लिए एक अनिवार्य प्रारंभिक (प्रिपरेटरी) आसन के रूप में काम करता है। नटराजासन एक बेहद कठिन, संतुलन और गहरे बैकबेंड (पीछे झुकने) वाला आसन है, जिसके लिए शरीर का पूरी तरह से खुला होना जरूरी है।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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