एशियन गेम्स 2026 में भारत को एक ही इवेंट में मिले 2 मेडल, जेवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने सिल्वर और रोहित यादव ने जीता ब्रॉन्ज
Asian Games 2026: जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. मेंस जेवलिन थ्रो के फाइनल मुकाबले में भारत के दो युवा स्टार एथलीट्स, यशवीर सिंह और रोहित यादव ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए डबल पोडियम फिनिश हासिल की और देश के लिए दो मेडल जीते. चोट के कारण स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय युवाओं ने पोडियम पर तिरंगा लहराकर यह साबित कर दिया कि देश में जेवलिन थ्रो का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है. इस कड़े मुकाबले में यशवीर सिंह ने सिल्वर मेडल और रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया, जबकि श्रीलंका के धाकड़ एथलीट रुमेष पाथिराज ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया.
यशवीर सिंह ने आखिरी प्रयास में दागा 'पर्सनल बेस्ट'
चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह टीम में शामिल किए गए 24 वर्षीय यशवीर सिंह ने इस बड़े मंच पर खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शुरुआत में एक सधे हुए प्रदर्शन के बाद, यशवीर ने अंतिम थ्रो में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. उनके आखिरी तीन थ्रो क्रमशः 84.31 मीटर और 85.14 मीटर रहे, लेकिन असली धमाका उनके छठे और अंतिम प्रयास में हुआ. इस आखिरी प्रयास में उन्होंने 85.72 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर न सिर्फ सिल्वर मेडल पक्का किया, बल्कि अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया.
DOUBLE PODIUM FOR INDIA IN JAVELIN! ????????
— The Khel India (@TheKhelIndia) September 28, 2026
Yashvir Singh comes up with a Personal Best of 85.72m to win ????, while Rohit Yadav throws 84.35m to take ????.
???? Yashvir Singh - 85.72m PB
???? Rohit Yadav - 84.35m
TWO INDIANS & TWO MEDALS FOR INDIA! pic.twitter.com/5SSsE3aKZj
रोहित यादव ने जीता ब्रॉन्ज मेडल
भारत के दूसरे दमदार थ्रोअर रोहित यादव ने भी फाइनल मुकाबले में बेहद आक्रामक खेल दिखाया. उन्होंने फाइनल के आधे सफर तक बढ़त बनाए रखी थी. रोहित ने पूरे मैच के दौरान बेहतरीन निरंतरता दिखाई और उनके चार थ्रो 82 मीटर की रेखा को पार कर गए. आखिरकार, रोहित यादव ने 84.35 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया. इस तरह एक ही इवेंट में भारत ने सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल को अपने नाम कर लिया.
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— Sportstar (@sportstarweb) September 28, 2026
India may not have had Neeraj Chopra at the Asian Games, but Yash Vir Singh and Rohit Yadav made up for his absence with a silver and a bronze, respectively in the men's javelin throw event.
Yash Vir threw 85.72m while Rohit's best… pic.twitter.com/PA8iB4Kjy6
श्रीलंका के रुमेष पाथिराज ने जीता गोल्ड मेडल, अरशद नदीम चूके
दुनिया के नंबर-1 जेवलिन थ्रोअर और मौजूदा फॉर्म में चल रहे श्रीलंका के रुमेष पाथिराज इस मुकाबले में भी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उतरे थे. उन्होंने 88.55 मीटर के विशाल थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम कर अपनी बादशाहत बरकरार रखी. वहीं, पाकिस्तान के स्टार एथलीट अरशद नदीम इस बार पोडियम से चूक गए और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा.
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उत्तराखंड में खाली जमीन पर होगी जड़ी-बूटियों की खेती, किसानों को मिलेगा नया विकल्प
Uttarakhand News: उत्तराखंड के किसानों के लिए जड़ी-बूटी की खेती आय का नया विकल्प बनने जा रही है. राज्य में पहली बार बड़े स्तर पर निजी कृषि भूमि को औषधीय और सगंध पौधों की खेती से जोड़ने की पहल की गई है. इसके तहत किसान अपनी खाली और परती पड़ी जमीन पर जंगली जड़ी-बूटियों की खेती कर सकेंगे. योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ किसानों को पारंपरिक खेती के अतिरिक्त कमाई का विकल्प उपलब्ध कराना है.
जड़ी-बूटियों की खेती के लिए राज्य के 11 जिलों में आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इच्छुक किसान 25 अक्टूबर तक अपने नजदीकी वन विभाग कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं. हर जिले में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं. हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर को छोड़कर अन्य 11 जिलों में यह प्रक्रिया शुरू की गई है.
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किसानों को खेती के लिए मिलेगा नया विकल्प
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जड़ी-बूटी की खेती को किसानों के लिए उपयोगी विकल्प माना जा रहा है. पहाड़ी क्षेत्रों में खेती की जमीन अक्सर छोटी-छोटी जोत में बंटी होती है. इसके अलावा कई जगह खेती की जमीन खाली या परती पड़ी रहती है. ऐसे में औषधीय और सगंध पौधों की खेती के जरिए इन जमीनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.
इस पहल से किसानों को अपनी कृषि भूमि से अतिरिक्त आय हासिल करने का अवसर मिल सकता है. साथ ही, स्थानीय स्तर पर जड़ी-बूटी आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं.
छोटे किसान भी समूह बनाकर कर सकेंगे खेती
योजना में छोटे किसानों को भी ध्यान में रखा गया है. व्यक्तिगत रूप से जड़ी-बूटी की खेती करने के लिए किसान के पास कम से कम दो हेक्टेयर जमीन होना जरूरी है. वहीं, जिन किसानों के पास इतनी जमीन नहीं है, वे समूह बनाकर सामूहिक खेती के लिए आवेदन कर सकते हैं. सामूहिक खेती के लिए अधिकतम 30 हेक्टेयर भूमि का प्रावधान रखा गया है. इसके अलावा स्वयं सहायता समूह, फर्म, पंजीकृत कंपनियां और सहकारी समितियां भी इस योजना में शामिल हो सकती हैं. इससे अलग-अलग वर्गों को जड़ी-बूटी उत्पादन से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
पांच हजार वन पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य
सरकार ने राज्य की करीब पांच हजार वन पंचायतों को भी इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है. इससे योजना का दायरा केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण समुदायों को भी इससे जोड़ा जा सकेगा. उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों की उपलब्धता और पारंपरिक ज्ञान पहले से मौजूद है. ऐसे में खेती के जरिए औषधीय पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर एक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित होने की संभावना है. इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए भी काम के अवसर बन सकते हैं.
जंगली जानवरों से फसल नुकसान की चुनौती का विकल्प
पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों के सामने बंदर, जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों से फसलों को नुकसान की समस्या भी रहती है. इसकी वजह से कई किसान पारंपरिक खेती से दूरी बनाने लगे हैं. ऐसे में औषधीय और सगंध पौधों की खेती को वैकल्पिक कृषि गतिविधि के तौर पर बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. अगर किसान इस खेती को अपनाते हैं तो परती जमीन का उपयोग बढ़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है. गांव में रोजगार और आय के अवसर बढ़ने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज होने की उम्मीद है.
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