दावोस में वर्ल्ड इकोनमिक फोरम यानी डब्ल्यूईएफ की बैठक चल रही थी। करीब 20 देशों के नेता दुनिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट्स और ग्लोबल पावर सेंटर्स मौजूद थे। इसी मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए अंतरराष्ट्रीय मंच का ऐलान किया बोर्ड ऑफ पीस का। ट्रंप के मुताबिक इस बोर्ड का मकसद होगा दुनिया में शांति स्थापित करना। संघर्षों को रोकना और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना। कागजों में यह ऐलान जितना गंभीर था उतना ही मजाक में बदल गया जब माइक एलन मस्क को मिला। दावोस में ही ब्लैक रॉक के सीईओ लेरी फिंग के साथ एक पैनल डिस्कशन के दौरान एलन मस्क से ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस पर सवाल पूछा गया और फिर मस्क ने मुस्कुराते हुए शब्दों से खेला। यह ट्रंप की नीतियों पर सीधा सटीक और सार्वजनिक हमला था। मस्क का इशारा साफ था। डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। उन्होंने इसे अमेरिका की स्ट्रेटजी जरूरत बताया था। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने इस प्रस्ताव को सीधे-सीधे खारिज कर दिया।
ट्रंप का रवैया हमेशा आक्रामक रहा। आर्कटिक पर अमेरिकी पकड़, मिनरल्स, मिलिट्री पोजीशनिंग। यही वजह है कि जब ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस की बात कर रहे हैं तो मस्क जैसे लोग पूछते हैं शांति या फिर जमीन का टुकड़ा। अब मस्क ने वेनेजुएला का नाम भी यूं नहीं लिया। डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के खुले समर्थक रहे हैं। माद्रो सरकार पर प्रतिबंध, विपक्ष को समर्थन, तेल और संसाधनों में अमेरिकी दखल। मस्क का व्यंग यह था कि जहां ट्रंप की विदेश नीति रिजीम चेंज और टेरिटोरियल इंटरेस्ट से जुड़ी रही हो, वह अचानक शांति का बोर्ड बनाए, तो सवाल तो उठना लाजमी है। यह सिर्फ एक चुटकुला नहीं था। यह इशारा था ग्लोबल एलट बिजनेस लीडर्स, टेक इंडस्ट्री और अब ट्रंप की वैश्विक नीतियों को सवालों के घेरे में रख रहे हैं। जब दुनिया युद्ध, यूक्रेन, गाजा, चीन, अमेरिका तनाव से जूझ रही हो और उसी वक्त शांति के नाम पर जमीन और सत्ता की बात हो तो भरोसा डगमगाता है।
अब असली सवाल है कि क्या बोर्ड ऑफ पीस वाकई शांति के लिए है या फिर यह कूटनीतिक दबाव, अमेरिकी हित और ग्लोबल नैरेटिव कंट्रोल का नया तरीका है। तो एलन मस्क ने बिना लंबा भाषण दिए बस एक लाइन में ही पूरी बहस छेड़ दी। खैर दाऊस का मंच अक्सर गंभीर घोषणाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार एक मजाक ने पूरी पॉलिटिक्स खोल दी। पीस या फिर पीस? यह सवाल अब सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है बल्कि अमेरिका की वैश्विक सोच पर सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
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न्यूजीलैंड पर भारत की जीत के बाद, पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव की सनसनीखेज पारियों की सराहना की और ईशान किशन की घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी बरकरार रखने के लिए उनकी प्रशंसा की। रायपुर में खेले गए मैच किसी वीडियो गेम क्रिकेट की तरह थे, जहां 209 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 6 विकेट गिरने के बाद, ईशान और सूर्यकुमार ने बेबस न्यूजीलैंड के गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ चौकों और छक्कों की झड़ी लगा दी। ओस की मौजूदगी से परिस्थितियां बल्लेबाजी के लिए और भी अनुकूल हो गईं। भारत ने सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है, जिसमें ईशान की शानदार फॉर्म और सूर्यकुमार की वापसी भारत के लिए दो बड़ी सकारात्मक बातें हैं।
यह सूर्यकुमार का अक्टूबर 2024 के बाद पहला अर्धशतक था। 2025 में बल्ले से उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा, उन्होंने 19 पारियों में मात्र 218 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 13.62 और स्ट्राइक रेट 120 के आसपास रहा। दूसरी ओर, दो साल से अधिक समय बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे ईशान ने वहीं से शुरुआत की जहां उन्होंने झारखंड की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (एसएमएटी) जीत के दौरान छोड़ा था। उस ट्रॉफी में उन्होंने 10 पारियों में 57.44 के औसत और 197 से अधिक के स्ट्राइक रेट से 517 रन बनाकर सर्वोच्च स्कोर किया था, जिसमें दो शतक और एक अर्धशतक शामिल थे।
अपने यूट्यूब चैनल 'ऐश की बात' पर अश्विन ने कहा, "ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी की। बस वाह! उन्होंने ठीक वैसे ही बल्लेबाजी की जैसे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में की थी। उन्होंने वहां चयन की चिंता नहीं की थी। यहां भी, वे शतक बना सकते थे लेकिन उन्होंने खेलना जारी रखा। यही बात उन्हें दूसरों से अलग करती है।" अश्विन ने यह भी कहा कि टीम इंडिया पिछले डेढ़ दशक से टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में "नरम क्रिकेट" खेल रही थी, जिसमें उपलब्धियों पर अधिक और पावरप्ले का अधिकतम लाभ उठाने पर कम ध्यान दिया जाता था। लेकिन अब टीम इंडिया न केवल सही तरीके से टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही है, बल्कि बाकी सभी टीमों से दस गुना बेहतर खेल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत बल्लेबाजी पंक्ति के कारण टी20 विश्व कप में उतरने वाली टीमों में डर का माहौल रहेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में हमने टी20 क्रिकेट में कई बार नरम रुख अपनाया है। हम खेल को आगे नहीं बढ़ा पाए। हमने पावरप्ले का फायदा उठाने की कोशिश नहीं की। टी20 टीम में जो भी जरूरत होती है, हम अब उसमें दस गुना बेहतर कर रहे हैं, और वो भी सिर्फ एक बल्लेबाज की कमी से। पांच-छह साल पहले, अगर हम 6 विकेट पर 2 रन बना लेते, तो हम 43 रन पर 2 या 48 रन पर 2 रन बनाकर पावरप्ले खत्म कर देते। भारत ने कभी पलटवार नहीं किया। बिना कोई विकेट खोए 2 विकेट गिरने के बाद पावरप्ले में 75 रन बनाए। कोई यह नहीं कहेगा कि यह अच्छी टीम है, यह तो चैम्पियनशिप जीतने वाली टीम है। इस बल्लेबाजी लाइन-अप को देखकर सभी टीमें डरेंगी।
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