अधूरा रहा गया था Lata Mangeshkar पहला प्यार!, जिसकी वजह से ताउम्र कुंवारी रहीं 'स्वर कोकिला'?
Lata Mangeshkar Birth Anniversary: ‘स्वर कोकिला’ के नाम से मशहूर लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से कई दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया. उन्होंने अपने लंबे करियर में अलग-अलग भाषाओं में हजारों गाने रिकॉर्ड किए और भारतीय संगीत की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे पाना हर किसी के लिए संभव नहीं. संगीत में उनके अतुलनीय योगदान (Incomparable Contribution) के लिए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से लेकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ तक से नवाजा गया.
लता मंगेशकर ने प्रोफेशनल जिंदगी में बेशुमार कामयाबी हासिल की लेकिन उनकी निजी जिंदगी हमेशा लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय रही. खासकर उनकी शादी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे. लता मंगेशकर ने कभी शादी नहीं की और पूरी जिंदगी संगीत को दे दी. लेकिन क्या इसके पीछे सिर्फ उनका करियर था या उनकी जिंदगी में कभी कोई ऐसा शख्स भी आया था, जिसे वो अपना हमसफर बना सकती थीं? आइए जानते हैं इस कहानी के बारे में.
लता मंगेशकर ने क्यों नहीं की शादी?
लता मंगेशकर ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा काफी हद तक निजी ही रखा. उन्होंने कभी शादी नहीं की और अपने परिवार, संगीत और काम को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाया. शादी को लेकर जब उनसे सवाल किया जाता था तो वो अक्सर इसे अपनी किस्मत और अपने जीवन के उद्देश्य से जोड़कर देखती थीं. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शादी न करने के फैसले पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें लगता है कि भगवान ने उन्हें एक खास काम सौंपा था और वो अपने काम से संतुष्ट थीं. उनके लिए संगीत सिर्फ उनका पेशा नहीं, बल्कि जिंदगी का एक बड़ा मकसद बन चुका था. लता मंगेशकर ये भी मानती थीं कि जिंदगी में दुख और मुश्किलें हर किसी के हिस्से में आती हैं. हालांकि, वो दूसरों को तकलीफ में देखकर ज्यादा परेशान होती थीं और जरूरतमंद लोगों की मदद करने में उन्हें खुशी मिलती थी.
क्या लता मंगेशकर को हुआ था प्यार?
लता मंगेशकर ने भले ही शादी नहीं की, लेकिन उनकी जिंदगी में प्यार की चर्चा भी होती रही है. मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने किस्सों के मुताबिक, 1960 के दशक में उनकी दोस्ती राजस्थान के डूंगरपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले राज सिंह डूंगरपुर से हुई थी. राज सिंह डूंगरपुर का जन्म 1935 में हुआ था. वो क्रिकेट के बेहद शौकीन थे और उन्होंने रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन का रेप्रेसेंटेट भी किया था. कानून की पढ़ाई के लिए वो मुंबई आए थे, लेकिन क्रिकेट से उनका लगाव लगातार बना रहा. बताया जाता है कि मुंबई में उनकी दोस्ती लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से हुई. दोनों अक्सर क्रिकेट मैच देखने जाया करते थे. इसी दोस्ती के जरिए राज सिंह की लता मंगेशकर से भी मुलाकात और नजदीकियां बढ़ीं.
राज सिंह से शादी क्यों नहीं हो पाई?
लता मंगेशकर और राज सिंह डूंगरपुर के रिश्ते को लेकर कई तरह की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं. कहा जाता है कि दोनों एक-दूसरे के काफी करीब थे, लेकिन ये रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाया. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राज सिंह के परिवार को ये रिश्ता मंजूर नहीं था. इसके पीछे कथित तौर पर पारिवारिक और सामाजिक कारण बताए जाते हैं. हालांकि, लता मंगेशकर ने खुद कभी इस रिश्ते को लेकर खुलकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया. यही वजह है कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी इस कहानी में कई बातें आज भी सिर्फ किस्सों और मीडिया रिपोर्ट्स तक सीमित हैं. लता मंगेशकर ने हमेशा अपनी निजी भावनाओं को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा. जब उनसे कभी प्यार या निजी रिश्तों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने रहस्यमय अंदाज में जवाब दिया. उनका मानना था कि जिंदगी की कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान अपने दिल तक ही सीमित रखना चाहता है.
किस्मत पर बहुत भरोसा करती थीं लता दीदी
लता मंगेशकर किस्मत में विश्वास रखती थीं. उनका मानना था कि इंसान अपने भाग्य से पूरी तरह बच नहीं सकता लेकिन अपने अच्छे विचारों और कर्मों के जरिए मुश्किल हालात का सामना जरूर कर सकता है. वो भगवान राम का उदाहरण देते हुए कहती थीं कि भगवान राम भी राजा के बेटे होने के बावजूद 14 साल के वनवास पर गए. उनके मुताबिक, ये उनकी किस्मत थी लेकिन इस दौरान उन्होंने अच्छे कर्म किए और अंत में उन्हें फिर से सुख और सम्मान मिला. लता मंगेशकर के लिए जिंदगी का मतलब सिर्फ खुशियां हासिल करना नहीं था. उन्होंने अपने संगीत, परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को हमेशा प्राथमिकता दी.
28 सितंबर को याद की जाती हैं स्वर कोकिला
28 सितंबर का दिन लता मंगेशकर के चाहने वालों के लिए बेहद खास है. इसी दिन साल 1929 में इंदौर में उनका जन्म हुआ था. उन्होंने अपनी आवाज के दम पर भारतीय संगीत को दुनिया भर में पहचान दिलाई. 6 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर ने 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी आवाज आज भी करोड़ों लोगों के बीच जिंदा है.
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एआईआईबी की बैठक में भाग लेने के लिए वित्त मंत्री सीतारमण कतर पहुंचीं
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए कतर पहुंच गई हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई।
दोहा के हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कतर में भारत के राजदूत श्रीकर रेड्डी कोप्पुला ने उनका स्वागत किया।
वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त मंत्री अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भाग लेंगी।”
वह एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ-साथ जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्षों के साथ अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी।
वित्त मंत्री एआईआईबी में भारत के गवर्नर के रूप में बैंक की वार्षिक बैठक में भाग लेंगी।
भारत एआईआईबी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है।
आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी बातचीत करेंगी।
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जो एशिया और दुनिया भर में आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए सड़कों, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रणालियों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए वित्त पोषण करता है। बीजिंग में मुख्यालय वाले इस बैंक जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की पूंजी के साथ काम शुरू किया था। बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं।
बैंक के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करना, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क को बेहतर बनाना और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी निवेशकों के साथ भी काम करता है।
भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध हैं। भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का एलएनजी समझौता है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
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