भोपाल से लखनऊ का सफर अब सिर्फ 7 घंटे में, बुंदेलखंड से होकर गुजरेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
Bhopal Lucknow Expressway: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क यात्रा करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. दोनों राज्यों की राजधानियों को आपस में जोड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. भोपाल से लखनऊ के बीच बनने वाला यह नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आने वाले दिनों में दोनों राज्यों के बीच जीवन रेखा बनकर उभरेगा. इस महामार्ग के शुरू होने से सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय में देखने को मिलेगा.
अभी जहां लोगों को भोपाल से लखनऊ पहुंचने में लगभग चौदह से पंद्रह घंटे का भारी समय लग जाता है, वहीं इस नए एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद यह दूरी केवल सात घंटे में पूरी हो सकेगी. सफर के समय में सीधे पचास फीसदी की कमी आने से आम यात्रियों के साथ-साथ व्यापारियों को भी बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है.
आधे समय में पूरा होगा दोनों राजधानियों का सफर
फिलहाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाने के लिए गाड़ियों को पुराने मार्गों और झांसी के रास्ते होकर गुजरना पड़ता है. इन पुराने रास्तों पर जगह-जगह लगने वाले ट्रैफिक जाम और घुमावदार सड़कों की वजह से रफ्तार काफी धीमी रहती है. नए प्रोजेक्ट के तहत बनने वाला यह मार्ग चार से छह लेन वाला पूरी तरह से कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे होगा. इसका मतलब यह है कि इस पर गाड़ियां सौ से एक सौ बीस किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से बिना किसी बाधा के दौड़ सकेंगी. आधुनिक तकनीक और बेहतर बनावट के कारण इस मार्ग पर लंबी दूरी तय करना बेहद सुरक्षित और आरामदायक साबित होगा.
बुंदेलखंड के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
लगभग छह सौ किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर केवल दो राजधानियों को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि इसके दायरे में आने वाले कई प्रमुख शहरों की सूरत भी बदल देगा. यह पूरा मार्ग मध्य प्रदेश के भोपाल, विदिशा, सागर और छतरपुर से होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगा. इसके बाद यह उत्तर प्रदेश के महोबा, कबरई, हमीरपुर और कानपुर से जुड़ते हुए सीधे लखनऊ तक अपनी पहुंच बनाएगा. इस पूरे रास्ते में बुंदेलखंड का एक बड़ा इलाका शामिल है, जो लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की राह देख रहा था. एक्सप्रेसवे के निर्माण से इस पिछड़े इलाके में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
तीन चरणों में पूरा किया जा रहा है निर्माण कार्य
इस विशाल प्रोजेक्ट को सुचारू रूप से धरातल पर उतारने के लिए कुल तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है. दोनों राज्यों के बीच फैले होने के कारण जमीन अधिग्रहण और तकनीकी औपचारिकताओं को ध्यान में रखकर यह योजना बनाई गई है.
पहले चरण के तहत उत्तर प्रदेश में कानपुर आउटर रिंग रोड पर स्थित रमाईपुर से लेकर महोबा जिले के कबरई तक का निर्माण कार्य शामिल है. यह हिस्सा करीब एक सौ बारह से एक सौ अठारह किलोमीटर लंबा है और पूरी तरह से ग्रीनफील्ड रूट पर बनेगा. इस पहले हिस्से के निर्माण पर लगभग पांच हजार सात सौ सत्तावन करोड़ रुपये की भारी लागत का अनुमान लगाया गया है.
दूसरे चरण में महोबा के कबरई से मध्य प्रदेश के सागर के बीच लगभग दो सौ तेईस किलोमीटर लंबी सड़क तैयार की जाएगी. यह पूरा भाग बुंदेलखंड के भीतरी इलाकों से गुजरेगा, जिससे आसपास के कस्बों को सीधे बड़े शहरों की मुख्य धारा से जुड़ने का मौका मिलेगा.
तीसरे और अंतिम चरण में सागर से भोपाल के बीच करीब एक सौ पचास किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया जाएगा. यह खंड भोपाल को सीधे सागर और फिर उत्तर प्रदेश की सीमा से जोड़ेगा. कानपुर पहुंचने के बाद वाहन चालक आउटर रिंग रोड के जरिए सीधे निर्माणाधीन कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे, जिससे लखनऊ शहर के अंदर दाखिल होते समय किसी भी ट्रैफिक जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा.
जमीन अधिग्रहण और निर्माण से जुड़ा ताजा अपडेट
केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के अंतर्गत इस पूरे कॉरिडोर के काम में हाल के दिनों में खासी तेजी आई है. कानपुर से कबरई वाले ग्रीनफील्ड हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहण का लगभग नब्बे प्रतिशत काम सफलता के साथ पूरा किया जा चुका है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के सागर, विदिशा और उत्तर प्रदेश के महोबा क्षेत्र में चार लेन चौड़ीकरण तथा बाईपास निर्माण को लेकर गजट नोटिफिकेशन भी जारी किए जा चुके हैं.
इस पूरे मार्ग को इस तरह डिजाइन किया गया है कि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को आने-जाने में कोई असुविधा न हो. इसी वजह से एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह ऊंचे एलिवेटेड हिस्से, अंडरपास और सर्विस रोड बनाए जा रहे हैं ताकि मुख्य मार्ग पर गाड़ियों की तेज गति पर कोई असर न पड़े. जल्द ही इस महामार्ग के बाकी हिस्सों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिसके बाद मैदानी काम और तेज गति पकड़ेगा.
यह भी पढ़ें: टोल टैक्स में 40% तक की भारी छूट! हाईवे पर यात्रा करने वालों के लिए NHAI का बड़ा फैसला; जान लें नया नियम
बेंगलुरु : एयरपोर्ट पर दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। गुवाहाटी से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट का बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते समय पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। एयरलाइन ने रविवार को बताया कि तेज और झोंकेदार हवाओं के बीच लैंडिंग के दौरान विमान का रनवे से असामान्य संपर्क हुआ।
इसके बाद विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और सभी यात्री बिना किसी परेशानी के विमान से बाहर आ गए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
एयरपोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, इंडिगो की फ्लाइट 6ई 6542 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहली बार उतरने की कोशिश के दौरान दोबारा उड़ान भरनी पड़ी।
दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया।
एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, गुवाहाटी से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई 6542 को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तेज और झोंकेदार हवाओं के बीच उतरते समय असामान्य रनवे संपर्क का सामना करना पड़ा।
सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और विमान से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं।
इंडिगो ने अपने बयान में कहा, तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी गई है और विमान की जरूरी जांच की जा रही है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद विमान दोबारा उड़ान भरेगा। हमेशा की तरह हमारे यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
विमान को इसके बाद बेंगलुरु से कोयंबटूर की उड़ान भरनी थी। उड़ान सेवाओं में परेशानी न हो, इसके लिए इंडिगो ने दूसरे विमान की व्यवस्था की।
पिछले सप्ताह इंडिगो का एक बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान 250 से ज्यादा यात्रियों को लेकर लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण विमान को वापस हीथ्रो लौटना पड़ा।
आपात स्थिति घोषित की गई, जिसके बाद विमान को लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरने के लिए प्राथमिकता दी गई। सभी यात्री सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकल गए।
लंदन से आई रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान भरने के बाद पायलटों को बोइंग ड्रीमलाइनर विमान में धुएं का पता चला। इसके बाद पायलटों ने हीथ्रो लौटने का फैसला किया। चालक दल ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को आपात स्थिति की जानकारी दी।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, लंदन से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई4 हीथ्रो से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद वापस लौट आई।
हालांकि, इंडिगो ने बोइंग विमान में आई तकनीकी समस्या के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी, जिसकी वजह से पायलटों को विमान वापस लाने का फैसला करना पड़ा। एयरलाइन ने कहा, हमारे यात्रियों, चालक दल और विमान की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






