संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर मौका मिला तो निभाएंगे जिम्मेदारी: ताजिकिस्तान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर मौका मिला तो निभाएंगे जिम्मेदारी: ताजिकिस्तानभारतीय रेल का नया अवतार, पटरियों पर दौड़ी देश की पहली LNG ट्रेन; प्रदूषण और खर्च दोनों में भारी कटौती
Amit Shah Launches Indias First LNG Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है. देश की पहली पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक तकनीक से लैस एलएनजी ट्रेन अब पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती में आयोजित एक भव्य समारोह में देश की पहली एलएनजी आधारित डुअल फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
यह कदम भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. इस खास मौके पर गृह मंत्री ने 1542 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली विभिन्न महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया.
दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हुआ भारत
लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी से ट्रेनों को चलाने की तकनीक अब तक केवल अमेरिका, रूस, चीन, कनाडा और स्पेन जैसे विकसित देशों के पास ही उपलब्ध थी. अब भारत भी इस आधुनिक और ताकतवर तकनीक को अपनाने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में गर्व से शामिल हो गया है. यह पूरी तरह से एक क्रांतिकारी बदलाव है, जिससे भारतीय रेल का चेहरा बदल जाएगा. इस ट्रेन में डुअल फ्यूल तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो ठीक उसी तरह काम करती है जैसे सड़कों पर चलने वाली हाइब्रिड कारें पेट्रोल और सीएनजी दोनों पर एक साथ काम करती हैं.
अहमदाबाद में देश की पहली LNG ट्रेन, साबरमती रेलवे स्टेशन के नए स्वरूप व मेंटेनेंस शेड के शुभारंभ से लाइव...
— Amit Shah (@AmitShah) September 27, 2026
અમદાવાદમાં દેશની પ્રથમ LNG ટ્રેનનો શુભારંભ, સાબરમતી રેલવે સ્ટેશનના પુન:વિકસિત સ્વરૂપનું લોકાર્પણ તેમજ WAG 12 મેઈન્ટેનન્સ શેડના ઉદ્ઘાટનથી લાઈવ. https://t.co/3JclEQuVge
इंजन की बनावट और ईंधन की भारी बचत
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ट्रेन का शक्तिशाली इंजन पूरी तरह से केवल महंगे डीजल पर निर्भर नहीं रहता है. यह इंजन जरूरत के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत डीजल की जगह सस्ती और स्वच्छ एलएनजी गैस का इस्तेमाल करता है. अहमदाबाद रेल मंडल के साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में 1400 एचपी क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को इस डुअल फ्यूल तकनीक में बहुत ही कुशलता से बदला गया है. रेलवे द्वारा किए गए 2000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के कड़े फील्ड ट्रायल में यह साबित हो चुका है कि एक पावर कार से साल भर में करीब 11.9 लाख रुपये की बचत होगी. वहीं 8 कोच वाली पूरी ट्रेन से सालाना लगभग 23.9 लाख रुपये के ईंधन खर्च की सीधी बचत की जा सकेगी.
साबरमती से मेहसाणा के बीच पहली सफल दौड़
उद्घाटन के बाद इस 8 कोच वाली नॉन एसी चेयर कार ट्रेन को साबरमती से मेहसाणा के बीच पहली यात्रा के लिए रवाना किया गया. इस ट्रेन के नियमित चलने से न केवल यात्रियों का सफर आसान और सस्ता होगा, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और हानिकारक कणों के उत्सर्जन में भी बहुत बड़ी कमी दर्ज की जाएगी. इससे रेलवे ट्रैक के आसपास का वातावरण स्वच्छ बना रहेगा और पर्यावरण को भारी नुकसान से बचाया जा सकेगा. यह पहल आने वाले समय में देश के अन्य रेल मंडलों के लिए भी एक बड़ा मॉडल साबित होगी.
साबरमती में बना 700 करोड़ का विशाल लोकोमोटिव शेड
देश के भारी माल ढुलाई नेटवर्क को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए साबरमती में 700 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल और आधुनिक डब्ल्यूएजी 12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड तैयार किया गया है. यह अत्याधुनिक शेड 12000 एचपी की जबरदस्त ताकत वाले 300 भारी इलेक्ट्रिक इंजनों की नियमित देखरेख और तकनीकी मरम्मत करने में सक्षम है. इस उन्नत शेड के बनने से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर मालगाड़ियों के संचालन में होने वाली देरी खत्म होगी और इंजनों की उपलब्धता हर समय बनी रहेगी.
404 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर स्वदेशी कवच की सुरक्षा
रेल यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और हादसों से मुक्त बनाने के लिए अहमदाबाद मंडल के 404 किलोमीटर लंबे व्यस्त रेल मार्ग पर 411 करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली यानी कवच लगाई जा रही है. कवच प्रणाली के सक्रिय होने के बाद रेल हादसों और आमने सामने की भीषण टक्कर का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. यदि कोई ट्रेन निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज दौड़ती है या चालक भूलवश लाल सिग्नल पार कर जाता है, तो यह प्रणाली तुरंत अपने आप आपातकालीन ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोक देती है. इससे मानवीय भूलों के कारण होने वाले सभी बड़े हादसों की आशंका शून्य हो जाती है.
सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार और नई रेल लाइन का काम
ट्रेनों की औसत रफ्तार में बढ़ोतरी करने और समय की बचत के लिए साबरमती, कलोल, भांडू, मोतीदाऊ, सानंद और जखवाड़ा रेल खंडों पर 122.57 किलोमीटर के दायरे में 118.83 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित कर दी गई है. इससे एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर अधिक से अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रेनों की लेटलतीफी हमेशा के लिए दूर होगी.
इसके साथ ही साबरमती और सरखेज के बीच 21 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 313.27 करोड़ रुपये की लागत वाली योजना का शिलान्यास भी किया गया, जिसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. इस नए रेल मार्ग पर 16 छोटे पुल, 13 अंडर ब्रिज, 1 बड़ा पुल और 6 समपार फाटक बनाए जाएंगे, जिससे धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र तक कनेक्टिविटी बेहद मजबूत हो जाएगी.
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