बेंगलुरु : एयरपोर्ट पर दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। गुवाहाटी से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट का बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते समय पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। एयरलाइन ने रविवार को बताया कि तेज और झोंकेदार हवाओं के बीच लैंडिंग के दौरान विमान का रनवे से असामान्य संपर्क हुआ।
इसके बाद विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और सभी यात्री बिना किसी परेशानी के विमान से बाहर आ गए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
एयरपोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, इंडिगो की फ्लाइट 6ई 6542 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहली बार उतरने की कोशिश के दौरान दोबारा उड़ान भरनी पड़ी।
दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया।
एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, गुवाहाटी से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई 6542 को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तेज और झोंकेदार हवाओं के बीच उतरते समय असामान्य रनवे संपर्क का सामना करना पड़ा।
सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और विमान से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं।
इंडिगो ने अपने बयान में कहा, तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी गई है और विमान की जरूरी जांच की जा रही है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद विमान दोबारा उड़ान भरेगा। हमेशा की तरह हमारे यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
विमान को इसके बाद बेंगलुरु से कोयंबटूर की उड़ान भरनी थी। उड़ान सेवाओं में परेशानी न हो, इसके लिए इंडिगो ने दूसरे विमान की व्यवस्था की।
पिछले सप्ताह इंडिगो का एक बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान 250 से ज्यादा यात्रियों को लेकर लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण विमान को वापस हीथ्रो लौटना पड़ा।
आपात स्थिति घोषित की गई, जिसके बाद विमान को लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरने के लिए प्राथमिकता दी गई। सभी यात्री सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकल गए।
लंदन से आई रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान भरने के बाद पायलटों को बोइंग ड्रीमलाइनर विमान में धुएं का पता चला। इसके बाद पायलटों ने हीथ्रो लौटने का फैसला किया। चालक दल ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को आपात स्थिति की जानकारी दी।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, लंदन से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई4 हीथ्रो से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद वापस लौट आई।
हालांकि, इंडिगो ने बोइंग विमान में आई तकनीकी समस्या के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी, जिसकी वजह से पायलटों को विमान वापस लाने का फैसला करना पड़ा। एयरलाइन ने कहा, हमारे यात्रियों, चालक दल और विमान की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी
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बाबरी के भक्त कालनेमि बनकर आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास करेंगे, इनकी साजिशों को सफल नहीं होने देंगे: CM योगी
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राम मंदिर आंदोलन के विरोधियों पर निशाना साधते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सतर्क किया. उन्होंने कहा कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे. बाबरी के भक्त कालनेमि बनकर आंदोलन को अपमानित और बदनाम करने का प्रयास करेंगे. इन्हें पहचानकर इनकी साजिशों को सफल नहीं होने देना है. सीएम योगी ने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर का विरोध करते थे और रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे, आज वही खुद को रामभक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं. यह विश्व हिन्दू परिषद की वैचारिक विजय है. सीएम योगी लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे.
भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई
उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. समारोह में अशोक सिंघल के जीवन, संघर्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़े जाने के बाद करीब 500 वर्षों तक हिंदू समाज ने उसकी मुक्ति के लिए संघर्ष किया. संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं और महिलाओं ने बलिदान दिए. समाज में सामर्थ्य था, लेकिन ताकत बिखरी थी. इसे एक मंच पर लाने का काम अशोक सिंघल ने किया. उन्होंने कहा कि 1982 में विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व मिलने और 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद रामकाज अशोक सिंघल के जीवन का ध्येय बन गया. देश हो या विदेश, वनवासी क्षेत्र हो या दलित बस्ती, उनके मुख पर राम का नाम रहता था. राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम को उन्होंने अपने जीवन में उतारा.
1990 को रामभक्तों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अशोक सिंघल ने राम मंदिर आंदोलन के साथ समाज को एकजुट करने का भी अभियान चलाया. वनवासी और मलिन बस्तियों में एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पूर्वोत्तर के बच्चों की शिक्षा के लिए गोरखनाथ मंदिर स्थित विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय के एक कमरे से भी व्यवस्था शुरू कराई गई. उन्होंने 1990 के अयोध्या आंदोलन को याद करते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार रामभक्तों पर गोलियां चला रही थी, तब अशोक सिंघल सत्ता के सामने नहीं झुके. दो नवंबर 1990 को रामभक्तों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी के बीच भी उनकी सिंह गर्जना सुनाई दी. आज उनके सपनों का साकार स्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में दिखाई दे रहा है.
विशेषज्ञों की टीम प्रमाण जुटा रही
मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि का मामला न्यायालय में पहुंचा तो एक ओर अशोक सिंघल की अधिवक्ताओं, पुरातत्ववेत्ताओं और विषय विशेषज्ञों की टीम प्रमाण जुटा रही थी, दूसरी ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी राम मंदिर के पक्ष में फैसला न आने देने के लिए बाधाएं पैदा कर रहे थे. उन्होंने कांग्रेस पर भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को लेकर न्यायालय में सवाल खड़े करने का भी आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रण मिलने के बावजूद ये लोग नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोट बैंक दिखाई दे रहा था. अशोक सिंघल ने 1980 के दशक में जो ज्योति प्रज्वलित की थी, वह केवल राम जन्मभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारत के मानबिंदुओं की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा और गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने का अभियान था.
कथन और आचरण में अंतर न हो
मुख्यमंत्री योगी ने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और अशोक सिंघल के बीच श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर होने वाली बैठकों को याद किया. उन्होंने कहा कि मंदिर की रचना, आंदोलन की रणनीति और भावी अयोध्या की परिकल्पना पर दोनों चर्चा करते थे. अशोक सिंघल को इसलिए स्मरण किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा उसे करके दिखाया. वाणी तभी मंत्र बनती है, जब कथन और आचरण में अंतर न हो. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कभी उपेक्षित रही अयोध्या में आज राम पथ, धर्म पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ हैं. राम की पैड़ी में सरयू का अविरल और निर्मल जल है. महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना है और अयोध्या सोलर सिटी बन चुकी है.
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