'चीन प्रदर्शनी अर्थव्यवस्था विकास रिपोर्ट 2025' जारी
बीजिंग, 23 जनवरी (आईएएनएस)। 2026 चीन सम्मेलन और प्रदर्शनी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच बुधवार से शुक्रवार तक मध्य चीन के हुपेई प्रांत की राजधानी वुहान में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर चीनी व्यापार संवर्धन संघ (सीसीपीआईटी) ने चीन प्रदर्शनी अर्थव्यवस्था विकास रिपोर्ट 2025 जारी की।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की घरेलू प्रदर्शनियां स्थिर प्रगति की अच्छी गति बनाए हुए हैं, जहां प्रदर्शनियों की संख्या और उनके कुल प्रदर्शनी क्षेत्रफल दोनों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन ने घरेलू स्तर पर कुल 4,095 आर्थिक-व्यापार श्रेणी की प्रदर्शनियों का आयोजन किया, जिनका संयुक्त प्रदर्शनी क्षेत्रफल 15 करोड़ 90 लाख वर्ग मीटर रहा। यह वर्ष 2024 की तुलना में क्रमशः 6.53 और 2.5 की वृद्धि दर्शाता है।
इसके साथ ही, 2025 में विदेशों में आयोजित चीनी प्रदर्शनियां “समग्र रूप से स्थिर, संरचना में अनुकूलन” की विशेषताएं प्रदर्शित करती हैं, जिनकी संख्या में निरंतर वृद्धि जारी रही। मशीनरी एवं परिवहन-लॉजिस्टिक्स उद्योग चीनी कंपनियों द्वारा विदेशों में सर्वाधिक प्रदर्शनियां आयोजित करने वाले क्षेत्र रहे।
इसके अलावा, उपभोक्ता वस्तु उद्योग भी प्रदर्शनी परियोजनाओं की संख्या के मामले में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शा रहा है, जो चीनी उद्यमों की वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
यह रिपोर्ट चीन के प्रदर्शन उद्योग की गतिशील वृद्धि, आंतरिक बाजार की स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान में मानवाधिकार वकीलों का दमन जारी, अधिकार संगठन ने की निंदा
इस्लामाबाद, 23 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने मानवाधिकार वकील इमान जैनब मज़ारी-हाज़िर और उनके पति हादी अली चट्टा की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। परिषद ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है।
एचआरसी का यह बयान तब आया है, जब इमान और हादी को शुक्रवार को इस्लामाबाद में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे जिला अदालत जा रहे थे। दोनों के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में एक मामले में आरोप तय किए गए थे, जो कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है।
मानवाधिकार परिषद ने कहा, “यह कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रताओं और वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में इस तरह के कदम अस्वीकार्य हैं और यह मौलिक अधिकारों की रक्षा के बजाय उनके उल्लंघन की खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है।”
परिषद ने दोनों वकीलों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए उनके खिलाफ चल रही सभी “अवैध और प्रतिशोधात्मक” कार्यवाहियों को तुरंत रोकने की अपील की।
एचआरसी ने कहा, “कानून का शासन, पाकिस्तान का संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों का सम्मान करना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में नहीं तोड़ा जा सकता।”
गिरफ्तारी के बाद कई पत्रकारों, सांसदों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए दोनों वकीलों को न्याय दिलाने की मांग की।
पाकिस्तानी सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अदालत जाते समय इमान और हादी की गिरफ्तारी “राज्य की अति-हस्तक्षेप और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के चिंताजनक पैटर्न को उजागर करती है, जो निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों को कमजोर करती है।”
उन्होंने कहा, “राज्य की ऐसी कार्रवाइयां न केवल संस्थागत कमजोरियों को उजागर करती हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का खतरा भी पैदा करती हैं, जिससे कानून के शासन पर जनता का भरोसा टूटता है। मैं कानून के शासन, निष्पक्ष सुनवाई और सभी के लिए न्याय की मांग करता हूं। इमान और हादी को तुरंत जमानत के लिए पेश किया जाना चाहिए और उन्हें अपने मामले में बचाव का पूरा अवसर मिलना चाहिए।”
पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने गिरफ्तारी को “मानवाधिकारों और कानून के शासन पर कब्जाधारियों का खुला हमला” बताते हुए कहा कि दोनों युवा वकील अदालतों में पीड़ितों का बचाव कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “फासीवादी हथकंडे कब्जाधारियों को जनता के आक्रोश से नहीं बचा सकते, जो निश्चित रूप से उन्हें जवाबदेह बनाएगी।”
एक अन्य मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने भी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा, “ये गिरफ्तारियां कानून के बजाय डराने-धमकाने पर आधारित राज्य की रणनीति को दर्शाती हैं। सच बोलने वाले वकीलों और कार्यकर्ताओं को चुप कराना उचित प्रक्रिया और मौलिक स्वतंत्रताओं पर सीधा हमला है।”
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation


















