यूपी में जमीन मालिकों को बड़ी राहत, कम शुल्क में बदल सकेंगे जमीन का भू-उपयोग
उत्तर प्रदेश के मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई हालिया प्रशासनिक कार्रवाई और अदालती रुख के बाद शासन ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है. राज्य सरकार ने मास्टर प्लान के तहत भू-उपयोग (Land Use) बदलने की प्रक्रिया को काफी आसान और सुलभ बना दिया है. इसके लागू होने से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो आवासीय क्षेत्रों में बिना नक्शा पास कराए या भू-उपयोग बदले व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे थे.
भू-उपयोग परिवर्तन नियमावली में बड़ा संशोधन
उत्तर प्रदेश सरकार के आवास विभाग ने 'उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क निर्धारण) नियमावली' में आवश्यक संशोधन कर दिए हैं. इस नई व्यवस्था के तहत लोग बहुत ही कम शुल्क का भुगतान करके अपनी जमीन का भू-उपयोग बदलवा सकेंगे. विशेष रूप से कृषि भूमि को अब आसानी से और कम कीमत पर आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक, कार्यालयीन या मिश्रित श्रेणी में परिवर्तित कराया जा सकता है. इसके अलावा, आवासीय भूमि को व्यावसायिक में बदलने की सुविधा भी दी गई है, बशर्ते संबंधित सड़क की चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हो. प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरण अपनी आगामी बोर्ड बैठकों में इस नियमावली को पास कराकर जल्द लागू करेंगे.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेरठ में ए-जोन का री-सर्वे
दूसरी ओर, मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) शहर के ए-जोन का नए सिरे से सर्वे शुरू करने जा रहा है. मेडा वीसी ने छुट्टी से लौटने के बाद प्रवर्तन अधिकारियों के साथ बैठक की और सोमवार से इंजीनियरों व कर्मचारियों की टीमों को धरातल पर उतरने के निर्देश दिए हैं. री-सर्वे के दौरान भवनों के वास्तविक और भौतिक रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा. इस प्रक्रिया में मेडा की स्थापना से पूर्व बने भवनों की अलग सूची बनाई जाएगी, जबकि स्थापना के बाद बने निर्माणों के स्वामियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा.
16,726 भवनों की सूची के आधार पर होगी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि मेडा ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में ऐसे 16,726 निर्माणों की सूची सौंपी थी, जिनके पास स्वीकृत नक्शा नहीं था या जहां आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाई जा रही थीं. अब इसी सूची को आधार बनाकर दोबारा मौका मुआयना किया जाएगा ताकि वर्तमान स्थिति और पुराने रिकॉर्ड्स का सही-सही आकलन हो सके. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि री-सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने और भवनों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही नियमानुसार सीलिंग या नोटिस देने की अगली कार्रवाई की जाएगी.
‘चिप से लेकर जहाजों तक’, राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम को बताया देश की जरूरत
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत को घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत और महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा, जिससे तेजी से जटिल होते वैश्विक सुरक्षा माहौल में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल की जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि देश का दृष्टिकोण एक सरल सोच से निर्देशित है। भारत में जो भी चीज बनाई जा सकती है, उसका देश में ही उत्पादन किया जाए और आयात पर निर्भरता कम की जाए।
उन्होंने कहा, “चिप से लेकर जहाजों तक, स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक, यही भारत को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाएगा।”
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को आवश्यक बताया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण और उन पर नियंत्रण रखने की भारत की क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उनके अनुसार, दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में महारत हासिल करना और पूरे विनिर्माण इकोसिस्टम में अधिक आत्मनिर्भरता जरूरी होगी।
हाल के नीतिगत कदमों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने के लिए संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं, जिससे पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण गति मिली है।
उन्होंने कहा, “हम केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं; हम आत्मनिर्भर हैं और भविष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं।”
दूरसंचार क्षेत्र में 2जी से 5जी तकनीक तक के विकास की तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि युद्ध भी पांचवीं पीढ़ी के चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां उन्नत तकनीक सैन्य क्षमताओं और युद्ध के परिणामों को तेजी से प्रभावित करेगी।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही हैं।
सिंह ने कहा कि भारत स्वदेशी क्वांटम तकनीकों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है और साथ ही उभरते रक्षा नवाचारों को समर्थन देने के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में भी विविधता लाई जा रही है।
सिंह के अनुसार, भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों तक फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जो देश अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करेंगे, वे बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और आधुनिक संघर्षों में अपनी बढ़त बनाए रखने की बेहतर स्थिति में होंगे।
रक्षा मंत्री ने तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने में भारत के युवाओं की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा समाधान और स्वायत्त प्रणालियों पर काम कर रहे हैं और देश की भविष्य की रक्षा तैयारियों में योगदान दे रहे हैं।
सिंह ने कहा, “भारत के युवा अब केवल भविष्य की नौकरियों की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे भारत के भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक तैयार कर रहे हैं।”
--आईएएनएस
एबीएस
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