रूसी तेल को लेकर भारत के पीछे पड़े अमेरिका और पश्चिमी देशों में बवाल तब मच गया जब उन्हें यह पता चला कि भारत अब रूस से ऐसी चीज खरीद रहा है जिस पर सेंशंस का भी असर नहीं होता। यह ऐसी चीज है जिसने अमेरिकी डॉलर की जड़े काटनी शुरू कर दी हैं। रूस की एक न्यूज़ एजेंसी ने बताया है कि भारत ने पिछले साल के पहले 10 महीनों में रूस से $5 करोड़ डॉलर यानी करीब 458 अरब भारतीय रुपए से ज्यादा का सोना खरीद लिया है। भारत ने विदेशों में जमा अपना सोना देश वापस लाना शुरू कर दिया है। भारत ने दुनिया की सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट माने जाने वाले यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स को बेचना शुरू कर दिया है। उसकी जगह भारत ने रिकॉर्ड तोड़ सोना खरीदना शुरू कर दिया है। दरअसल अमेरिका के खिलाफ पूरी दुनिया में एक साइलेंट क्रांति शुरू हो गई है। अब इसी क्रांति को भारत और रूस ने अचानक नया मोड़ दे दिया है। अभी तक अमेरिका के ट्रेजरी बॉन्ड्स को दुनिया की पहली पसंद माना जाता था। यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स दुनिया की सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट में गिने जाते थे। यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स ट्रस्ट का दूसरा नाम बन चुके थे।
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक्स ने यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स में अंधा पैसा लगा रखा था। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि दुनिया में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट ट्रेजरी बॉन्ड्स में होती थी। दूसरे नंबर पर सोना आता था। लेकिन अब 30 साल में पहली बार दुनिया के सेंट्रल बैंक्स में यूएस ट्रेजरी बॉन्ड से ज्यादा गोल्ड रिजर्व्स आ गए हैं। यानी अमेरिकी डॉलर से दुनिया का विश्वास उठ रहा है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक्स के पास अब 4.5 ट्रिलियन का गोल्ड रिजर्व है। जबकि यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स $3.5 ट्रिलियन तक आगए हैं। अमेरिकी डॉलर के खिलाफ इस बगावत में टर्निंग पॉइंट बना फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस यूक्रेन युद्ध। अचानक एक दिन पश्चिमी देशों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यह ऐलान कर दिया कि वह विदेशों में जमा रूस के 300 बिलियन डॉलर्स को फ्रीज कर रहे हैं। यानी एक झटके में पश्चिमी देशों ने रूस के अरबों रुपए फंसा दिए। इसे देख दुनिया के कई देशों को लगा कि अगर यह रूस के साथ हो सकता है तो हमारे साथ भी हो सकता है।
इनमें सबसे ज्यादा डर भारत और चीन को था। यहीं से दुनिया के कई देशों का अमेरिकी डॉलर से भरोसा उठने लगा क्योंकि अमेरिका अपने डॉलर का इस्तेमाल हथियार की तरह करने लगा था। लेकिन भारत ने अमेरिका की इस स्ट्रेटजी को पलट कर रख दिया है। पिछले कुछ समय में रूस ने अपने गोल्ड रिजर्व्स को डबल कर लिया है। भारत भी विदेशी बैंकों में जमा अपना सोना वापस देश ला रहा है। सैकड़ों टन नया सोना खरीदा जा रहा है। यूएस ट्रेजरी बॉन्ड्स को बेचा जा रहा है। भारत और रूस को समझ आ गया है कि जंग का असर डॉलर पर तो पड़ सकता है लेकिन सोने पर नहीं पड़ेगा।
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दुनिया भर में चल रही अस्थिरता के बीच भारत स्थिरता को बहाल करने की कोशिश में जुटा है। जहां पहले यूरोप के साथ मदर ऑफ ऑल डील कहे जा रहे ट्रेड डील का ऐलान करके दुनिया भर के बाजार से टेरिफ के दबाव को कम करने का काम भारत ने किया है। तो वहीं अब ब्रिक्स के इस देश ने ग्लोबल साउथ की एकजुटता को बढ़ाने के लिए भारत को फोन घुमाया है। दरअसल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लुला द सिलवा के बीच 22 जनवरी को एक अहम टेलीफोन बातचीत हुई। इस बातचीत में भारत ब्राजील रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की गई और ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आपको बता दें ब्राजील के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया। जहां दोनों नेताओं ने आने वाले समय में भारत ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया है। बातचीत के बीच दोनों नेताओं के बीच यह सहमति बनी। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस बातचीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ब्राजील के रिश्तों में इस समय मजबूत गति देखने को मिल रही है और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों को छूने की क्षमता रखती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति लूला का भारत में जल्द स्वागत करने को वह उत्सुक हैं।
आपको बता दें इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने साझा की। हमने भारत ब्राजील रणनीतिक साझेदारी में बनी मजबूत गति की समीक्षा की जो आने वाले वर्ष में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए हमारा करीबी सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। मैं उन्हें जल्द भारत में स्वागत करने की प्रतीक्षा कर रहा हूं। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही गाजा में शांति और बहुपक्षीय व्यवस्था के समर्थन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है। दोनों पक्षों ने यह माना कि आज के वैश्विक हालात में सुधरी हुई बहुपक्ष व्यवस्था साझा चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।
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