1983 में शुरू हुई थी नाग की कहानी, अब जाकर बना भारत का स्वदेशी 'टैंक किलर', DRD0 के झटके से सदमे में चीन-पाकिस्तान
1983 में शुरू हुई भारत की नाग मिसाइल की कहानी करीब चार दशक बाद नाग एमके-2 तक पहुंच चुकी है. इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शुरू हुई इस जर्नी में भारत ने सिर्फ एक एंटी-टैंक मिसाइल विकसित नहीं की, बल्कि सीकर, गाइडेंस, इमेज प्रोसेसिंग, प्रोपल्शन, वॉरहेड और लॉन्चर जैसी कई क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को इस मिशन में शामिल किया गया. 2017 के डेवलपमेंट ट्रायल्स से लेकर 2019 के पोखरण यूजर ट्रायल्स और 2020 के फाइनल यूजर ट्रायल तक नाग ने कई अहम पड़ाव पार किए. जनवरी 2025 में नाग एमके-2 और नए मिसाइल कैरियर के फील्ड इवैल्यूएशन ट्रायल्स ने इस लंबी कहानी को एक नए चरण तक पहुंचाया. आइए जानें 42 पहले शुरू हुए नाग मिसाइल के इस सफर की पूरी कहानी...
'शांति हमारी ताकत है कमजोरी नहीं': राजनाथ सिंह ने दुनिया को समझाया नए भारत का दम, पाकिस्तान को दिखाई लाल आंख
भारत की रक्षा और विदेश नीति के कड़े तेवर साफ करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी मुल्कों और दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया है. उन्होंने कहा कि भारत शांति और संवाद का समर्थक जरूर है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का हथियार बनाएगा, तो बातचीत की मेज पर आने की हर गुंजाइश खत्म हो जाती है.
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